Thursday, October 1, 2026

आ जाओ दिल में------- गजल

आ जाओ दिल में
      --- राजीव रत्नेश

आ जाओ दिल में, दो तर्ज- ए- बयानी को रास्ता,
हक में तुम्हारे अच्छा है, दो मेहरबानी को रास्ता/

समंदर फिर भी गरजेगा, तूफान भी राह में आएँगे,
न दो अब फिर से तुम किसी नातवानी को रास्ता/

कदम-कदम पे हौसले पस्त होंगे, न होंगे मरहले आसान,
हम तो बस राह- ए- मंजिल दे शगुफ्ताख्याली को रास्ता/

जिस गली में तुम रहते हो, वहाँ तक हमारी पहुँच नहीं,
फरिश्ते वुजू करते हैं, इंसान से ही खुदा को वास्ता/

ये आबशार के साथ उमड़ती है तेरी जुल्फ- ए- बरहम,
खिदमत में तेरी खुद मंजिल चलेगी, तुम तो बनाओ रास्ता/

नमाज भी अदा हो जाएगी, उड़ते रहें भले रुख पे गेसू
तुम दिल में बस दे दो अपनी मेहरबानी को रास्ता/

फना हो जाएँगे हम, तुझे खबर होने तक,
चाहते हैं तेरी किसी निशानी से वास्ता/

हम तो अब अपनी मुहब्बत को तमाशा बनाने से रहे,
चमन के फूलों में ढूँढ़ते रहे तेरी रानाइयों का वास्ता/

मजबूरियाँ मुहब्बत की, ' रतन ' हैं बावस्ता,
न दो अब मुहब्बत में फिर किसी नादानी को रास्ता/

                 """""""""""""

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!