अब तुम मेरे पास ही रहना ,देखा -देखी ही प्यार की मंजिल होती है ,
हम -तुम मिल जायेंगे तो ,एक अलग दुनिया तामील होती है।
निशाना नज़रों का चला तो सीधे दिल पे आया ,
दिल को बड़ी तस्कीन होती है।
आ जाओ मेरे दिल के पास ,पास आने से ,
मिलन तक़सीम होती है।
मेरे पास आओ ,मंज़िल यूँ हर तरह नदीम होती है ,
तुम करीब आओ न आओ ,मंज़िल मेरे नज़दीक होती है।
मेरे अफ़साने में गैर कोई आएगा नहीं ,
तुम्हीं से खुदा -हाफीज़ होती है।
तेरी इज़्ज़तो -आफ़ताब का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं ,
अब कहीं और न जाओ ,रिश्ता -ए मोह्हबत दिल से तक़लीम होती है।
पास आ जाओ अब तो 'रतन 'देखा -देखी ही प्यार की मंजिल होती है।
-------राजीव रत्नेश ----------
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