थामा तुझे तेरी लग्जिश पे बाहें फैला,
थिरकती तू महफिल में होकर निढ़ाल/
करा के लूट ले, अधरामृत का रसपान,
मैं तुझे बुलाऊँ बार- बार अपने पास//
राजीव रत्नेश
" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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