Wednesday, March 5, 2014

SHIQWA !!!

 हम  तुम्हे प्यार करते थे कबसे 
 शायद जब दुनिया नहीं थी तबसे 

 न  चाहा तुझसे कभी कुछ हमने 
 जबकि तू मुझे नहीं मिली थी शायद तबसे 

 कौन  आदम है कौन हौवा है न जाना हमने 
 फिर भी खा ही लिया सेब हमारे  ही वास्ते 

 ज़हरेज़ाम कहूँ या मौतों कि फेहरिस्त 
 तुम मौत हो या इससे बढ़कर नहीं मालूम हमें 

  इरादा न मेरा था न तुम्हारा था फिर मिले कैसे 
  एक अनजान से इशारे से बतौर  सिवा किसके 

  न हम समझे हैं न ही कुछ जानते हैं कोन ज़िम्मेवार 
  कोन खतावार था जब पैदा न हुआ था ज़माना हमसे 

  न गिला न शिक़वा आराम से  रहा 
  कब्र में सोने से पहले न जानते थे मिले थे कब हमसे 

  मैंने भी खुदा के लिए ही खुदा को चाहा 
  ' रतन ' पर मिला न मुझसे कभी वादा करके हमसे 

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