बस मेरी तस्वीर ( नज्म )
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मेरी एक- एक निशानी मुझे वापस कर तो रही हो,
पर हृदय- मंदिर में समाई, मेरी तस्वीर भी वापस करना/
वरना एक टीस हमेशा के लिए तुम्हारे सीने में दफ्न न
हो पाएगी,
रह- रह के जो तुम्हें तड़पाएगी, मन को कचोटती रहेगी/
याद आएँगे वो दिन, जो हमने- तुमने साथ- साथ हैं गुजारे,
हर कशमकश में हम- तुम साथ थे, रूठी हुई किस्मत
के मारे/
तुम्हें क्या सूझी, तुम क्यूँ हाल-बेहाल हुई, क्या बरबाद
हुई,
हया की राह छोड़ क्यूँ आज तुम बेहयाई पर उतर आई/
मुहब्बत किया था तो आगा-पीछा सोच कर न किया था,
कि एक दिन अलगाव का गम भी सहना पड़ेगा, बेमौत
मरना पड़ेगा/
तेरी मुहब्बत में दुनिया छोड़ी थी, फिर उसी से नजरें मिलाना पड़ेगा,
तुमसे ये सोच कर सामना कर लूँगा, मेरी है भले हरजाई ही सही/
नदी का किनारा, तुझे रह- रह कर मेरी याद दिलाता रहेगा,
जहाँ मिल बैठ कर हमने- तुमने मछलियाँ काँटे में थीं
फँसाई/
जिंदगी तुमसे दूरी की मुस्तहक न थी, न ही जिंदगी
अजाब बनी थी,
क्या सोच कर तुमने नाहक हमारे- तुम्हारे बीच की दूरी बढ़ाई/
लौटा न सको मुझे तुम, मेरी दी हुई सौगातें, अपनी पुरानी यादें,
बस मेरी तस्वीर कम से कम मुझे अपनी तस्वीर के साथ वापस करना//
राजीव रत्नेश

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