न निशान छोड़ जाऊँगा, न झंडा गाड़ के जाऊँगा /
अपने साथ अपनी सारी कायनात उठा के जाऊँगा /
रंजो- गम के सिवा और मुझे दिया क्या है जमाने ने,
अपने साथ उसको भी उसकी औकात दिखा के जाऊँगा /
कोई बाशिन्दा तेरे शहर का भले न पूछे मुझको,
उजड़ा हुआ शहर छोड़ जाऊँगा तेरा परिस्तान उठा ले
जाऊँगा /
नीम हकीम खतरे जान, इलाज किसका करवाऊँ,
तेरे वैद्य बाप के हुनर को आजमा के जाऊँगा /
माना कि मजबूरे- मुहब्बत था तेरा, तूने भी तो साथ न
दिया,
क्या करता और, नफरतों की बिछा के बिसात जाऊँगा /
दुश्मन न था कोई मेरा, तुमने दुश्मन कई बना दिए,
किस पर करूँ यकीं, हर किसी को बता तेरी जात जाऊँगा /
तेरी गली का रास्ता तेरे बाप की तर्जे- बयानी पे छोड़ा,
जाने से पहले उसको मरने-मारने का सिखा अंदाज जाऊँगा /
हाले- दिल सुना न जाए तो हाथों को कान पे रखना,
तेरी हर सौगात दिल से मिटा हर निशान जाऊँगा /
तेरे बाप से तो भला कबूतर तेरा, तेरे खत तो ले आता है,
जंगे- मुहब्बत हारा हूँ पर उसे प्यार- दुलार जाऊँगा /
कहाँ तक, कैसे मुझे आखिर तुम भुला पाओगी,
तेरा रहगुजर छोड़ जाऊँगा, अपना नक्शे-कदम मिटा
जाऊँगा /
मगरुरियत और मसरूफियत तुझे बार- बार मुबारक,
मेरे गिरेबां के गिर्द कसती तेरी बाहें, झटके से हटा जाऊँगा /
क्या कर लेगा जमाना, आज तक जो कुछ कर न सका,
मौत के भी सर्द हाथों से बचता- बचाता जाऊँगा /
काबलियत तेरी है, अंदाज तेरा वही पहले वाला है,
कुंडली मार के बैठ, टोकरी समेत तुझे पहचाऊँगा /
बारिशों के मौसिम में भी न याद करूँगा कभी तुझे,
ये मेरा अहद है, वादाशिकन तुझे मैं कैसे भुला पाऊँगा
जाने किस बेवफा से दिल लगा बैठा था ' रतन '
जाने से पहले उसको मयकदे का बता के रास्ता जाऊँगा //
राजीव रत्नेश
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" बाप से बेहतर तो महबूब का कबूतर निकला,
रतन जंगे- इश्क हार कर भी, मुकद्दर का सिकंदर निकला"/
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