उतर जाएगा ये नशा भी तेरा सबेरा होने तक/
बस आस में दिल आज भी मेरा धड़क रहा है,
ये खुशी की रात भी ढल जाएगी सबेरा होने तक/
तेरे आने की महफिल में घड़ियाँ बस अब थोड़ी हैं,
हर मुश्किल आसान हो जाएगी सबेरा होने तक/
नया सबेरा आएगा, खुशियाँ तमाम लेकर आएगा,
हर तूफान का निशान मिट जाएगा सबेरा होने तक/
"""""""""""""""""
मुहब्बत की तस्करी करते हमसे न बना,
आ गई थी तबीयत उसपे, इंकार करते हमसे न बना/ख़ुशी ज्यादा लेकिन गम भी थोड़ा दिल में है,
उतर जाएगा ये नशा भी तेरा सबेरा होने तक/
बस आस में दिल आज भी मेरा धड़क रहा है,
ये खुशी की रात भी ढल जाएगी सबेरा होने तक/
तेरे आने की महफिल में घड़ियाँ बस अब थोड़ी हैं,
हर मुश्किल आसान हो जाएगी सबेरा होने तक/
नया सबेरा आएगा, खुशियाँ तमाम लेकर आएगा,
हर तूफान का निशान मिट जाएगा सबेरा होने तक/
"""""""""""""""""
मुहब्बत की तस्करी करते हमसे न बना,
आ गई थी तबीयत उसपे, इंकार करते हमसे न बना/
जज्ब हो गए दिल में ही दिल के अरमाँ,
आग लगी थी दिल में मेरे, उससे बुझाए न बना/
"""""""""""""""""
दिल में बाकी अभी अरमान सारे के सारे यूँ ही,
हम दिलाते रहेंगे याद सदा पुराने वादे यूँ ही/
""""""""""""""""
अजनबी होकर भी वो पुकारते ही रह गए,
हम भी बेताब थे, मगर जाते जाते ही रह गए/
""""""""""""""""
इंतरवाब कर ले मुझसे, छेड़ मुहब्बत भरा नगमा,
पेश कर जामे- लब इक बार सुबह शाम को दुबारा/
""""""""""""""""""
दिल में जगह दी अपना समझा तेरा बारंबार शुक्रिया,
आके मेरी पलकों पे बैठ जा मेरे साकी तेरा शुक्रिया/
अजनबी शहर में अनजान सभी से, तू बन जा हमनफस,
साँस से साँस मिल जाए, आजा बाहों में तेरा शुक्रिया/
"""""""""""""''''''''
मये- निगाह ही पिलाती रहेगी या कुछ आगे भी बढ़ेगी,
थाम के दामन मेरा कोई मुझसे सवाल भी करेगी/
जमाना बने मुद्दई, इसके पहले मेरी हमनफस बन जा,
फिर न मिलेगा मौका, रुबरु मेरे अपनी सूरत कर जा/
""""""""""""""""""""""
तूने नजर मिलाई इस तरह, दिल तुझ पर फिदा हो गया,
आ गए जो आगोश में, मुहब्बत का हक पूरा अदा हो गया/
""""""""""""""""""""
तुम प्यार से खिलाओ तो क्या न खा लूँ
दवा ही तो है, तुम्हारे हाथों जहर भी खा लूँ/
""""""""""""""""""
तीखे हैं नैन-नक्श उसके, बसे दिल में वो मेरे,
दिल से करता याद उसे, कब आएँगे पास वो मेरे/
"""""""""""""""""
मैं मदहोश हुआ तो कैसे,
देखा तो तेरे लब थे मेरे लबों पर,
होश आया तो पाया तू
झुकी हुई थी मेरी पलकों पर/
हर साल सबको जन्मदिन की मुबारकबाद भेजता रहा,
पर आज तक किसी ने न भेजा, लाल कागज में लिपटा पीला गुलाब/
डाक- विभाग अभी बंद न हुआ, आजकल कोरियर का रिवाज,
