Wednesday, December 31, 2008

हमसफ़र बन के .....!!

हमसफ़र बन के
तुम मिलो, मिलो न मिलो
यही कम नहीं जिंदगी के मोड़ पे
तुम मुझे खड़ी तो मिलो !!

नया साल मुबारक हो !!!!!!

ऐ मेरी भोली और मासूम सनम
नया साल मुबारक हो
ये सुबह की लाली ये मौजें , नई सुबह
मुबारक हो

हर लम्हा चैन से बीते , न रहे तू कभी भी उदास
तेरा हर गम बाँट लूँगा मैं , मेरी हर खुशी
तुझे मुबारक हो ।

प्रसन्नता का पारावार नहीं सुबह
लगती है सावन सी
तेरी खिड़की नज़र आती है मुझे
नई नवेली दुल्हन सी
मौजो का ठिकाना न पूछो, खुशियों
का आलम न पूछो
हर घड़ी मुझे लगती है तुझसे
मिलन की रातों सी
जीवन मिले तुझे , जिंदगी मिले तुझे
तू खुश रहे
मेरे दिल के अत्युत्तम भावो का
गुलदस्ता मुबारक हो

ये सुबह , ये शाम , ये रात , ये सितारे
तुझे मुबारक हो
ऐ मेरी भोली और मासूम सनम नया
साल मुबारक हो

नई सुबह को कितने अहसास दिल में
मेरे उपजे हैं
जिनको मैंने दिल से चाहा वो ही मेरे
अपने सपने है
चाहता हूँ आज तुझसे मिलन की घड़ी में
शमा भी जले
कर सकूं , मैं पूरी बातें वो तुमसे जो
मुझे कहनी है
तेरे दिल मे तमन्नाओं का दिया जलता
रहे हमेशा
हर साहिल हो तेरा , सागर उल्फत की
मौज मुबारक हो
ये 'रतन' भी तेरा , मेरे गीत की हर कड़ी
तुझे मुबारक हो
ऐ मेरी भोली और मासूम सनम
नया साल मुबारक हो !!!

चुप्पी तोड़ो !!!!!!!!

तुम भी परेशान हो
मैं भी परेशान हूँ
मगर क्या करुँ
हमारे तुम्हारे बीच
हिचकिचाहट की
एक दीवार खड़ी है

राहों में तुम आगे
बढ़ जाते हो
मैं अपनी जगह पर
ठिठका रह जाता हूँ
कौन पहल करे
सिलसिला बातों का
ज़ोर पकड़े ।

अभी तक तो निगाहें
मूक आमंत्रण देती हें
तुम मुझ पर वारे
मैं तुम पे वारा
मगर हमारे तुम्हारे बीच
व्याप्त है खामोश सन्नाटा

इस सन्नाटे को बदलो
इस चुप्पी को तोड़ो
वरना हम तुम यूँ ही
तड़पते रहेंगे सालो साल
ना तुम बोलोगे
न मैं बोलूँगा
मगर खामोशी
की आवाज़
मैं समझता हूँ

यह चुप्पी तुम्हारी
मुझ पर भारी
पड़ रही है
इससे पहले की
मर्यादा का उल्लंघन करुँ
तुम मेरे करीब आकर एक
मीठी चितवन के बदले
यह जिंदगी मोल ले लो
और मुझे सदा सदा के लिए
निहाल कर दो
अपनी उसी मुस्कान को
मेरे अतीत के antardwando की
व्याप्त आकुलता
की झुंझलाहट
में उठाये गए
कदमो से मत जोडो
थोडी सी तो तुम
हिम्मत करो
नहीं तो खामोशी
मे ही दफ़न
हो जायेगी
ये जिंदगी
और मैं एक खामोश सदा
तुमको देता रहूंगा
जिंदगी के अन्तराल तक
मौसम भले बदल जाए
साज़ बेआवाज़ हो जाए
मेरे होठों से तरन्नुम
phoot निकले
और वो एक गीत की
रचना कर ले

इसके पहले ही तुम
एक तड़पन के साथ
अपने होठों से निकली
एक ग़ज़ल मेरे
नाम कर दो
और मैं उसकी
अहमियत को
पहचान कर
अपनी ही ज़मीन पर
ठहरा ही न रहूँ
बल्कि आकाश में ही अवस्थित
चाँद सितारों से बातें करुँ
अपनी हर ग़ज़ल
तुम्हारे नाम करुँ
और एक नए अंदाज़
के साथ नए साल में
तुम्हे मुबारकबाद दूँ
बस.......अभी इतना ही !!!!!!

