Friday, May 1, 2026

आज की देख कर मेहरबानियाँ ( गजल)

आज की देख कर आपकी मेहरबानियाँ  ( कविता)
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आज की देख कर आपकी मेहरबानियाँ,
भूल गए हम सारी आपकी सितमरानियाँ/
नजरों के जाम से भी सुरूर आ गया हमें,
ले गई हैं नई प्यार की हमारी कहानियाँ/

मेरी नसों में गंग- ओ जमन की लहर है,
साँसों में तेरी जुल्फों की महक है/
हर ओर रंगीनी ही रंगीनी-------
चमन- ए- दिल में चिड़ियों की चहक है/

समझ आने लगी हैं मुझको तेरी अंगड़ाइयाँ,
माने लगी हैं अब दिल को तेरी शोखियाँ/
हर कली पे भी आज शबाब है,
गोया हर तरफ बिखर गई हैं मस्तियाँ/

परचम की तरह लहराता है आँचल,
रुख पे मंडराते वो जुल्फों के बादल/
मुझे मदहोश करता है रह- रह कर,
तेरी मदभरी इन आँखों का काजल/

आ भी जा अब तो तू मेरे ही शहर में,
कट नहीं रहीं खामोश तन्हाइयाँ/
मेरी मासूम मुहब्बत की कसम तुझे,
शामियाना- ए- दिल में बजा दे शहनाइयाँ/

मैंने सुनी हैं तेरे दिल की धड़कनें,
मैंने देखी हैं तेरे जिस्म की तड़पनें/
हमको अब नखरे न दिखाओ जानम,
मैंने सुनी हैं तन्हाई की तेरी सिसकनें/

हर गलीचा अपने नसीब को सराह रहा,
दे दी हैं जो तूने अपने पाँव की निशानियाँ/
वो तेरा झिलमिलाता आँचल और ये रात,
सताने लगी हैं अब' रतन' को तेरी शैतानियाँ/

              राजीव रत्नेश
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तुझे मुबारक हो नया साल ( कविता)

तुझे मुबारक हो नया साल
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तया साल तुझे याद रहे, तुझे भेजा है मुबारकबाद,
सुबह से इंतजार में बैठा हूँ, लेकर खिला गुलाब/

झीनी-झीनी बदली में, चंद्रिका खिली आस्मान में,
आज देखो निकला है गगन में, रश्मि- रंजित चाँद/

सुबह का तारा है दीया, जिसने आधी रात पुकारा,
देखो फिर आई है, आज मुझे तुम्हारी याद/

बिस्तर पे बैठ के यूँ ही मुस्कराती हो, जैसे बादल में चाँद,
बड़ी शर्मीली हो लगता, जैसे हो तुम्हारी सुहागरात/

दो हँसो का जोड़ा बिछड़ा, एक दिल्ली, दूसरा मुंबई में,
तुम चाहोगी तो हो जाएगी, हमारी तुम्हारी मुलाकात/

सूरते-हाल कुछ समझ में आता नहीं, क्या तुमसे बताएँ,
फिर-फिर आती हो याद, याद दिलाए तुम्हारी चाँद/

हम तुम्हारी याद में, तुम्हारे इंतजार में हो गए बर्बाद,
क्या याद तुम्हें कभी आता हूँ, भेजा है खत में गुलाब/

करीब था जो लमहा, और भी दूर होता गया, तुमसे क्या उम्मीद?
तुमने शेर सुनाया, हमने दिल से कहा इरशाद/

बराए मेहरबानी एक बार जो मुकाबिले- महफिल होते,
हमें बार- बार याद आता अपना मुकदर अपना चाँद/

तेरी नजरों का निशाना, कल तलक तो कोई और था,
बिना अपनी चँदनियाँ के किस कदर आज भी उदास है चाँद/

बतौरेखास आज तू आकर बज्म में देख ज़रा,
कितना कुम्हला गया है, आज तेरी बगिया का गुलाब/

हम न तुझसे नजर मिलायेंगे, न ही तेरे पास आएँगे,
तुमने हमको किया है बरबाद, किस सूरत किया है नाशाद/

दूर जाकर आज तक हमसे, किस कदर परेशान है चाँद,
हमारे लिए राह में, बिछे थे माहो- आफताब/

पास बुलाओगे, तो भी हम न बुलाएँगे तुमको अपने पास,
दूर जाकर देखो, हम भी न करेंगे दिल से इजहार/

किसी तरह अपने पास बुलायेंगे, उसे ही करेंगे याद,
किस तरह पाऊँ उसे, मुझे आज तक पसंद है वो गुलाब/

                राजीव रत्नेश
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मेहरबानियों से है ये हाल ( रुबाई)

नींद आँखों से कोसों दूर है
हाथ भर के फासले पर हैं वो
उनकी मेहरबानियों से है ये हाल
बिन बात तुनक जाते हैं वो

मर्ज की दवा ही यही है ( रुबाई)

एक नगमा गुनगुनाना चाहता हूँ
बातों से उन्हें बहलाना चाहता हूँ
मेरे मर्ज की बस दवा ही यही है
उनकी कश्ती में पार दरिया जाना चाहता हूँ

मेरी गजल को अपना दर्द समझा ( रुबाई)

कारवां बचा लाए सहरा में हम रहजनों से
नाकामियों का गुबार फैलाया रहबरों ने
बड़ी मुश्किलों में जान आ फँसी थी मेरी
मेरी गजल को अपना दर्द समझा दिलजलों ने

          राजीव रत्नेश
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जिन्दगी नयी दे दो ( रुबाई)

अपनी जुल्क की भीनी खुशबुओं में चंद पल रह लेने दो
मदमाती मस्त बयार के मौसम में मुझे अपने दिल में रह लेने दो
इक जाम की ललक है तेरे प्यासे होठों से, जिन्दगी नयी दे दो
दिल दरिया है तेरा, सीने से एक और चश्मा फूट निकलने दो //

                राजीव रत्नेश
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मुहब्बत का लहजा ( शेर)

मौन तो मौन है उसकी
फिर शिकायत कैसी,
यही तो वह लहजा है,
मुहब्बत में' हाँ' की/

     राजीव रत्नेश
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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!