कीमत न चुकाई गई मुझ गरीब से, नीलाम हो गया नाजनी का गुलाब/
इंतजार में खाक कर दी अपनी दुनिया, कोई फरिश्ता न बताने आया,
समंदर से नायाब रत्न निकले पर विश्वमोहिनी को हर ले गया छलिया/
गुलाब का आदान-प्रदान होता खूब वैलेन्टाइन-डे पर,
पर एक फूल भी भेजते न बना किसी से मुझे जन्मदिवस पर/
न चाहिए कलम, न चाहिए तलवार, न अब कोई ख़ुशी ज्यादा लेकिन गम भी थोड़ा दिल में है,
उतर जाएगा ये नशा भी तेरा सबेरा होने तक/
बस आस में दिल आज भी मेरा धड़क रहा है,
ये खुशी की रात भी ढल जाएगी सबेरा होने तक/
तेरे आने की महफिल में घड़ियाँ बस अब थोड़ी हैं,
हर मुश्किल आसान हो जाएगी सबेरा होने तक/
नया सबेरा आएगा, खुशियाँ तमाम लेकर आएगा,
हर तूफान का निशान मिट जाएगा सबेरा होने तक/
"""""""""""""""""
मुहब्बत की तस्करी करते हमसे न बना,
आ गई थी तबीयत उसपे, इंकार करते हमसे न बना/
जज्ब हो गए दिल में ही दिल के अरमाँ,
आग लगी थी दिल में मेरे, उससे बुझाए न बना/
"""""""""""""""""
दिल में बाकी अभी अरमान सारे के सारे यूँ ही,
हम दिलाते रहेंगे याद सदा पुराने वादे यूँ ही/
""""""""""""""""
अजनबी होकर भी वो पुकारते ही रह गए,
हम भी बेताब थे, मगर जाते जाते ही रह गए/
""""""""""""""""
इंतरवाब कर ले मुझसे, छेड़ मुहब्बत भरा नगमा,
पेश कर जामे- लब इक बार सुबह शाम को दुबारा/
""""""""""""""""""
दिल में जगह दी अपना समझा तेरा बारंबार शुक्रिया,
आके मेरी पलकों पे बैठ जा मेरे साकी तेरा शुक्रिया/
अजनबी शहर में अनजान सभी से, तू बन जा हमनफस,
साँस से साँस मिल जाए, आजा बाहों में तेरा शुक्रिया/
"""""""""""""''''''''
मये- निगाह ही पिलाती रहेगी या कुछ आगे भी बढ़ेगी,
थाम के दामन मेरा कोई मुझसे सवाल भी करेगी/
जमाना बने मुद्दई, इसके पहले मेरी हमनफस बन जा,
फिर न मिलेगा मौका, रुबरु मेरे अपनी सूरत कर जा/
""""""""""""""""""""""
तूने नजर मिलाई इस तरह, दिल तुझ पर फिदा हो गया,
आ गए जो आगोश में, मुहब्बत का हक पूरा अदा हो गया/
""""""""""""""""""""
तुम प्यार से खिलाओ तो क्या न खा लूँ
दवा ही तो है, तुम्हारे हाथों जहर भी खा लूँ/
""""""""""""""""""
तीखे हैं नैन-नक्श उसके, बसे दिल में वो मेरे,
दिल से करता याद उसे, कब आएँगे पास वो मेरे/
"""""""""""""""""
मैं मदहोश हुआ तो कैसे,
देखा तो तेरे लब थे मेरे लबों पर,
होश आया तो पाया तू
झुकी हुई थी मेरी पलकों पर/
हर साल सबको जन्मदिन की मुबारकबाद भेजता रहा,
पर आज तक किसी ने न भेजा, लाल कागज में लिपटा पीला गुलाब/
डाक- विभाग अभी बंद न हुआ, आजकल कोरियर का रिवाज,
कीमत न चुकाई गई मुझ गरीब से, नीलाम हो गया नाजनी का गुलाब/
