Wednesday, April 1, 2026

हम भँवर से साहिल पे आए ( कविता)

हम भँवर से साहिल पे आए
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जिधर तेरी जुल्फों का साया नहीं,
अब उधर ही राह है साकी!
छाए हैं बादल दिल के आस्मां में,
पर होती है बरसात नहीं /

जागा मुसाफिर हूँ सारी रात का,
तुझको इस बात का इमकान नहीं,
सितारा- सितारा आस्मां का गवाह है,
घुट गए दिल के अरमान सभी/

आँखों का काजल बहा गालों पर,
पर अलकों का श्रृंगार वही,
जान-बूझ कर तुझे छेड़ते नहीं,
लटें जैसे लतर- ए- हरसिंगार सही/

जिस तक कभी पहुँच सका नहीं ,
तेरी नाक है कुतुबमीनार सही,
हम और करते क्या, आफत में जां,
छान डाला सारा मछलीबाजार वहीं/

सुरूर में ही तुझे प्यार कर बैठा हूँ,
भले करती तू प्यार का व्यापार सही,
महाजनों से तेरा वास्ता, बोल दो,
लौट कर मयखान से चुकता कर दूँगा उधार सभी/

साकी तूने मिलाया था जाम में जहर,
पर फँसा कोई शिकार नहीं,
हम हीं तेरी जद में आ पहुँचे,
मानती नहीं अपने को खतावार सही/

बोझल हो चलीं साँसें अब तो,
किसी खुशबू का मैं तलबगार नहीं,
बेमोल बिकती है जवानी यहाँ,
माल लेना नहीं, हम खरीदार नहीं/

डगमग होती कश्ती अब तो बीच भँवर,
नाखुदा हूँ पर पास पतवार नहीं,
मस्तूल के सहारे बह चला हूँ,
जिधर चले पवन, उधर ही सफर सही /

जज्ब- ए- दिल में हलचल हुई तुझे पाकर,
साहिल पे मिले करते इंतजार सही,
तुम्हारा ही आसरा था मुझे शुरू से,
कर लोगी समझौता भी इक बार सही/

जनम-जनम का मैं तेरा दीवाना,
देख तुझे, शलभ बन क्षार हुआ सही,
तुझे ही दिल ने अपना जान लिया,
कश्ती आ जो साहिल से लगी/

सबक दे गए हमेशा के लिए ,
दे गए अहबाब जो सद्‌मात सही,
भटकता फिरा सुकूं की तलाश में,
मिला आकर मुझे तेरा साथ सही/

पास आकर तेरे मिट गए थकान सभी,
तुझी से मिले मंजिल के निशानात सही,
उल्झनों भरी जिन्दगी को मिला सहारा
समेटे फिरता काँधे पे अपनी कायनात सही/

पास तेरे मिले मंजिल के निशानात सही/

देख तेरा अपनापन, मदावा- ए- जख्म हुआ,
कोई दवा काम नआई, जो चारागर ने दिया,
हम भँवर से साहिल पे आए तो सही' रतन'
तुम आलिंगनबद्ध होकर मुझे मिले तो सही//

         राजीव रत्नेश
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