Sunday, April 4, 2010

ये किसी ने क्या किया ..!!!!!!!!

ये किसी ने क्या किया की जिंदगी
वीरान हो गयी ,
छोड़ गए सफ़र मे साथ क़ि कश्ती
तूफ़ान हो गयी ।

उसको मनाने की गरज थी,
मनाया भी खूब ।
हाल_ए_दिल सुनाना था उनको,
सुनाया भी खूब ।

मगर न उनको रुकना था
न सुनना था ।
लाख कसीद को भेज_भेज
कहलवाया भी खूब ।

प्यार की मंजिल बेरुखी ही
अंजाम हो गयी ।
छोड़ गए सफ़र मे साथ की कश्ती
हवाले तूफ़ान हो गयी ।

दुनिया एक नयी बसाने के लिए
दी थी सदा उन्होंने ,
एक दुसरे का होने की
दी थी रजा उन्होंने ।

कभी हम राह_ए_वफ़ा से गुमराह
भी हो गए थे ,
तब खफा ही रहने की दी थी
सज़ा उन्होंने।

उनके ही याद मे देखो सुबह
से शाम हो गयी ।
छोड़ गए सफ़र मे साथ की कश्ती
तूफ़ान हो गयी ।

बहारें भी चली कुछ रोज़
गुलज़ार_ए_इश्क मे
यूँ ही रवानी कुछ रोज़ कलि के
गुल_ए_रुख्शार मे।

एक भ्रमर ऐसा आया छीन ली
कलियों की लाली
वो भी चली गयी दूर कहीं फूलों के
इस व्यापार मे ।

बहार ये मेरी मौत का
सामान हो गयी।
छोड़ गए सफ़र मे साथ की कश्ती
हवाले तूफ़ान हो गयी ।
साथ मे देने को कुछ न था ,
तो बाज़ार से ही मंगाया होता ।
चीनी भी नहीं थी पास तुम्हारे,
तो पानी मे नमक ही मिलाया होता ।