इंतजार में खाक कर दी अपनी दुनिया, कोई फरिश्ता न बताने आया,
समंदर से नायाब रत्न निकले पर विश्वमोहिनी को हर ले गया छलिया/
गुलाब का आदान-प्रदान होता खूब वैलेन्टाइन-डे पर,
पर एक फूल भी भेजते न बना किसी से मुझे जन्मदिवस पर/
न चाहिए कलम, न चाहिए तलवार, न अब कोई बहार ही,
मेरे दिल में तो बसा बस सजनी तेरा वैलेन्टाइन-डे का व्यापार/
तुझे इतर- गुलाब कहूँ या गुलदस्ता, भीनी खुशबू से मुअत्तर हो बदन,
एक बार पेशे- नजर जो हो जाए गुलाबों भरा गुलदस्ता/
अब न पहले सी बहार रही, वो रौनक न रही किसी त्यौहार में,
हर बरस की तरह अबकी बरस भी इंतजार था मुझे कासिद का/
शादियाँ हो जाती है, विदाइयाँ तक हो जाया करती हैं,
निमंत्रण-पत्र भी मिल जाते हैं, पर चिठ्ठियाँ नहीं आतीं/
अब तो बस मोबाइल से ही फूल ही फूल झड़ा करते हैं,
चमेली, नर्गिस और जूही की खुशबू बिना बात भी आ जाती है/
इसके पहले कोई मेरे मोबाइल को नजर लगाए,
' रतन ' उन्हें एडवान्स में दुआ- ए- सदाबहार देते हैं//
राजीव रत्नेश
""""""""""""""""""'''"""'""" ही,मेरे दिल में तो बसा बस सजनी तेरा वैलेन्टाइन-डे का व्यापार/
तुझे इतर- गुलाब कहूँ या गुलदस्ता, भीनी खुशबू से मुअत्तर हो बदन,
एक बार पेशे- नजर जो हो जाए गुलाबों भरा गुलदस्ता/
अब न पहले सी बहार रही, वो रौनक न रही किसी त्यौहार में,
हर बरस की तरह अबकी बरस भी इंतजार था मुझे कासिद का/
शादियाँ हो जाती है, विदाइयाँ तक हो जाया में . हैं,
निमंत्रण-पत्र भी मिल जाते हैं, पर चिठ्ठियाँ नहीं आतीं/
अब तो बस मोबाइल से ही फूल ही फूल झड़ा करते हैं,
चमेली, नर्गिस और जूही की खुशबू बिना बात भी आ जाती है/
इसके पहले कोई मेरे मोबाइल को नजर लगाए,
' रतन ' उन्हें एडवान्स में दुआ- ए- सदाबहार देते हैं//
राजीव रत्नेश
""""""""""""""""""'''"""'"""
जज्ब हो गए दिल में ही दिल के अरमाँ,
आग लगी थी दिल में मेरे, उससे बुझाए न बना/
"""""""""""""""""
दिल में बाकी अभी अरमान सारे के सारे यूँ ही,
हम दिलाते रहेंगे याद सदा पुराने वादे यूँ ही/
""""""""""""""""
अजनबी होकर भी वो पुकारते ही रह गए,
हम भी बेताब थे, मगर जाते जाते ही रह गए/
""""""""""""""""
इंतरवाब कर ले मुझसे, छेड़ मुहब्बत भरा नगमा,
पेश कर जामे- लब इक बार सुबह शाम को दुबारा/
""""""""""""""""""
दिल में जगह दी अपना समझा तेरा बारंबार शुक्रिया,
आके मेरी पलकों पे बैठ जा मेरे साकी तेरा शुक्रिया/
अजनबी शहर में अनजान सभी से, तू बन जा हमनफस,
साँस से साँस मिल जाए, आजा बाहों में तेरा शुक्रिया/
"""""""""""""''''''''
मये- निगाह ही पिलाती रहेगी या कुछ आगे भी बढ़ेगी,
थाम के दामन मेरा कोई मुझसे सवाल भी करेगी/
