कोई रंग लगाता रहा
कोई धुलाता रहा
हाथों मे गुझिया और साथ में
मय_ऐ_निगाह पिलाता रहा
Friday, March 13, 2009
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" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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