मेरे हिस्स में रखे सिर्फ खार- बबूल/
बीते हुए करीब १२ सालों में भारतीय सरकार ने भारत के
डिजिटलाइजेशन का जो सपना देखा है, उसको साकार करने में
सरकार ने येन केन प्रकारेण अपनी सारी ताकत झोंक दी है/ सरकारी आदेश से आफिसेज में पेपरलेस काम किए जा रहे हैं/ यहाँ तक
असर पड़ा है कि सरकारी और गैर सरकारी बैंकों में भी एक, दो, पाँच के नोट नहीं दिखाई पड़ते हैं/ मारकेट से सिक्के भी गायब हैं/ हर कोई डिजिटल लेन-देन में व्यस्त है/
पिछले जमाने में जबकि भारत में पुराने राजे-रजवाड़े थे/
मुद्रा के नाम पर मुहरों के नाम पर मुहरों का आदान-प्रदान होता था/
उसके भी पहले कृषी- प्रधान भारत में अनाज के बदले सामान की
व्यवस्था थी/ विदेशी आक्रांताओ--- महमूद गजनवी द्वारा सत्रह बार
और मोहम्मद गोरी द्वारा इक्कीस बार की लूट से सोमनाथ आदि
मंदिरों की सांस्कृतिक विरासत अथाह मणि-माणिक- मुक्ताएँ और
सोने-चाँदी तथा हीरे-जवाहरात बड़ी बेदर्दी से लूटे गए/ मंदिरों को
तोड़ा गया/ उनकी दीवारों और खंभों, यहाँ तक कि मूर्तियों तक को
विदेश ले जाया गया/ पर भारत की अथाह संपदा खत्म नहीं हुई/
डिजिटल लेन देन ने सबसे अधिक इस युग के बुजुर्गों यथा
किसानों, मजदूरों तथा सरकारी, गैर-सरकारी कर्मियों को हैरान किया है, जिनके पास न मोबाइल है न मोबाइल से संबंधित डिजिटल लेन-
देन की कोई जानकारी/
सरकार भी शायद यही समझती है कि बुजुर्गों की यह
खेप आखिर कब तक जीवित रहेगी/उनके जीने-मरने से सरकार को
कोई नुकसान भी नहीं है/ वो तो भारत को मार्डर्न- डिजिटलाइजेशन से जोड़कर बिटक्वाइन का प्रचलन करने में अपने को सिद्धहस्त करने
की आकांक्षा संजोए वर्तमान पुरानी खेप की अर्थी सजाने में ही अपना
हस्त- लाघव समझती है/
महर्षियों तथा विद्वानों ने मनुष्य की औसत आयु सौ वर्ष मानी है/ सरकारी आंकड़ों में औसत आयु सत्तर मानी है/ आज के पेपर में पाया कि सरकारी रिटायर्ड कर्मचारी की यदि मृत्यु सड़सठ
साल(६७ वर्ष) के पहले हो जाती है तो उसकी फैमिली को पेंशन, उसके जन्म से६७ वर्ष बाद बढ़ी हुई पेंशन नहीं दी जाएगी बल्कि
सामान्य पेंशन ही दी जाएगी/ इस आदेश ने तो अपने कर्मचारियों की
मौत की औसत क्या अधिकतम आयु६७ वर्ष हर हालत में निर्धारित
कर दी है/
सबसे बड़ी बात जो खटकने वाली यह है कि पेंशनभोगी
अब बचे ही कितने हैं, उन्हें भी यह सरकार मिटाने के लिए प्रयत्नशील
है/ गौरतलब बात यह है कि जीवन- सीमा नेताओं पर लागू नहीं होती/ वे जीवन भर रिटायर होने पर भी पेंशन के हकदार होते हैं/ भले वे८०-१०० साल जियें या शायद कभी मृत्यु को ही प्राप्त न हों/
जनवरी १४,२००० को सबसे पहले उ ० प्र ० राज्य
विद्युत परिषद उ ० प्र ० पावर कारपोरेशन निगम बनाया गया/ जिसकी मूलभूत यथार्थता ये थी कि निगम में नौकरी पाने वालों को