जमाना बने मुद्दई, इसके पहले मेरी हमनफस बन जा,
फिर न मिलेगा मौका, रुबरु मेरे अपनी सूरत कर जा/
""""""""""""""""""""""
तूने नजर मिलाई इस तरह, दिल तुझ पर फिदा हो गया,
आ गए जो आगोश में, मुहब्बत का हक पूरा अदा हो गया/
""""""""""""""""""""
तुम प्यार से खिलाओ तो क्या न खा लूँ
दवा ही तो है, तुम्हारे हाथों जहर भी खा लूँ/
""""""""""""""""""
तीखे हैं नैन-नक्श उसके, बसे दिल में वो मेरे,
दिल से करता याद उसे, कब आएँगे पास वो मेरे/
"""""""""""""""""
मैं मदहोश हुआ तो कैसे,
देखा तो तेरे लब थे मेरे लबों पर,
होश आया तो पाया तू
झुकी हुई थी मेरी पलकों पर/
हर साल सबको जन्मदिन की मुबारकबाद भेजता रहा,
पर आज तक किसी ने न भेजा, लाल कागज में लिपटा पीला गुलाब/
डाक- विभाग अभी बंद न हुआ, आजकल कोरियर का रिवाज,
कीमत न चुकाई गई मुझ गरीब से, नीलाम हो गया नाजनी का गुलाब/
इंतजार में खाक कर दी अपनी दुनिया, कोई फरिश्ता न बताने आया,
समंदर से नायाब रत्न निकले पर विश्वमोहिनी को हर ले गया छलिया/
गुलाब का आदान-प्रदान होता खूब वैलेन्टाइन-डे पर,
पर एक फूल भी भेजते न बना किसी से मुझे जन्मदिवस पर/
न चाहिए कलम, न चाहिए तलवार, न अब कोई ख़ुशी ज्यादा लेकिन गम भी थोड़ा दिल में है,
उतर जाएगा ये नशा भी तेरा सबेरा होने तक/
बस आस में दिल आज भी मेरा धड़क रहा है,
ये खुशी की रात भी ढल जाएगी सबेरा होने तक/
तेरे आने की महफिल में घड़ियाँ बस अब थोड़ी हैं,
हर मुश्किल आसान हो जाएगी सबेरा होने तक/
नया सबेरा आएगा, खुशियाँ तमाम लेकर आएगा,
हर तूफान का निशान मिट जाएगा सबेरा होने तक/
"""""""""""""""""
मुहब्बत की तस्करी करते हमसे न बना,
आ गई थी तबीयत उसपे, इंकार करते हमसे न बना/
जज्ब हो गए दिल में ही दिल के अरमाँ,
आग लगी थी दिल में मेरे, उससे बुझाए न बना/
"""""""""""""""""
दिल में बाकी अभी अरमान सारे के सारे यूँ ही,
हम दिलाते रहेंगे याद सदा पुराने वादे यूँ ही/
""""""""""""""""
अजनबी होकर भी वो पुकारते ही रह गए,
हम भी बेताब थे, मगर जाते जाते ही रह गए/
""""""""""""""""
इंतरवाब कर ले मुझसे, छेड़ मुहब्बत भरा नगमा,
पेश कर जामे- लब इक बार सुबह शाम को दुबारा/
""""""""""""""""""
दिल में जगह दी अपना समझा तेरा बारंबार शुक्रिया,
आके मेरी पलकों पे बैठ जा मेरे साकी तेरा शुक्रिया/
अजनबी शहर में अनजान सभी से, तू बन जा हमनफस,
साँस से साँस मिल जाए, आजा बाहों में तेरा शुक्रिया/
"""""""""""""''''''''
मये- निगाह ही पिलाती रहेगी या कुछ आगे भी बढ़ेगी,
थाम के दामन मेरा कोई मुझसे सवाल भी करेगी/
जमाना बने मुद्दई, इसके पहले मेरी हमनफस बन जा,
