रतन कैसे भुला दे तुझे
--- राजीव रत्नेश
तेरे इंतजार में आँख मेरी नम है,
आ जा कि अब जिंदगी कम है/
तेरे बिना साँस लेना भी क्या साँस लेना,
हर साँस में तेरी कमी का गम है/
जिस राह पे तेरे कदमों के निशाँ थे,
वही राह अब तक मेरी हमदम है/
तू सामने हो तो खानोश हो जाएँ लब,
तेरी आँखों में ही मेरा हर मौसम है/
रात भर कहकशाँ से पूछता रहा तेरा पता,
मेरी तनहाई के चंदा, तुझे किस बात का गम है/
तू लौट आए तो फिर से बहारें आएँ,
तेरे बिन तो ये दिल भी कहाँ हरदम है/
इतना न आजमा मेरी मोहब्बत को,
तेरे नाम से ही अभी दम में दम है/
हमने तो सब कुछ तेरे नाम कर दिया,
अब तेरी सोच में ही मेरा ये जनम है/
तेरी तस्वीर से करता हूँ अक्सर गुफ्तगू,
मेरी खामोशियों में आज भी तेरा भरम है/
तू नहीं है तो हर खुशी लगती है अधूरी,
तेरे आने का यकीन ही मेरा मरहम है/
जिस तरफ देखता हूँ तेरा ही चेहरा दिखता है,
ये मोहब्बत है या आँखों का कोई वहम है/
' रतन ' कैसे भुला दे तुझे इस उम्र के बाद,
तेरी यादों से ही आबाद मेरा ये उपवन है//
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