Saturday, July 11, 2026

तुम सा एक रहनुमा ( गजल )

तुम सा एक रहनुमा  ( गजल )
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नजरों से गिरा हूँ, दिल में रहा चाहता हूँ/
हर हाल तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ/

प्यार सबसे करता हूँ, तगादा नहीं करता,
सब जानते हैं, मैं क्या चाहता हूँ/

प्यार अगर किसी खेल का ही नाम है,
जिंदगी में खेलना मैं ये जुआ चाहता हूँ/

लिख के मेरा नाम जमीं पर मिटाते तो हो,
अगर हर्फे- गलत हूँ, तो मिटा चाहता हूँ/

ये किस तरफ से आई अजान की सदा,
मैं उधर की तरफ बढ़ा चाहता हूँ/

अगर पहले ही रुक जाता, तो संगम न होता,
मैं तो दरिया हूँ बस बहा चाहता हूँ/

तहरीर लिखने की अदा रास न आई मुझे,
मैं तो बस जमाने के लिए आईना चाहता हूँ/

किसी को प्यार में गच्चा देना, मेरा काम नहीं,
मैं तो खुद जमाने के सितम सहा चाहता हूँ/

दुनिया के ऐशो-आराम, तुम्हें हों मुबारक,
मैं न सितारे, न चाँद, न ये जहां चाहता हूँ/

किसी की मुझे गरज नहीं ' रतन '
बस तुम सा एक रहनुमा चाहता हूँ//

           राजीव रत्नेश
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मेरे अँगने में तुम्हारा क्या काम है ( कविता )

मेरे अँगने में तुम्हारा क्या काम है  ( कविता )
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जबसे मेरे घर में हुआ पहली बार पदार्पण तुम्हारा,
मुझे याद आया ' मेरे अँगने में तुम्हारा क्या काम है '/

आँगन तो था नहीं, छत पे ले जा तुम्हें नचाया,
गली के मनचलों ने हूँटिंग कर दी, तुम्हें नीचे बुलाया/

जिसकी बीबी मोटी उसका भी बड़ा नाम है,
एक किक लगा दो, फुटबाल का क्या काम है/

जबसे तुम आईं, मुहल्ले में ' गोरिल्ला- युद्ध ' शुरू हुआ,
दो को पकड़ के ' शांति- भंग ' में उनको बंद कराया/

जिसकी बीबी पतली, उसका भी बड़ा नाम है,
खूँटी से लटका दो, हैंगर का क्या काम है/

तुमने दी थी मुझको एक छल्ला अपनी निशानी,
मैं क्या जानूँ, तुम छत पे खड़ी, गली में दिलबर जानी/

जिसकी बीबी लंबे केशों वाली, उसका भी बड़ा नाम है,
पकड़ कर हाथ-पाँव बाँध दो, रस्सी का क्या काम है /

मैं महबूब तेरा, तेरे नाम- रूप का दीवाना,
मैं खड़ा छत पे, बगल की छत से कोई कुदा/

जिसकी बीबी की आँखें झील, उसका भी बड़ा नाम है,
डुबकी लगा लो, जमुना का क्या काम है/

सुनी-अनसुनी बातों से ही दिल को सहारा हो गया,
तूफान आया न आया, नसीब मुझे किनारा हो गया/

जिसकी बीबी चाँद जैसी, उसका भी बड़ा नाम है,
अमावस की रात छत पे सुला दो, चाँदनी का क्या काम है/

               राजीव रत्नेश
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सइय्यां से भइय्या तक का सफर ( गजल )

सइय्याँ से भइय्या तक का सफर  ( कविता )
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दिल तोड़ने का तुमसे गिला नहीं है/
राखी मुझको भेजा, शिकवा यही है/

मेरी गुस्ताख निगाही पर ब्रेक लगाया,
या साल में दो बार मिलने का मन बनाया/

मुझे ये कैसा तुमने शिफा दिया,
खुल्लम खुल्ला मिलने की रजा दिया/

तुम्हारे पास दिल नहीं पर भेजा तो है,
राखी का लिफाफा मुझे भेजा तो है/

तुमको आना हो तो , जब चाहे आओ,
मैं ही क्यूँ मिलूँ, कुछ तो अक्ल लगाओ/

यूँ तो चोरी-चोरी भी मिल लेते थे,
एक दूसरे की आँखों में झांक लेते थे/

इन बातों की तुमने खुली मुनादी कर दी,
मेरी जेब से जबरन पैसा उगाही कर दी/

निकम्मे थे तो ही हम भले थे,
कमाने लगे हैं, ये बात तुम्हें पता थी/

तुम्हें अपना जान कर ही दोस्ती की थी,
तुमने सारी दोस्ती की ऐसी-तैसी कर दी/

अब तुम्हारी राह तकना भी छूट गया,
जिस राह आओगी, वो रास्ता भी दूर गया/

' रतन ' को सइय्याँ से भइय्या बना गई,
दूर जाके भी मुझे अपना बना गई//

             राजीव रत्नेश
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" जिसके लिए छत पर खड़े रहे,
वो राखी का लिफाफा पकड़ा गई/
रतन चला था सइयाँ बनने,
वो उम्र भर का भइया बना गई// "

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बस तुम्हारे घर की तरफ ( गजल )

बस तुम्हारे घर की तरफ  ( कविता )
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जान जोखिम में है, जबसे तुमसे इजहार किया/
रास्ता चलना हुआ मुश्किल, जो प्यार किया/

