सरगोश फिजां के सारे नजारे तेरे ( गजल)
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आई थी गुल्शन से तेरी खुशबू मुझे पुकारने/
आँचल में थे तेरे, मेरे लिए सैकड़ों अफसाने/
मेरी आरजुओं की फेहरिस्त कोई लंबी न थी,
चाहे थे चंद प्यार भरे अल्फाज, चंद मुस्कराहटें/
आँखों में शबनम की लड़ी, दिल में प्यार का सागर,
तुझसे चंद मुलाकातों में दिल सुनाने लगा नगमें/
जनम-जनम का साथ था, शायद हमारा तुम्हारा,
तुम मुझे मिले थे, आँखों के कोरों में भरकर इशारे/
तमन्ना भी तेरी नथ डोलती रहे यूँ ही हमेशा-हमेशा,
अँधेरी काली रातों में चमकते रहें उसके नगीने/
हम तेरी मुहब्बत का, जानते हैं, पार पा न पाएँगे,
तेरे दिल में सैकड़ों अफसाने, मेरे बस चंद इरादे/
लहरों से नैया हिचकोले खाए, बिन साथ तुम्हारे,
तुम्हीं नाखुदा हो, तुम्हीं खिवैय्या, कश्ती तेरे हवाले/
आना हो तो आ जाना , चप्पू सँभालते- सँभालते भी,
हम तेरे इंतजार में पलकें बिछाए, तुझे ही पुकारें/
जीवन के सफर में मिले हो हमसफर बन कर,
सुन चंदा! हर तरफ तेरी चाँदनी, सितारों के सहारे/
" रतन" की आरजू है, हम तुम बस गलबहियां मिलें,
बाकी बचे सरगोश फिजां के ये सारे नजारे तेरे//
राजीव रत्नेश
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इतना लचीलापन छिपा तेरी इक-इक अदा में है,
कि तरन्नुम में तुझे ढ़ाल सकता हूँ/
तू मेरी बाहों के घेरे में आजा बस इक बार ही,
बेसब्री में मैं चूम तेरा गाल सकता हूँ//
राजीव रत्नेश
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