Tuesday, August 11, 2026

मुक्तक

थामा तुझे तेरी लग्जिश पे बाहें फैला,
थिरकती तू महफिल में होकर निढ़ाल/
करा के लूट ले, अधरामृत का रसपान,
मैं तुझे बुलाऊँ बार- बार अपने पास//

            राजीव रत्नेश

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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!