ये क्या हुआ, दुपट्टा गले का सर पे डाला,
एक नजर से देखा मुझे, दूसरी से आँख मारा/

इंतजार में तेरे किसी तरह सुब्ह से शाम किया,
तुम आओगी, ये जान कर अब्बू को तुम्हारे सलाम किया/

तुम्हारा अब्बू सब कुछ या तो पहले से जानता था,
या फिर मुझे किसी तरह वो भाँप गया/

दिन में सितारे तो कभी नजर न आए थे,
आज भरी दुपहरिया में चांद उगा, सितारा उगा/

किस तरह रूठ कर थोबड़ा अपना बिगाड़ लिया,
बीच सड़क तमाशा किया, सड़क जाम किया/

मैं जानता था, हम सी० सी० टी० वी० की जद में हैं,
इसीलिए चुप लगाया, खुद से न कोई हंगामा काटा/

तेरी तस्वीर को कलेजे से लगा सिर्फ आहें भरता हूँ,
किसी तरह आँखों ही आँखों में रात गुजारा/

एक लिफाफा भेज दिया तुमने मेरे नाम,
कौन है? कैसी है? कहाँ की है, मेरे वालिदैन ने पूछा/

हैरान है ' रतन ', अब किसको क्या बताए,
गुपचुप तुम्हारे घर की तरफ किया इशारा/

             राजीव रत्नेश
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सी०सी ० टी० वी० के डर से सड़क पर तो
हंगामा बचा लिया,
पर लिफाफा भेज कर महबूब ने वालिदैन के
सामने फँसा दिया /"

आशिकी में  आखिर डर कैसा, गर इजाजत मिली होती,
दामन तो थामा ही था, हाथ भी उसका थाम लेता/
थोबड़ा बिगाड़ कर आने की बजाय, जो मुस्कराई होती,
उसकी जुल्फों के साये में, सुब्ह से शाम कर लेता/

                 राजीव रत्नेश
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शेर ( तेरी गलियों में )

तेरी गलियों में फिरते हैं आवारों की तरह
मिल जाओ तुम हमसे गुब्बारों की तरह /

       राजीव रत्नेश

चाल चलने में औरतों का ( रुबाई )

चाल चलने में औरतों का जवाब नहीं होता,
यह जमाना कभी किसी का मोहताज नहीं होता/
एक प्यादा भी चलता सीधा पर मारता टेढ़ा है,
अदा- ओ- नाज उनका शतरंज की बिसात नहीं होता/

तुझे पेश सारा जमाना कर बैठे ( गजल )

तुझे पेश सारा जमाना कर बैठे  ( गजल )
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तोड़ना था रिश्ता तुमसे, पर मिलने का वादा कर बैठे/
तुम्हारी तरबीयत ऐसी कि पेश तुम्हें दो- जहाँ कर बैठे/

बाप तुम्हारा मेरी जान लेने पे आमादा, उससे दूरी बना बैठे,
भँवर में थी कश्ती, तुम्हीं से मुहब्बत- ए- दिल में किनारा मिला बैठे/

मुश्किल में डाल गए आज तो मुझे तो मुश्किल में,
ध्यान तुम्हारा था, तुम्हीं को इशारा कर बैठे/

आँखों में ही तुम रहे, दिल में आ कर नहीं देखा,
मैं बुझता शमां था, तुम मुझे बुझाने का इरादा कर बैठे/

महफिल की तेरे जलती- बुझती रौशनियों के तले,
हम नाक की सीध में चल आबाद तेरा मैरवाना कर बैठे/

पिलाना चाहा जाम तुमने हर रिन्द को, जो जैसा हो,
प्यासे कब के थे, तुम्हीं से तगादा कर बैठे/

परदेश से लौट कर तेरी गोद में सर रखूँगा,
अहसास ये पुराना था, हसरते- दिल तुमपे आजमा बैठे/

यकीनन तेरी तपिश- ए- मुहब्बत, बाहिरे- बरदाश्त थी,
तुरबत पे मेरी आके पिलाओगे, तुम ये वादा कर बैठे/

हद से बढ़ती है मुहब्बत तो पहचान से भी जाती है,
सरे- शाम तुमसे मिलने की आस में, तुम्हारा आसरा कर बैठे/

मेरी मुहब्बत मिलन के लिए तुझे हमेशा न्यौता देती है,
तेरे लिए ही, तुझे सुपुर्द ये जमीनो- आस्मां कर बैठे/

खुदा की नेमत है तेरा हुस्नो- शबाब, रंगत- ए- गुलाब,
इसके एवज में ' रतन ' तुझे पेश सारा जमाना कर बैठे//

                    राजीव रत्नेश
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मिलने का वादा वो कर तो बैठे,
मैंने पूछा कहाँ? तो बोले ख्वाबों में/
फिर-फिर पूछा, ' गुजरगाहों में क्यों नहीं '?
हँस के बोले, ' नजर न लगे " नवाबों " की//

                  राजीव रत्नेश
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चाल चलने में औरतों का जवाब नहीं होता,
यह जमाना कभी किसी का मोहताज नहीं होता/
एक प्यादा भी चलता सीधा पर मारता तिरछा है,
अदा- ओ- नाज उनका शतरंज की बिसात नहीं होता/

                      राजीव रत्नेश
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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!