आ जाओ दिल में
--- राजीव रत्नेश
आ जाओ दिल में, दो तर्ज- ए- बयानी को रास्ता,
हक में तुम्हारे अच्छा है, दो मेहरबानी को रास्ता/
समंदर फिर भी गरजेगा, तूफान भी राह में आएँगे,
न दो अब फिर से तुम किसी नातवानी को रास्ता/
कदम-कदम पे हौसले पस्त होंगे, न होंगे मरहले आसान,
हम तो बस राह- ए- मंजिल दे शगुफ्ताख्याली को रास्ता/
जिस गली में तुम रहते हो, वहाँ तक हमारी पहुँच नहीं,
फरिश्ते वुजू करते हैं, इंसान से ही खुदा को वास्ता/
ये आबशार के साथ उमड़ती है तेरी जुल्फ- ए- बरहम,
खिदमत में तेरी खुद मंजिल चलेगी, तुम तो बनाओ रास्ता/
नमाज भी अदा हो जाएगी, उड़ते रहें भले रुख पे गेसू
तुम दिल में बस दे दो अपनी मेहरबानी को रास्ता/
फना हो जाएँगे हम, तुझे खबर होने तक,
चाहते हैं तेरी किसी निशानी से वास्ता/
हम तो अब अपनी मुहब्बत को तमाशा बनाने से रहे,
चमन के फूलों में ढूँढ़ते रहे तेरी रानाइयों का वास्ता/
मजबूरियाँ मुहब्बत की, ' रतन ' हैं बावस्ता,
न दो अब मुहब्बत में फिर किसी नादानी को रास्ता/
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