Wednesday, August 12, 2026

शेर

देखिए अभी वक्त क्या- क्या इम्तहां लेता है,
मिल के बिछड़ने का भी अंदाज नया होता है/
             राजीव रत्नेश

शेर

कुछ इस तरह उसके अहसास से मैं तो गुजरा हूँ,
खुद गुम सा हो गया हूँ, या खुद ही एक सपना हूँ/

           राजीव रत्नेश
       """""""""""""""""""""""

शेर

कुछ इस तरह उसके अहसास से मैं तो गुजरा हूँ,
खुद गुम सा हो गया हूँ, या खुद ही एक सपना हूँ/

कभी की मुहब्बत थी उससे, तभी तो

मैंने तो उसे अपने कदमों से उठा के सीने से लगाया था,
सिर्फ इतना ही कह पाया था कि उसकी जगह तो मेरे
दिल में है/
और कहा उसने भी, मैं तो बस तुम्हारे कदमों की खाक
ही हूँ,
अपने माथे पर मुझे चंदन की तरह न लगाओ/
एक बार ही टूट चुकी हूँ, दुबारा बिखर जाऊँगी,
मुझे सिर्फ आगोश में ही रख लो, सर पे न बिठाओ//

मुक्तक

हम तुम्हारे ही तो हैं, कम से कम अदब से बातें करो,
अदब से न कर सको तो कम से कम शरम से बातें करो/
तोड़ा है तुमने जो अहदे- वफा कई-कई बार,
दिल की चोट न दिखाओ, शिकस्ता बदन की बातें करो/

              राजीव रत्नेश

Tuesday, August 11, 2026

मुक्तक

थामा तुझे तेरी लग्जिश पे बाहें फैला,
थिरकती तू महफिल में होकर निढ़ाल/
करा के लूट ले, अधरामृत का रसपान,
मैं तुझे बुलाऊँ बार- बार अपने पास//

            राजीव रत्नेश

Sunday, August 9, 2026

तेरा इंतजार भी न था

तेरा इंतजार भी न था
++++----------:

चालीस साल करीब पूरे होने को आए,
तुझसे बिछड़े हुए/
तुझको तेरे अपनों ने कहाँ खपाया,
मैं तो तेरे बिना जिन्दा लाश बन कर रहा/

तेरा अता-पता कुछ मुझे मालूम न था,
तेरे एक- एक सगे, तेरी सहेलियों से पूछा/
मेरी हालत देख सभी मुँह बिचका देते थे,
तू कहाँ है, पूछने पर ना में सिर हिला देते थे/

ढूँढ ढूंढ जब थक हार गया,
अचानक आकर मेरे गले से लगी/
दुबला बदन, दमे की मरीज जैसी,
जाने क्या- क्या रोग लगा बैठी/

काश! मुझसे पहले ही मिल जाती,
मेरे चालीस साल यूँ ही न गुजर गए होते/
तेरा इंतजार भी न था, बस प्यास हद से गुजर जाती,
जिन्दगी रहती न रहती, मुलाकात तुमसे न हो पाती//

             राजीव रत्नेश
         """"""""""""""""""

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!