कभी दूर रह के......!!!!

कभी दूर रह के भी
पास नज़र आते हो
कभी नज़दीक रह कर भी
दूर नज़र आते हो
कभी नज़र मिलाते हो
कभी नज़र चुराते हो
कभी सामने आते हो
कभी शर्माते हो !!!

Wednesday, December 17, 2008

मैं समझता हूँ...........

मैं samajhta हूं तुम मुझसे
वफ़ा निभाओ तो बात बुरी नहीं
तकदीर रोशन हो तो कोई
शय होती है बुरी नहीं
गर तुम ख़ुद ही मेरी हमक़दम
बन कर चलना चाहो
प्यार में मजबूरियां भी मिले
तो मेरे लिए बुरी नहीं।

तथ्य...........!!!!

आज फ़िर तुम हमसे हारे
मैं जीत कर भी तुमसे हारा
समय का यही है तकाज़ा
हार में असली मज़ा है
इसलिए बार बार मैंने
हार को ही अपने लिए चुना
तुम्हे बार बार जिताया
कभी तुमको जीतने को
मन भी नहीं करता
तुम थोड़ा gumaan to कर लो
क्यों मैं naahak हारा
तुमने मुझे bechaara samjha
मैं tumhaari naasamjhi पर hansa
pagle! हम और तुम
अलग कहाँ है
prakriti का shashwat niyam
तुम्हे समझ नहीं आया
सब mujhme kalpit
sabme मैं vyaapak
जो चेतन tumhaare अन्दर
वही मेरे भीतर
इसमे जीत और हार नहीं है
मैं brmhaand me vyaapak
सब कुछ mujhme kalpit है
फ़िर तुम भी to वही हो
जो मैं हूँ
हम तुम एक ही ikaaee
के दो pahloo हैं
bhale samandar के chor हैं
tumhaare मेरे me एक ही satta
काम करती है
और वह है saarvbhoum
तुम सोच कर प्रसन्न हो
तुमने मुझे bhulaya
पर सच मानो तुम्हे
मैं आज तक भूल न पाया
kyoki तुम मेरी ही to
rachnaa हो
मुझसे अलग
tumhara astitwa नही है
kartaa से कारण
अलग नहीं होता
वैसे ही जैसे anshi से ansh
parmaarath ज्ञान यही है
जो thodaa बहुत समझ पाया
हम और तुम न अलग थे
न अभी अलग हैं
और भविष्य में भी जुदा न होंगे

kalewar to बदलते हैं
काल चक्र के कारण
पर जो नहीं badalta
वह abdal aatma है
और मैं aatmaa में
pratisthit हूँ
इसलिए moun हूँ

काश! की तुम aatmaa को jaano
या to फ़िर मुझे pahchaano
नही to सिर्फ़ फ़िर
अपने अन्दर jhaank कर देखो
यदि मैं astya हूँ
to क्या तुमने कभी भी
मेरे बारे me नही सोचा
मेरे astitwa को नही swikaara
यह सिर्फ़ तुम्हारी dhaarnaa है
की मैं वह नहीं जो pahle था
अपनी आवाज़ के
khokhlepan को pahchaano
इसके लिए चाहे अपने अन्दर
dubkee lagaana पड़े
पर satya को jaano
नही to इस niraadhaar जीवन
का कोई सन्दर्भ नहीं होगा
दो_चार maans के lothde को
janmaa कर कुछ khushiyaan
कुछ yantrnaaye कुछ jijivishaa
लिए जीवन से मुक्त हो जाओगे
और अंत समय तक
मुझे नही या kahu
की अपने आप को नहीं
pahchaan paaoge

