दाग तो दिल पर है ( गजल )
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बच के जमाने की निगाहे- बद से आओ तो समझूँ/
आकर मेरे शरर- ए- दिल को बुझाओ तो समझूँ/
बेइंतहा दिल को तेरे प्यार की प्यास लगी है,
आकर लबों की रूह- अफजा पिलाओ तो समझूँ/
मेरे अफसाने की तू हसीं किरदार है साकी!
जरा अदा- ए- खास अपनी दिखाओ तो समझूँ/
तू हुस्ने- बेमिसाल है, पसीना भी तेरा गुलाब है,
आकर महफिल में पसीना अपना बताओ तो समझूँ/
बातें तेरी सुघढ़- सलोनी, अंदाज तेरा शायराना,
आज फिर से आशिके- दिलदार को पिलाओ तो समझूँ/
मय बहुत पुरानी हो तो पिलाना, न उसमें पानी मिलाना,
पैग पर पैग पिला कर रिन्द को बेहोश बनाओ तो समझूँ/
पास में छदाम नहीं, कुछ सोच कर आया तेरे मयखाने में,
आज तो तुम पहली बार उधार लगाओ तो समझूँ/
आ ही गए नयखाने में आज जब हजरते- वाइज,
मेरे साथ उनको भी दो घूँट पिलाओ तो समझूँ/
रंजो- गम की धूल से गुजर कर तेरे पास आया हूँ,
अंगूर के पानी से मुझे नहलाओ तो समझूँ /
सोचता हूँ कि जामे- नजर हक की छक के पिऊँ,
सुरूर मुझ पर से इस जनम का उतारो तो समझूँ/
गमे- इश्क अगर अश्कों के साथ बह निकलता है,
मेरे साथ ही गम अपना भी हल्का करो तो समझूँ/
जामे- नजर से ही, कुछ यूँ मदहोश हो गया हूँ,
होश में लाने को, जामे- लब लबरेज पिलाओ तो समझूँ/
मुफ्त की पिला-पिला के, दिल हिरासत में ले रखा है,
तुम मेरे पर से बंदिश अपनी हटाओ तो समझूँ /
दिल धड़कता है मेरा, तेरी महफिल के नाम से,
दिल मेरा अपने नर्मो- नाजुक हाथों से सहलाओ तो समझूँ/
दुनिया की नजर लगने का डर था, चेहरे को तो छुपा लेता,
दाग तो दिल पर है ' रतन ', तुम दाग छुड़ाओ तो समझूँ /
राजीव रत्नेश
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मेरे साकी ऐसा माल दे, उम्र भर की थकान जो उतार दे/
एक बार ऐसी पिला कि उतरे न ह श्र तक, ऐसा लबरेज जाम दे//
राजीव रत्नेश
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चेहरे का नकाब तो जमाने को धोखा दे देगा,
दिल का दाग तो हर जन्म चंदा का पता दे देगा//
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