Saturday, January 17, 2009

मेरे दिल में अनेको घाव हैं

इस दिल को बहलाने

का तरीका निकालो.

बहुत चोट खाई है

तुम तो संभालो..





मेरे दिल में अनेको घाव हैं

जहाँ से भी भाव उठता है

नासूर,सा टभकता है

इसीलिए तो ...........

सोचना भी बंद कर दिया है

की कोई भाव ही न उठे

और दिल में कोई दर्द भी न उठे

एक घाव तो तुमने दिया था

और एक से यूँ हज़ार हो गए

तुम्हारे दिए घाव मे दर्द होता है

तो बाकि सब भूल जाता है

और किसी में दर्द होता है

तो तुम्हारी याद आ जाती है

वोह ज़ख्म मेरी मौत का

सामान बन गया था

तुम्हारा जान लेने का षडयंत्र

मुझपर एहसान बन गया था

मैं किस तरह से इस घाव से

छुटकारा पाऊँ

मैं बेगाना तुम्हारी बदौलत

सरेआम हो गया था

फिजाओं को जब देखता हूँ

और हरियाली में मन

डूबने उतराने लगता है

तो फ़िर कांटो की चुभन

भी याद आती है

और फ़िर उसी घाव में

एंठन होती है

एक खून का कतरा सा

उभर आता है

बिल्कुल लाल

मेरे nakardan gunahon ki tarah

क्यूंकि.........

मेरे दिल में अनेको घाव हैं

जहाँ से भी भाव उठता है

नासूर सा tabhakta hai

सभा-सोसाइटी हो या

दोस्तों की महफ़िल हो

और जब चलता है

दौरे-शराब

जामों का दौर पर दौर

शम्पैन,रस्तोसत और blacknight

की गुलाबी मादकता में

तुम्हारे diye ghaav ke

वहशियाना tharre ki

याद आ जाती है

क्यूंकि-

मेरे दिल में अनेकों घाव हैं

जहाँ से भी भाव उठता है

नासूर sa tabhakta है













na ab कोई iltaza

न कोई hasrat baki है

aadhi guzar चुकी

aadhi रात baki है

तेरे रूबरू

गुलों में गुलाब है तू
सितारों में माहताब है तू.
मेरे जीने के लिए
मानिंद जामे शराब है तू..

चाहत

"पीते हैं मय फकत इसलिए
की कोई शराबी तो कहे .
इसी नाते मेरी और अंगूर की
बेटी की रिश्तेदारी तो रहे..