फ़िर वही naarkiy ghutan
की sadaandh tumhara peechaa
ना chodegi
हम तुम janmte और मरते रहेंगे
प्रसंग बदलते रहेंगे
iskaa अंत tab तक नहीं होगा
जब तक तुम अपने को न pahchaano

मैं फ़िर फ़िर तुमसे
haarnaa चाहता हूँ
और हार कर भी
खुशी के गीत
gungunana चाहता हूँ

काश तुम vaastav में
मुझे भूल jaao
मेरी भी antarvyathaa
समाप्त हो जाए
और मैं अपने आप me
स्थित हो कर शांत हो jaoon .........!!!!

समय ........ !!!!!

समय को कितना
ही कस कर पकडो
वह सरक ही जाएगा
हाथों में छोड़ कर केंचुल ।

समय सरक रहा
अविरल प्रतिपल
इसका विश्वास कठिन है
भूत भविष्य को छोड़ो
सब, वर्तमान पर छोड़ो
नही तो एक दिन
यह सब कुछ
लूट ले जाएगा
नियति का माध्यम बना।

समय किसी को
नहीं बक्श्ता
काल चक्र के आगे
समय बेसहारा है
सब समय से ही हारे हैं
फ़िर काल के आगे
किसका चला
इसलिए समय को
पकड़ने की कोशिश न करो
वरना यह fun उठा कर
तुम्हारे विश्वास को दस देगा
और तुम्हे दे देगा एक
अनजानी अनचाही मौत।

समय का चक्र जब
कुचक्र बन जाएगा
इससे कौन बचा
न योगी, यती न रजा
न रंक
देवता तक इसके
चंगुल में हैं ।

फ़िर तो यह किसका है,
शायद किसी का नहीं
फ़िर अपने पराये में क्या रखा है
अपना अंहकार, अपना अभिमान
विगलित करने में क्या
नही कोई फायदा है
सब है काल_चक्र के सामने
बौने,ठिगने, और लंगडे
हमारा तुम्हारा अस्तित्वा
ही क्या है ।

हम आज हैं कल नहीं
इसके लिए कोई
जिम्मेदार नहीं
बस एक समय है
बस चलता ही जाता है

समय कब से चला है
कोई नहीं जनता
सृष्टि कब से बनी
इसका भी सिर्फ़
अनुमान हैं पर
समय असाधारण है।

इसकी किसी से
मिसाल नहीं
शायद इश्वर की
तरह यह भी है
अनादी अनंत
कोई और _छोर नहीं
या समंदर की तरह
अगाध
जिसकी कोई थाह नहीं
चाहे जो कुछ भी हो
समय का कोई भरोसा नहीं

आज का काम
कल पर न छोड़ो
या तो अपनी आत्मा से
नाता जोडो
जो शाश्वत है और
समय भी इसको पकड़ नही सकता।

काल चक्र का इस पर
कोई प्रभाव नहीं
यह अपने आप में
परितृप्त है
स्वयम्भू है
निर्गुण निराकार है
इसका उदय और
अवसान नहीं
संकल्प से शरीर करती धारण
फ़िर जीव हो कर
करती समय का
अनुसरण

फ़िर फ़िर वही समय
फ़िर वही काल चक्र
सत्य तो बस यही
आत्मा है
इसलिए आत्म्मा से
आत्मा मे संतुष्ट रहना
ही सच्चा ज्ञान है
आचार्य शंकर का
अद्वैत है गीता का ज्ञान है

समय और आत्मा का
लगता सामंजस्य है
सब हैं इससे भ्रमित
कोई समाधि लगा
फ़िर भी जान न पाया
आत्मा को जानना
कोरा खेल नहीं
कुछ ने भक्ति से
कुछ ने अष्टांग योग किया
कोई तत्वा ज्ञान
का ग्यानी बना
पर समय, काल चक्र
और आत्मा का
भेद समझ ना आया

