मेरी आवाज सुनो
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मैं इश्क की बाजी जीतना भी नहीं चाहता,
बस अपने अहसासों को थोड़ा मुकाम देना/
और अगर मेरी मुहब्बत तुम्हारी मंजिल न बने,
तो जाते-जाते मुझे दुआओं का पैगाम देना/
मैं शिकायतों का सफर नहीं लिखूँगा,
तुम बस अपनी यादों का एक जाम देना/
जो किस्मत में लिखा होगा, वही होगा,
मुझे बस अपने दिल में एक शाम देना/
मैं उल्झनों में भी, मुस्कराते हुए भी जी लूँगा,
तुम मेरी खामोशी को कभी इल्जाम न देना/
राजीव रत्नेश
( जान्हवी से आखिरी मुलाकात )

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