दर्द- ए- दिल का आराम पूछो
राजीव रत्नेश
कलेजे से यूँ ही नहीं लगाया था तुमको,
आ गए हो तो दर्द- ए- दिल का आराम पूछो/
रंगीनियों में सबा का आलम न पूछो,
तू मोहतरिम है, हमसे दिल का दाग न पूछो/
आके इक बार नजर के सामने सूरत तो दिखाओ,
अपनी महकती साँसों से नगमा- ए- दिल सुनाओ/
हम सारे जहाँ से छुपा कर तुमको दिल के गोशे में
रखेंगे,
हम कुछ न कहेंगे तुम्हें, तुम शिकवा कर के देखो/
जिस तरह पहली बार पैगाम- ए- उल्फत भेजा था मुझे,
उसी उम्मीद में जी रहे हैं, दुबारा पेश आकर देखो/
एक तस्वीर ही अपनी, छिपा कर देखने को भेज देना,
ख्वाबों से कब तक दिल बहलेगा, खुद साथ आकर देखो/
अपना ख्याल रखना, हाल-ए- दिल मेरा किसी से न
कहना,
गर्दिश में है मुकद्दर, अपनों से अब न लजाओ/
आता क्या है तुम्हें इक शर्मीली, हठीली मुहब्बत के सिवा,
हमारी खातिर अपने से, अपनों से तो न शरमाओ/
हो सके तो अकेली आना, छोटी बहन को न साथ लाना,
वो भाँड़ा तुम्हारा फोड़ देगी, खुद से जरा समझो/
मेरी सदियों की तुम चाहत हो, अब अजनबी न बनो,
रतन, सब जानते हैं--- आज खुल कर हाल- ए- दिल
बयान करो/
""""""""""""""

No comments:
Post a Comment