कार्य स्थूल से
चिंतन सूक्ष्म से
और समाधि
कारण शरीर से
पर सारे ये प्रकृति के हैं
फ़िर मन बुद्धि अंहकार
का पुनरावर्तन
फ़िर कहीं जा कर
आत्मा का अनुसंधान

क्या आत्मा ही सच हैं
जीव लगा दे तो जीवात्मा
पर लगा दे तो पत्मात्मा
दोनों हटा दे तो बची
सिर्फ़ आत्मा आत्मा ही आत्मा

आत्मा ही एक है
जो सर्व व्यापक है
चिंतन का विषय है
बहिर्मुखी का चिंतन छोड़ कर
जो अंतर्मुख बना
अपने ही अन्दर जो
उसी ने इसका
ज्ञान पाया
पोथियों_पुरानो से कोई
इसका भेद समझ नही पाया !!!!!!

"राजीव रत्नेश"

Sunday, December 14, 2008

आज मेरी वंशी क्यो मौन ......!!!!!!

आज मेरी वंशी क्यो मौन
कौन गया ह्रदय मे दर्द घोल ।

एक लय सी निकली थी
या रुदन की अभिव्यक्ति थी ।
एक मधुर हास के बदले
ले गया दिल को कौन मोल

आज मेरी वंशी क्यो मौन
कौन गया ह्रदय मे दर्द घोल ।

इस दर्द के सहारे जिया
इस दर्द के सहारे घुटा
लूट ले गया कोई खुशी
जीवन मेरा अनमोल ।

आज मेरी वंशी क्यो मौन
कौन गया ह्रदय मे दर्द घोल ।

प्राणों में रूप तुम
जाने कैसे समाये थे
जीवन रस का प्याला दे कर
ले गए निधि बेमोल

आज मेरी वंशी क्यो मौन
कौन गया ह्रदय मे दर्द घोल

छवि निरख कर ह्रदय
प्रमुदित था महा
चुपके से अनजाने मे
कौन गया ह्रदय को खोल।

आज मेरी वंशी क्यो मौन
कौन गया ह्रदय मे दर्द घोल ।

छवि मूक मनोहर मधुर
प्राणों मे अहा निस्पंदन
दे गए आज दर्द कठोर
मेरी मृदु कविता के बोल ।

आज मेरी वंशी क्यो मौन
कौन गया ह्रदय मे दर्द घोल ।

दिल की दिल मे ......!!!!

दिल की दिल मे ही रहे तो अच्छा है ,
रहे दिल शाद तेरा तो अच्छा है ।

तुम चाहते हो हमें और हम तुम्हे
दिल को बहलाने को ख़याल अच्छा है ।

महफ़िल मे नज़रे चुराओ भले,
ज़माने से बचने को हुनर अच्छा है ।

हम भी तो देख कर अनदेखी करते
मिल जाओ राहों मे खयाली पुलाव अच्छा है ।

चला हूँ मकतल की जानिब बेखबर
farmaan ho jaye सरकारी तो अच्छा है।

कहने को तो तुम दूर हो हमसे,
दिल से दूर तड़प हो जाए तो अच्छा है।

रोज़ की कवायद है तेरे घर तक
प्यार मंजिल पे आ जाए तो अच्छा है।

हम भी ढूंढ लेंगे तुमको "रतन"
ख़ुद आ जाओ राहों मे तो अच्छा है !!!!!

शीशे का महल......!!!!!!!

शीशे का महल हो ,
और चांदनी रात हो ।

हम तुम साथ हों
और मौसम की बात हो ।

रुपहले बादल हों
आसमानों की बात हो ।

दिल से दिल मिले
भले हमारी आफात हो ।

दिल्लगी भी है ज़रूरी
कुछ मुस्कराहट की बात हो ।

दिल_ऐ_ऐय्यार ने कुछ कहा
तुम्ही से तुम्हारी बात हो ।

अच्छा तो है हम साथ हों
और चांदनी की बारात हो ।

पतझड़ बाग़ मे हो
और फूलों की बात हो ।

हम तुम साथ हों
ज़माना भले ख़िलाफ़ हो ।

असरदार उसी की बात है
"रतन" की मर्ज़ी जिसके साथ हो ।


Thursday, March 6, 2008

आज की देख कर ....!!!!

