Tuesday, December 31, 2024

तुझे मुबारक हो नया साल

तुझे मुबारक हो नया साल-

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नया साल तुझे याद रहे ,तुझे भेजा है मुबारकबाद 

सुबह से इंतज़ार में बैठा हूँ ,लेकर खिला गुलाब। 


झीनी -झीनी बदली में ,चन्द्रिका खिली आसमान में 

आज देखो निकला है ;गगन में रइश्मी -रश्मिरंजित चाँद।

सुबह का तारा है दिया ,जिसने आधी रात कोपुकारा।  

बिस्तर पे बैठ के ,यूँ ही मुश्कराने में मजा है ,जैसे बादल में चाँद,



बड़ी शर्मीली हो लगता ,जैसे हो ,तुम्हारी सुहागरात। 

दो हंसो का जोड़ा बिछड़ा ,एक दिल्ली में ,एक बम्बई में ,

तुम चाहोगी ,तो हो जाएगी ,हमारी तुम्हारी मुलाकात। 

सूरतेहाल कुछ.समझ में आता नहीं ,क्या तुमसे बतायें ,

शायद तुम्हें फिर से हम आते हैं याद ,भेजा है तुम्हे खत में गुलाब। 

हम तुम्हारी याद में ,तुम्हारे इंतज़ार में ,हो गए बर्बाद ,

बार -बार याद दिलाये ,नीली झील में ,उतर कर चाँद। 

करीब था जोलम्हा ,और भी दूर होता गया ,तुमसे क्या उम्मीद ,

तुमने शेर को बकरी कiर के सुनाया ,हमने दिल से कहा इरशाद। 


बराये -मेहरबानी एक बार जो ,मुकाबिले -महफिल होते ,

हमें बार -बार याद आता ,अपना मुक्क़दर ,अपना चाँद। 

याद में तेरी ,आँखों से अश्क  ढुलकाते रहेँगे ,

हार जाओगे तुम ,हमें न कर ,पाओगे तुम बरबाद। 

तेरी नजरों का निशाना ,आज तलक ,तो कोई और था ,

बिना अपनी ,चन्दिनीआ के किस कदर ,आज भी उदास है चाँद। 


 बतौरेखास आज ,तू आकर ,बज्म में देख जरा 

कितना कुम्हला गया है ,आज तेरी ,बगिआ का गुलाब। 


हम न तुझसे नजर मिलायेंगे ,न ही तेरे पास आयेंगे ,

तुमने हमको किआ है बरबाद ,किस सूरत ,किया है नाशाद। 

दूर जाकर आज तक हमसे ,किस कदर परेशान है चाँद,

हमारे लिये राह में ,बिछे थे माहो आफताब। 


पास बुलाओगे तो भी हम न बुलाएँगे तुमको पास हम ,

दूर जाके देखो ,हम भी न करेंगें ,दिल से इजहार। 

पास आके भी क्यों हैं ,गगन से गायब है चाँद ,

हमारी बला से ,बाप के सर पे तेरे ,निकला चाँद। 


अब न उसे अपने पास बुलाएँगे ,न ही याद करेंगें ,

किसी तरह भी पा जाऊं ,मुझे आज तक पसंद है। 


पास आ आ के भी ,और दूर चली जाएगी ,तो उसे क्या न सुनाएं ,

दूर जाकर भी आज तक ,बदला है क्यों आज भी चाँद। 

मिलते हैं मौके इंसान को ,अपने अपने नसीब से ,

करीब आके छोटे साले ने ,दिखाया था मुझे ,मेरे बगल में चाँद 


नसीहत चमन के माली ने मुझे दी ,अब संभल के रहो ,

मुर्झा गया जाने कैसे ,तुम्हारी बगिआ का गुलाब। 


काश हालेदिल ,हमे याद न दिलाता ,गुजरा हुआ जमाना ,

जन्मदिन पे देती थी तोहफे ,छोटी साली को रहता था याद। 

आ जाओ मुकाबिल मेरी  चाहत के ,तुम्हें याद हो ,या न याद  हो। 

तुम्हीं ने भेजे ,नये साल की सुबह ,मुझे सुफेद गुलाब। 


दूर दिल से अँधेरे कर लूँ ,तुम्हें दिला दूँ याद ,

याद तुम्हें हो ,या न हो ,आज तुम्हें भी ,मुबारक नया साल। 

आज आकर ,सीख लो नये गुर ,जिंदगी भर हमें आजमाती रही ,

तुम्हारी भाभी बताती मुझसे ,अपने भइया के हॉस्टल का हाल। 


जब नशे में रहो तो ,आके करीब ,मुझे भी मदहोश करो ,

सर को झटकने से झर गए ,तुम्हारे गजरे के सारे गुलाब। ,


मैं सवाल करता तो ,पुलिस आती ,शादी के बाद आई भी तो दूल्हे के घर 

लड़का  तलाक का मुकदमा ,लड़ते लड़ते हो गया परेशान। 

बवाल मचाया तुम्हारे भाई ने ही ,गैर की शादी में आकर ,

मुझे उठा दिया वहाँ से ,जहाँ पर बैठा था मेरा चाँद। 


तुम्हीं से निस्बत है ,तुम्ही से है.मुझको मतलब मेरी जान 

आ जाओ नये साल पर ,पेश करूँ  तुम्हे गुलाबी गुलाब। 

इक बार 'रतन ' को ,जख्मेदिल देकर तो आज़माओ ,

मर भी जाएँगे ,भले मिट ही जाएँ ,किसी से ना करेंगें फरियाद। 

                    राजीव  रत्नेश 


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