फिर न मिलेगा मौका, रुबरु मेरे अपनी सूरत कर जा/
""""""""""""""""""""""
तूने नजर मिलाई इस तरह, दिल तुझ पर फिदा हो गया,
आ गए जो आगोश में, मुहब्बत का हक पूरा अदा हो गया/
""""""""""""""""""""
तुम प्यार से खिलाओ तो क्या न खा लूँ
दवा ही तो है, तुम्हारे हाथों जहर भी खा लूँ/
""""""""""""""""""
तीखे हैं नैन-नक्श उसके, बसे दिल में वो मेरे,
दिल से करता याद उसे, कब आएँगे पास वो मेरे/
"""""""""""""""""
मैं मदहोश हुआ तो कैसे,
देखा तो तेरे लब थे मेरे लबों पर,
होश आया तो पाया तू
झुकी हुई थी मेरी पलकों पर/
हर साल सबको जन्मदिन की मुबारकबाद भेजता रहा,
पर आज तक किसी ने न भेजा, लाल कागज में लिपटा पीला गुलाब/
डाक- विभाग अभी बंद न हुआ, आजकल कोरियर का रिवाज,
कीमत न चुकाई गई मुझ गरीब से, नीलाम हो गया नाजनी का गुलाब/
इंतजार में खाक कर दी अपनी दुनिया, कोई फरिश्ता न बताने आया,
समंदर से नायाब रत्न निकले पर विश्वमोहिनी को हर ले गया छलिया/
गुलाब का आदान-प्रदान होता खूब वैलेन्टाइन-डे पर,
पर एक फूल भी भेजते न बना किसी से मुझे जन्मदिवस पर/
न चाहिए कलम, न चाहिए तलवार, न अब कोई बहार ही,
मेरे दिल में तो बसा बस सजनी तेरा वैलेन्टाइन-डे का व्यापार/
तुझे इतर- गुलाब कहूँ या गुलदस्ता, भीनी खुशबू से मुअत्तर हो बदन,
एक बार पेशे- नजर जो हो जाए गुलाबों भरा गुलदस्ता/
अब न पहले सी बहार रही, वो रौनक न रही किसी त्यौहार में,
हर बरस की तरह अबकी बरस भी इंतजार था मुझे कासिद का/
शादियाँ हो जाती है, विदाइयाँ तक हो जाया करती हैं,
निमंत्रण-पत्र भी मिल जाते हैं, पर चिठ्ठियाँ नहीं आतीं/
अब तो बस मोबाइल से ही फूल ही फूल झड़ा करते हैं,
चमेली, नर्गिस और जूही की खुशबू बिना बात भी आ जाती है/
इसके पहले कोई मेरे मोबाइल को नजर लगाए,
' रतन ' उन्हें एडवान्स में दुआ- ए- सदाबहार देते हैं//
राजीव रत्नेश
""""""""""""""""""'''"""'""" ही,मेरे दिल में तो बसा बस सजनी तेरा वैलेन्टाइन-डे का व्यापार/
तुझे इतर- गुलाब कहूँ या गुलदस्ता, भीनी खुशबू से मुअत्तर हो बदन,
एक बार पेशे- नजर जो हो जाए गुलाबों भरा गुलदस्ता/
अब न पहले सी बहार रही, वो रौनक न रही किसी त्यौहार में,
हर बरस की तरह अबकी बरस भी इंतजार था मुझे कासिद का/
शादियाँ हो जाती है, विदाइयाँ तक हो जाया में . हैं,
निमंत्रण-पत्र भी मिल जाते हैं, पर चिठ्ठियाँ नहीं आतीं/
अब तो बस मोबाइल से ही फूल ही फूल झड़ा करते हैं,
चमेली, नर्गिस और जूही की खुशबू बिना बात भी आ जाती है/
इसके पहले कोई मेरे मोबाइल को नजर लगाए,
' रतन ' उन्हें एडवान्स में दुआ- ए- सदाबहार देते हैं//
राजीव रत्नेश
""""""""""""""""""'''"""'"""