आज की देख कर आपकी मेहरबानियाँ,
भूल गए हम सारी सितमरानियाँ.

नजरो के जाम से भी सुरूर आ गया हमें,
हो गई हैं नई प्यार की कहानियां.

मेरी नसों मे गंग_ओ_जमुन की लहर है,
सासों मे तेरी जुल्फों की महक हैं.

हर ओर रंगीनी ही रंगीनी,
चमन_ऐ_दिल में चिडियों की चहक है.

दिखने लगी हैं मुझको तेरी अंगडाइयां,
bhaane लगी हैं दिल को तेरी शोखियाँ.

हर कली पे भी आज शबाब हैं,
गोया हर तरफ़ बिखर गई है मस्तियां.

परचम की तरह लहराता हैं आँचल,
रूख पे मंडराते हुए वो जुल्फों के बादल.

मुझे मदहोश करता है रह_रह के,
तेरी मद भरी इन आखों का काजल.

आ भी जा तू अब मेरे शहर में,
कट नही रहीं खामोश तनहाइयाँ.

मेरी मासूम मुहब्बत की कसम तुझे,
शामियाने दिल मे बजा दे शहनाइयां .

मैंने सुनी हैं तेरे दिल की धड़कने,
मैंने देखी है तेरे जिस्म की तड़पने




न अब नखरे दिखाओ जान _ऐ_मन ,
मैंने देखी हैं तन्हाई की तेरी siskane

हर गलीचा अपने नसीब को सराह रहा,
दे दी हैं जो tune अपने panw की निशानियाँ.

वो तेरा झिलमिलाता आँचल और ये रात,
सताने लगी हैं अब “रतन” को तेरी शैतानियाँ.

Friday, February 8, 2008

जिंदगी अपने हिसाब .........!!!!!!!!

जिंदगी अपने हिसाब से पी,
मेरी महफ़िल से पैमाना उठा के पी.

जिसने छोडी थी बज़्म कहे बगैर,
उसी के दामन मे तू शौक से जी.

अहले_दुनिया समझते भी नहीं,
हमने किस हाल मे किस तरह पी.

बज़्म_ए_शौक वो आते भी हैं तो,
हमने नज़रे झुका के पी.

सर_ए_बज़्म शरमाये_शरमाये थे
पीनी हुई तो आँचल ढलका के पी.

दुनिया समझती ही नहीं क्या करे,
“रतन” ने हमेशा अपनी मर्ज़ी से पी !!!!

फूलों में........

फूलों में खुशबू होती है,
आँचल में आबरू होती है,
किसी की समझ में न आये,
नज़र में गुफ्तगू होती है !!!!!!

Friday, January 25, 2008

man anmana ho jata hai ..........!!!!!

मन अनमना हो जाता है,
जब तुमसे सामना हो जाता है

वक्त_ऐ_माजी का सिलसिला,
और ख़त्म फ़साना हो जाता है,

हर किसी से कहना हाल_ऐ_दिल,
शायरी हर जज्बा हो जाता है

गुल तोड़ लाये हम गुलज़ार से,
खफा हमसे बागबान हो जाता है

नश्तर से दिल में चुभते हैं ,
हर ज़ख्म हरा हो जाता है

उदास बैठा है तमन्ना _ऐ_जाम से,
खली जब पैमाना हो जाता है

अब बुत की कैसी इबादत,
दिल ही जब बुतखाना हो जाता है

बाद_ऐ_वफ़ा के चलने से,
मौसम और सुहाना हो जाता है

देते है जब_जब वाइज़ नसीहत,
दिल अपना काफिराना हो जाता है

जाम की कहें की साकी की कहे,
हर बज्म मैखाना हो जाता है

अपना न कायनात भर में कोई,
उसूल हर अब पुराना हो जाता है

चले थे कहाँ के लिए "रतन"
अब तो दुश्मन ज़माना हो जाता है !!!!!!!!!!!!