पेंशन नहीं मिलेगी/जो डिसीज्ड कर्मचारी आएँगे, उनकी भी पेंशन नहीं
होगी/ इसके बाद अन्य डिपार्टमेंट्स में भी सन२००४ से लागू हो चुकी
है/
भावी पीढ़ी का यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके
बुजुर्ग कब तक रिहाइश महसूस करते हैं/ सरकारी नौकरी मिलना अब एक अजूबे के सिवा कुछ नहीं है/ बेरोजगार नवजवान डिग्रियों की फाइल और लैपटाप कंधे पर ढोते हुए, जूते के फीते कसे हुए नौकरी की तलाश में दर- दर ठोकरें खाते हुए भटक रहे हैं/
आजकल कैशलेश इलाज का बड़ा बोलबाला है पर
कितने इसका लाभ उठा पाते हैं या यह केवल अफवाह मात्र है, जो मर्ज को भी मार देते हैं और मरीज को भी शायद/
आजकल रिटायरमेंट की उम्र सरकारी कर्मचारियों के लिए६० वर्ष, इंटर तक के शिक्षक वर्ग के लिए६२ वर्ष तथा डिग्री
कालेज अथवा यूनिवरसिटीज लेक्चरर्स और प्रोफेशर्स केलिए
अधिकतम ६५ वर्ष है/ सरकार की मंशा २ वर्ष, पाँच वर्ष और अधिकतम सात वर्ष तक ही उनको पेंशन देने की है, जो पुराने हैं और पेंशन के हकदार हैं/ बाद में उनकी फैमिली का भले ही सवा- सत्यानाश हो जाए/ जब तक जिओ काम करो उसके बाद तो
मतदाता- सूची से नाम ही काट दिया जाएगा और भारतीय होने की अपनी नागरिकता ही खो देना होगा/ जब तक सरकारी तंत्र भुष्ट है तब तक तो यही कुछ होने वाला है/
कहाँ तो सरकार बेरोजगार युवाओं के लिए कृषि-
प्रधान देश में बेहतर कृषि का कार्यक्रम चलाती पर यहाँ परिपाटी ही
उल्टी है/ नगरों और महानगरों में कृषियोग्य जमीन ही नहीं बची है जो है भी, बहुमंजिली इमारतों ने वह जगह हथिया ली है/ कहाँ तो जंगल
उगाए जाते, झील- झरनों, तालाबों और नदियों को संरक्षित किया जाता पर यहाँ पर तालाबों और झीलों को भी पाट कर व्यवसाय-
योग्य तथा रिहायशी रिजार्ट में तब्दील किया जा रहा है/
इस खबर से ही कि कल मंत्री जी पौधारोपण
करेंगे, रातों-रात जंगल काट कर समतल किया जाता है/ भले ही मंत्री जी आम, कटहल अथवा नीम आदि न लगाकर वे ही पौध लगाएँ, जो
पृथ्वी को ऊसर( बंजर) बनाते हैं/
फुटपाथों पर पेड़ लगा कर उनको घेरा जा रहा
है कि राहगीरों का पैदल चलना भी मुहाल हो जाए/
" वृद्धों की सेवा व सत्कार करने वाले दीर्घायु, विद्या, यश
और बल के अधिकारी होते हैं/"
------ महर्षि मनु
वृद्धों के अनुभवों से लाभ उठाना सर्वथा उचित है/
कहाँ तो यह सरकार वृद्धाश्रमों की संख्या
में इजाफा करती और उनकी सुविधाएँ बढ़ाने की सोचती/ पर मुझे तो
ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारी तंत्र इस बात की मुनादी कर रहा है उसकी मंशा यही है कि---
मिट जाएँगे हम, भले जां से भी जाएंगे/
हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे//
राजीव रत्नेश
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