Friday, January 25, 2008

सूरत ...!!

तुम्हारी सूरत दिल मे बस जाए
और मेरी तमन्ना संवर जाए

कली फूल बन जाए,
भले ज़माना मुद्दई बन जाए

ज़द्दोजहद न हो उल्फत मे
हमारी, तुम्हारी न कहीं ठन जाए

हौसला बुलंद और इरादे नेक
तब कहीं मंजिल नज़र आए

हमें तुम कहीं भूल न जाना
बीच में आ कहीं गैर जाए

sadmaate मुहब्बत बर्दाश्त नही
पंखुरिये गुलाब न झड़ जाए

मेरी मुहब्बत रहेगी तुमसे
भले कायनात उलट जाए

अदा शर्मीली,निगाह कातिल
देखो कहीं हम न मर जाए

रोक लो अपने बेबाक नश्तर
टूट न "रतन" पे कहर जाए !!!!!!!!!!!! !!

7 comments:

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

स्वागतम

shama said...

seedhee saadee pyarisi rachna....koyi taamjhaam nahee...badee achhee lagee...aage aur padhne jaungi...tabiyat kuchh kharab hai...shayad kal..
Aapke blogke naam nehee mujhe akarshit kiya.
Swagat hai, shubhkamnayon sahit!
Mere blogpe aaneka shehil nimantranbhi!
Ek iltija, ye word verification pls hata den...kaheen bura to nahee maan gay?

नारदमुनि said...

wah jee wah, narayan narayan

Abhishek said...

अच्छा लिखा है आपने. स्वागत मेरे ब्लॉग पर भी.

Amit K. Sagar said...

ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
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आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
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अमित के. सागर
(उल्टा तीर)

pritima vats said...

bahut achcha likha hai aapne. jivan se sakchatar karati rachna.

रचना गौड़ ’भारती’ said...

आपने बहुत अच्छा लिखा है ।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com