MUDDATO SE TU.................!!!!!!!

मुद्दतो से तू मेरे दिल मे मकीं है,
फ़िर क्यो खानुमा बरबाद करने की सोचे

बमुश्किल तो ये आशियाना बनाया था,
क्यो इसे हवाले तूफ़ान करने की सोचे

हमने माना इश्क हुस्न पे फ़िदा हो गया,
मगर हुस्न क्यो इश्क को शर्मसार करने की सोचे

जिंदादिली राहे उल्फत की मंजिल है,
क्या तू हमसे तर्क_ऐ_इल्तजा को तरसे

ज़माने भर की गर्दिश_ऐ_ इयाम ने सताया,
मगर तुझे ना भुला सके न भुलाने की सोचे

खुर्शीद की जिया है खल्वत क्यो चाहे,
महताब होकर आफताब बेनकाब करने की सोचे

घुंघराले गेसू काँधे पे फैलने को है,
एक दिन साया_ऐ_अरमान बनने की सोचे

सरगोशिया तेरी मुझसे और क्या चाहे,
कदमबोसी कर के तू तर्क_ऐ_वफ़ा करने की सोचे

तेरे फिराक मे शाम_ओ_सहर से बाज़ार हम,
तू क्यो हम ही से इसरार करने की सोचे

महबूब मेरे तुझे इम्तिहान ही लेना है गर,
फ़िर क्यो हमसे सवालात करने की सोचे

निकल पड़ेंगे हम सूए तुर्बत भी अगर,
मेरे जनाजे को बदोश_ऐ_स्वर करने की सोचे

अभी तक तो राज़_ऐ_इश्क पिन्हा है,
तू क्यो इसे आफ्कार करने की सोचे

तेरे दामने मे साड़ी कायनात है मेरी,
क्यो बहिश्त से बाहर करने की सोचे

मिल जाओ कही शहर_ऐ_नामुराद मे,
जुदा दुनिया_ऐ_फनी से बियाबान करने की सोचे

दुनिया के ताना_ओ_मसखरी से बच जाए,
अगर तू "रतन" को पैगाम भेजने की सोचे !!!!!!

HAMAARA AAINAA LE JAAO......!!!!!!

Janni ho gar haqikat ,
Leni ho jo kuch nasihat
Dikhlayegi tujhe asli surat
To hamara aaina le jao…….

Dil me kuch chahat baqi ho,
Kisi ki rahmat baqi ho
Apni tammna naa sawarti ho
Tasveeren ird_gird machalti ho
To hamara aainaa le jaao……..

Kabhi rounak_e_bazm the,
Kitne dilo ke zakhm the
Nairangiya ishq ki khoob
Jalwayen tumhare pur asar the
Waqt ki taaqid par
abHamara aainaa le jaao………

Agar chahte ho masrrat
Dil me ho kisi ki chahat
Ulfat ke diye na jalao,
Bhool jao wo beeti raat
Swapn abhi bhi gar aate hai
To hamara aainaa le jaao………..

Agar chahiye mout se nizat
Aao mil jao hamare saath
Saath mil kar dekhenge
Jo maine dekha hai apne saath
Tumko bhi janna ho "RATAN"
To hamara aainaa le jaao……… !!!!!!!!
Kaate ko gulab,
paani ko shraab likhte hain,
Achhe _bhale ko
khana_khrab likhte hain.

Jis gazal ka unwaan na ho,
Hum us par kalaam likhte hain.
Gar kisi ne chaha maahtaab hona,
Hum husn ko bemisaal likhte hain.

Magrur adaa ho, nazo_nashtar,
Paini nazar ko talwaar likhte hain.
Jigar hamara hai, kaleja unka,
Haadse ko chaak garebaan likhte hain.

