Friday, June 5, 2026

सप्लाई विभाग की वितरण प्रणाली (१ नवंबर२५ )

महोदय,
         लगता है आजकल आपके मंत्रालय की तबीयत कुछ नासाज चल रही है/ तभी तो आपका हर सहयोगी आपके अंतर्गत काम
करने में हिचकिचा रहा है/ आज तक यथास्थिति बनाए रखने में आपकी भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय रही है/
         मुझे मालूम है कि आपको बिना बात हैरान-परेशान रहने की
पुरानी आपत है और आपके विभाग की बतौर वसूली झूठी कवायद
करने की बीमारी है/ आप लोगों से और क्या चाहते हैं? मजा तो
आपको तब आता है, जब कोई रामधुन गाए बजाए/ नेहा राठौड़ की बातें आपको बकवास लगती हैं/ महतों, साधू-संतों का भी सत्ताधीशों को आशीर्वाद देता और छोटों को दर्शनों से भी वंचित करना आता है/
यही तो उनकी रोजी-रोटी है/ कुंभ में भगदड़ मचे तो मचे, आग लगे तो लगे, आपका अखाड़ा तो पूरी साजो-सज्जा के साथ पूरे तामझाम से
निकलेगा/
          तमान देश में गरीबों के लिए फ्री का राशन है/ हर बार चुनाव
से पहले वादा किया जाता है कि अगले पाँच साल और तीन-चौथाई
जनता यानी करीब 80 करोड़ लोगों को फ्री का राशन मुहैय्या कराया
जाएगा/ पिछले दस वर्षों में इसमें कोई कोताही नहीं हुई है/ देने वाले
देने से नहीं चूके और गरीब जनता ने पचा डाला अगले चुनाव तक के
इंतजार में/ जो कुछ अच्छा होता है उसे सर्वसुलभ कर दिया जाता है/
अब तो जनता के स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए मोटे अनाज को फ्री
वितरित करने का प्रावधान किया गया है/ चावल की जगह गेहूँ वितरण की प्राथमिकता को सरकार की तरफ से अनिवार्य कर दिया
गया है, जिसमें गेहूँ कम कंकर ज्यादा होता है/
           अपना तो सदा से धर्म ही यही रहा है-- राम राम जपना, पराया माल अपना/ जमाने का भी तो सदा से यही रिवाज रहा है/
बाँटने वाले बाँटते- बाँटते थक गए पर सरकारी गोदामों में कोई कमी
नहीं हुई/ यह बात जरूर है कि कुछ चूहे खा गए, कुछ सड़ गया फिर उसे खाद बना दिया गया/ लोग गेहूँ बीन कर कंकड़ फेंक देते हैं/ हर
नगर- महानगर में मेन गेट के पास कूड़े का अंबार लग जाता है, जिसे
सफाई- कर्मचारी उस कूड़े को कूड़े के भाव बेच देते हैं/ किया ही क्या
जा सकता है, हर कोई साइड- बिजनेस कर रहा है/
              भ्रष्टाचार का बोलबाला किस विभाग में नहीं है/ ज्यादातर
लोग तनख्वाह के अलावा कमाने में विश्वास रखते हैं और इसी में अपने को गौरवान्वित समझते हैं/ कोई राह कोई मंजिल नहीं है/ खाओ- पिओ और मौज उड़ाओ--- हर तरफ यही देखने को मिलता है/ प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया ने इसमें और भी चार चाँद लगा दिया है/ अपना कहने को कुछ नहीं, हर कुछ प्राइवेट है, भई प्राइवेट है//

              राजीव रत्नेश
       ----------------------------

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!