Thursday, April 16, 2026

महफूज हो आज तुम ( गजल)

महफूज हो आज तुम मेरी रहबरी के दम से,
रास्ता बदल लिया तुमने, आखिरी कदम पे/

दुनिया बदल गई, तो मुझे मलाल न हुआ,
तुम भी हो गए हुनरमंद, तो कोई गम न हुआ/

अपना तो यही फसाना है, रास्ता बदल गए राजदां,
कोई अपना न रहा, कोई अपना न हुआ/

कोई चाँद अपना हुआ, न कोई सितारा अपना हुआ,
दोस्तों ते सुना,' वो तो कभी का गैर का हो गया'/

किनाराबंदी दरिया का किया, तुफानों का रुख मोड़ा,
पत्थर पर लकीर खींचकर हुआ वो खड़ा, फिर न डिगा

गिला भी नहीं, शिकवा भी नहीं किसी से कोई,
मेरे यार सा निराला न था दुनिया में कोई

बहुत जतन से ढूँढा, मिल जाता मुझे भी तुमसा कोई,
खींच लेता पाँव अपना, कहता, रहता न यहाँ कोई/

चक्कर कोई तुमसे, हमने तो पाला न था,
आगे बढ़ के पलट आए, मिला जो न रास्ता कोई/

पासे- वफा तुमसे हुआ, न निभा सके रस्म कोई,
शबे- फिराक में न तुम आए, न आया दूसरा कोई/

मौसम की मार पे भी" रतन", तुम तो संग- संग थे,
रास्ता बदल लिया तुमने ही, आखिरी कदम पे/

             राजीव रत्नेश
          **************

उनकी मेहरबानियों से है ये हाल ( शेर)

नींद आँखों से कोसों दूर है
हाथ भर के फासले पर हैं वो
उनकी मेहरबानियों से है ये हाल
बिन बात तुनक जाते हैं वो

तेरा भरम टूटने न पाए( नज्म)

अहबाब कहते हैं,
मेरी आँखें बड़ी- बड़ी है,
तेरी पासपोर्ट साइज फोटो भी,
जूम करके देखने पर,
आदमकद हो जाती है/

हैरतमंद हूँ तेरी मिची- मिची आँखों से,
जिसमें मैं और मेरी तस्वीर भी,
सिमट कर गर्क हो जाती है/

अपनी उतारी तस्वीर को देख कर,
ही तो तुमने कहा था,
कि मैं दुनिया का बेस्ट फोटोग्राफर हूँ/

तेरा यह भरम न टूटने पाए,
इसलिए तुमसे बिछड़ने के बाद,
खुद कोई तस्वीर नहीं खींची/

अब तो नासमझ भी सेल्फी लेने,
और फोटोग्राफी में महारत ,
हासिल करने की होड़ में है/

क्यूँकि तुम्हारे ही घर के बच्चे,
मुझे तुम्हारी ही नजरों में,
और भी गिराना चाहता हैं//

      राजीव रत्नेश

अपनी जुल्फ की भी( रुबाई)

अपनी जुल्क की भीनी खुशबुओं में चंद पल रह लेने दो
मदमाती मस्त बयार के मौसम में मुझे अपने दिल में रह लेने दो
इक जाम की ललक है तेरे प्यासे होठों से, जिन्दगी नयी दे दो
दिल दरिया है तेरा, सीने से एक और चश्मा फूट निकलने दो //

मेरी गजल को अपना( रुबाई)

कारवां बचा लाए सहरा में हम रहजनों से
नाकामियों का गुबार फैलाया रहबरों ने
बड़ी मुश्किलों में जान आ फँसी थी मेरी
मेरी गजल को अपना दर्द समझा दिलजलों ने

एक बूँद आस की

एक बूँद आस की
---------------

बची एक बूँद आस की
हो गई नेस्तनाबूँद वो भी,
दूर कहीं मुर्गा बोला
जैसे हो गई हो सुबह अभी ही/

चिरैंधी- चिरैंधी बू
आने लगी श्मशान से भी,
हस्ती किसी की आज मिट गई,
दूर से आवाजें आती थीं रोने की/

चील, कौवे नोचे डालते थे
किसी अन्जानी लाश को,
तेरे पिजरें की बुलबुल तड़फड़ाती
किसी तरह कफस से निकल भागती/

नब्ज थमने लगी, साँसें बोझल हुईं
कौन ये पुल से दरिया में कुदा,
मछुआरे दौडे बिन कश्ती- जाल ही,
बचा तो स्याह हो चुका था बदन भी/

मेरी सोन चिरइय्या क्यूँ बदहवास हुई,
हर नजारा आँखों के सामने था उसकी,
साँसों की रफतार थमे तो कुछ बोलूँ,
आखिर एक मासूम नई-नवेली थी वो भी//

       राजीव रत्नेश

Friday, April 10, 2026

तेरी कहानी याद है जबानी



तुमसे ही कहते हैं अब तो बात तुम्हारी,
दिल को भा गई बदगुमानी भी तुम्हारी/

तेरे इसरार पे, मेरी सौंपी चाकलेट तेरे मुँह में गई,
वफायें कम, शुक्रिया न कहना मेहरबानी तुम्हारी/

रुखसारों से हौले-हौले तेरा मुस्कराना,
मेरे आगोश से निकल कर, फिर पास आने का इरादा/

अपनी हाँ को ना से छिपाना, तौबा भी तो मेरी ही,
आता है याद रह- रह वो मंजर रात का सुहाना/

कभी छिपना, कभी पर्दा हटा के मुझे निहारना,
छिपा नसकी तुम थोड़ी भी अपनी इजहारे- तमन्ना/

कहानी पूरी न हो, बिना जिक्रे- जोशे- जवानी,
ऐसी तो गजल न देखी, न सुनी कहानी/

अब तो सूरज ढलान पे आने-आने को है,
उतर आ खाट से, हाथ के डंडे के सहार/

तेरी सरगोशियों से एक तूफां बया होता है,
बदनीयती तेरी मैं भी सबसे कह दूँगा जबानी/

असर तेरी बात का मुझ पर नहीं, वैसे भी मेरी ना है,
वो बात भी महफिल में सुनावेंगे, जो ना सुनानी है/

आ जाओ एक बार फिर से आगोश में सरे- महफिल,
तेरा किस्सा, तेरी कहानी" रतन" को याद है जबानी//

                   राजीव रत्नेश
             ****************

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!