Kashti ka zimmedar naakhuda nahi,
Ham lahar ko majhdaar likhte hain.
Subah se shaam, shaam se raat
Safar ko unka intezaar likhte hain.

Mousam badla ya waqt ka mijaz
Kis kadar hum pure armaan karte hain.
Wo puche na puche har haal unkaHum
ba_adab istaqbaal karte hain.

Chaandni me nahaya hua shaffaq badan,
Fir bhi hum aatish_e_aaftaab likhte hain.
Naaz uthana unka hamara kaam nahi,
Fir bhi patjhad ko bahaar likhte hain.

Jaante hain sare aibo_hunar magar,
Unhe khushbu_e_har singar likhte hain.
Mana ruthna uska shokhi se nahi khali,
Us par gazal `RATAN" laazwab likhte hain !!!!!!!

यह तुम्हारा प्यार .!!!!!

यह तुम्हारा प्यार,
जैसे रौशनी की धार
अर्ध विकसित पुष्प में ,
पराग का संचार
याद आया अपरिचित ,
तुम्हारा प्यार.

काल का अनुबंध टूटा
मन हुआ निर्द्वंद
कामना से उत्पन्न भावना
बलहीन सा स्वाछोवास

हो गया जगमग
दुधिया चांदनी मे नहाकर
बरस गए बादल
कुंतल लहराकर
नयन सजीले
अविरल धार.

अत्तल _वितल का
समझ आया अन्तराल
अपना मन प्रतिबंधित
स्वयम जला
बना काजल
बही अश्रुधार.

अकिंचन सी भूल
हृदय का शूल
याद आया
तुम्हारा प्यार,!!!!!!!

आगाज़ .....!!!!!!!!

क्या करेगा कोई इस मोहब्बत के नाम से,
वाकिफ नही हम भी इसके अंजाम से,
खुदा नज़र_ए_बद से बचाए,
तुझे हर हाल मे, हमारा क्या है,
हमने काटे माह_ओ_साल इंतज़ार मी !!!!!!

arsaa_e_zindgi....!!!!!


अरसा_ऐ_जिंदगी गुजरी तेरे इंतज़ार मे,
बाम पर तुम ना आए दिलाने यकीन भी .

खता हमसे हुई जो तुझे बेंतेहन चाहा ,
तुमसे कोई गिला नही किसी सूरत अभी ही.

बरहना_सर घूमती है मौत हम भी तैयार है,
राहों मे मिल जाओ, ना बोलो कभी भी.

शब् को मिले सहर को बिछड़ भी गए ,
दिल ने कहा वह अब भी बैठी है रूठी ही .

बहुत कुछ कहना था अब खामोश हो गए,
अहले ज़माने ने कहा सजी है बज्म तेरी अभी .

कहना आसान है चार लफ्ज़ मुहब्बत के,
उल्फत तुझे आती नही वफ़ा न किया कभी भी.

तेरा किस्सा बयान किया हमने महफिलों में,
भूल जा उस बेवफा को कहने लगे रकीब भी .

कतरा _कतरा लहू टपका आखो से "रतन" ,
कुछ न चाहिए ताज तुझसे मिलने की मर्ज़ी नही !!!!!!

सूरत ...!!

तुम्हारी सूरत दिल मे बस जाए
और मेरी तमन्ना संवर जाए

कली फूल बन जाए,
भले ज़माना मुद्दई बन जाए

ज़द्दोजहद न हो उल्फत मे
हमारी, तुम्हारी न कहीं ठन जाए

हौसला बुलंद और इरादे नेक
तब कहीं मंजिल नज़र आए

हमें तुम कहीं भूल न जाना
बीच में आ कहीं गैर जाए

sadmaate मुहब्बत बर्दाश्त नही
पंखुरिये गुलाब न झड़ जाए

मेरी मुहब्बत रहेगी तुमसे
भले कायनात उलट जाए

अदा शर्मीली,निगाह कातिल
देखो कहीं हम न मर जाए

रोक लो अपने बेबाक नश्तर
टूट न "रतन" पे कहर जाए !!!!!!!!!!!! !!