तेरा इंतजार भी न था
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चालीस साल करीब पूरे होने को आए,
तुझसे बिछड़े हुए/
तुझको तेरे अपनों ने कहाँ खपाया,
मैं तो तेरे बिना जिन्दा लाश बन कर रहा/
तेरा अता-पता कुछ मुझे मालूम न था,
तेरे एक- एक सगे, तेरी सहेलियों से पूछा/
मेरी हालत देख सभी मुँह बिचका देते थे,
तू कहाँ है, पूछने पर ना में सिर हिला देते थे/
ढूँढ ढूंढ जब थक हार गया,
अचानक आकर मेरे गले से लगी/
दुबला बदन, दमे की मरीज जैसी,
जाने क्या- क्या रोग लगा बैठी/
काश! मुझसे पहले ही मिल जाती,
मेरे चालीस साल यूँ ही न गुजर गए होते/
तेरा इंतजार भी न था, बस प्यास हद से गुजर जाती,
जिन्दगी रहती न रहती, मुलाकात तुमसे न हो पाती//
राजीव रत्नेश
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