हर पल का मैं तो शायर हूँ ,हर पल का किस्सा याद जबानी है ,
तू मेरा अफसाना है ,मेरे पास हर पल की याद तेरी निशानी है।
आ जाओ अहले-महफ़िल के मुकाबिल ,दिल सूना -सूना है ,
तेरी याद दरिया है ,मेरा प्यार समंदर ,तेरी निशानी है ,
आओ ये रात तुम्हारी है ,,चाल तेरी गजगामिनी सी है।
चाल तेरी मस्त -मस्त ,मेरी तुझी से यारी है ,
सुबह की अल्ला खैर करे ,तेरी शाम सुहानी है ,
नखरे तेरे सालों -साल देखे ,अदा तेरी मस्तानी है।
आ जा बज्म में ,आँचल में लिए नसीमे -सहर ,तू मेरी कहानी है ,
रौनके -बज्म तुझी से है ,शतरंजी चाल ,मौसम की मेहरबानी है
आँखे पाई है गजालों की ,तू आखिर किसकी निशानी है।
हम तेरे मयखाने में भी आएंगे ,जायेंगे दैरो -मस्जिद भी
नक्श तेरे सुभान -अल्लाह ,चेहरा तेरा गुलाबी है ,
दे जाओ जो देना है तुझे ,मेरे पास तेरी एक ही निशानी है।
आ जा मुह्हबती -नज़र ले के मेरे घर में ,याद तेरी कारस्तानी है ,
ले आ महफ़िल में ,तेरे पास 'रतन 'की जो आख़िरी निशानी है ,
हम मिलेंगे तुझसे ,कल ही होली के पहले मन गयी दीवाली है।
राजीव रत्नेश
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