Saturday, May 9, 2026

कोई रास्ता न रहा मिलन का ( कविता)

चाँद-सितारे सफर में,
सूरज पृथ्वी के चक्कर में,
दुनिया की हर चीज सफर में,
हम- तुम बेसफर कैसे हो सकते हैं/

सदियों से निकला हूँ सफर में,
तूने पैगाम भी भेजा सफर में,
तू गोल- गौहर थी, गुलमोहर थी,
तुझे अपना कभी सोचा ही नहीं/

सालों-साल हम साथ- साथ रहे,
इश्क का भूत तेरे सर चढ़ बोला,
मौका सही जान तेरे बाप ने,
तुझे लत्ती लगा दी/

मैं पाँच- आठ का, तू पाँच- छै की,
निभ सकता था साथ तेरा-मेरा भी,
तूने बाप के सामने हामी न भरी,
अपने प्यार की दुहाई न दी/

तू एक अंजान सफर पे चली गई,
मजबूरी में या मनमर्जी के तहत,
तुम्हें निपटाया कर्मखर्ची में,
बाप की मर्जी से गई/

तुमने किससे नहीं बेवफाई की,
गैर ने ही तेरी शादी में तेरी शामत बुलाई,
तेरा बाप भी था अपने गिरोह का सरगना,
एक- एक पहलवान की करा दी पिटाई/

सबके अपने- अपने संस्कार होते हैं,
मेरे संस्कार का कोई मोल था नहीं,
अपनी धुरी छोड़ किस जानिब गई,
मेरे मोहपाश ते निकल और के साथ बँधी/

क्या दुख तूने सहे, क्या गम मैंने झेले,
किसी ने साथ न पूछा, पड़ी अकेले,
शहर तेरे मेरे अदल-बदल गए,
तू अपने प्यार को देखे या औरों की तमीज सही/

छूट गया तेरा सपनों के सफर में आना-जाना,
भारी पड़ा तुझे किसी से दिल लगाना,
पहले भी पराई थी, अब भी पराई हुई,
तुम लगातार सफर में बनी रही/

कोई रास्ता न रहा, तेरे मिलन का,
क्यूँकि तू मुझसे भी आगे निकल गई//

          """""""""""""""""

नैनीताल की बिसात ही क्या है ( शेर)

नैनीताल के पहाड़ की उसके आगे बिसात ही क्या है/
उसके होने से, दिल्ली के प्लेटफार्म की खूबसुरती ही बयां है//

                 राजीव रत्नेश
             """"""""""""""""""""""""

दिल्ली के प्लेटफार्म पर जब ( शेर)

पहाड़ो की ऊँचाई और वादियों की धुन फीकी पड़ गई/
दिल्ली के प्लेटफार्म पर जब उनकी पायल छनक गई//

             -------------------

समंदर बड़ा सही, पर मछली ही उसकी जान है/
' रतन' के लिए तो बस उसका महबूब ही जहान है//

              ---------------------

कलम आपकी, दर्द आपका और
           सोज- ए- बयां भी आपका/
मैं तो बस आईना हूँ, जिसमें झलकता
            है सारा जहां आपका//

          राजीव रत्नेश
         """""""""""""""""""

चाय गजब की ( शेर)

चाय तो गजब की थी,
जो गजल लिखने का सामान कर गई/
हम कुछ समझ न सके,
और बात बढ़ कर आप तक आ गई

               ------------

सवाल चाय का था या बेदारी का/
जवाब तो सिर्फ धड़कनों ने दिया था/

           राजीव रत्नेश
      """"""""""""""""""""""”""

गौर से देखा तो ( शेर)

गलतफहमी थी कि प्याली में सिर्फ चाय थी/
गौर से देखा तो, उसमें पूरी तेरी रानाई थी//

कशमकश ( गजल)

कशमकश  ( गजल)
-----------------

तुम मेरी जिन्दगी में बहार बन के आए/
इंतजार में तेरे हमने पलक- पाँवड़े बिछाए/

अभी तो इब्दिता- ए- इश्क है, और तू छैल- छबीली,
तेरे लिए फूल हमने भी दिल ही दिल में खिलाए/

तू सबसे अलग होगी, ख्यालों के भी परे होगी,
दिल को तेरा इस्तकबाल करने को समझाए/

न तुम दूर कहीं जाना, न गैर अपने को समझना,
तेरे लिए सितारों से जिया माँगी, राह में तेरे सितारे बिछाए/

तू निकल चुकी है अब, नुक्कड़ तक आ पहुँची है,
आ ही गई समझो, दिल को अहसास ये दिलाए/

जबरन खींच के तुझे, लेना पड़ा है इक-इक चुंबन भी,
मर्जी से अपनी तू कभी, पास भी न फटक के आए/

आती है बार- बार मेरे कमरे में किसी-किसी बहाने,
चाय पूछती है और पूछती है,' रातों को क्या सो पाए?'

कैसे कहूँ उससे,' आँखों की नींद, दिल का सुकूं तूने छीना'
बात उससे क्या बढ़ाना, कह दूँ,' तेरे बिना सो नहीं पाए'/

हम पूछ कर कुछ उससे, काहे को बात बढ़ाएँ,
खुद ही मीठी-मीठी चितवन से वो दर्दे- दिल बढ़ाए/

नजर उसकी उतार के, फितरे का पैसा किसे दें?
कोई पास' रतन' के, कुछ माँगने तो आए//

              राजीव रत्नेश
          ----------------

हम तुझे लेकर भरी महफिल से चले जाएँगे,
हर सितम जमाने के, सहने को तैय्यार हैं/
आ जाना तुम तो बस प्यार से राहों में,
थामने को तेरा हाथ, हर हाल हम बेकरार हैं//

          --------------

आलम महफिल का आशिकाना होगा/
सुरूरे- जाम में तेरा हर दीवाना होगा/
तकदीर से माँगा है तुझे हमने,
सिवा कुदरत के कौन हमें तेरा नजराना देगा//

                राजीव रत्नेश
        """""""""""""""""""

कशमकश

इधर भी है सिवा कुछ,
        उधर की मजबूरी/
न उनसे बताए बने,
         न हमसे छुपाए बने//

        राजीव रत्नेश
     -----------&&-------

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!