Thursday, August 20, 2026

औकात कहाँ से लाऊँ ( गजल )

औकात कहाँ से लाऊँ  ( गजल )
++++++++++++++++++++

तुम्हारी औकात है, औकात अपनी मुझे दिखाओ,
मेरी तो औकात नहीं है कि वैसे तुझे दिखाऊँ/

शबे- बारातें सब याद मुझे, लम्हा-लम्हा फिसलता हुआ,
वो जिन्दगी की आखिरी शबे- रात कहाँ से लाऊँ/.

तुझे देख कर पहली बार जो दिल धड़का था मेरा,
तब का अपना तेरे लिए इजहार कहाँ से लाऊँ/

तू जो आमादा है, धज्जियाँ मोहब्बत की उड़ाने को,
तेरे लिए अब मैं पुराने अखबार कहाँ से लाऊँ/

गुजर चुका अब तो सर से पानी भी कब का,
मैं कोई गोताखोर नहीं, अच्छा तैराक कहाँ से लाऊँ/

तेरी ' ना' को' हाँ' में तब्दील करूँ तो आखिर कैसे,
दिल के मिटे अपने अरमान कहाँ से लाऊँ/


मिलन की झूठी तसल्लियाँ भी तू अब मुझे न दे,
जमाना बाद में भूल जाएगा, तुझे मेहरबाँ कहाँ से बनाऊँ/

तेरी तस्वीर तो सब जाहिरे- जमाना कर दूँ, गर चाहे,
तस्वीर के लिए अब इश्तहार कहाँ से लाऊँ/

जमाना था पहले भी मुद्दई, उसको क्या समझाऊँ,
तुझे मंजूर नहीं तो किस तरह तेरा फैसला सुनाऊँ/

जानता हूँ तू मान छोड़ कर फिर-फिर आवेगी,
तेरे साथ के लिए सब्रो- एहतियात कहाँ से लाऊँ/

कभी मेरे दिल का सुकूं थी तू हुस्न की मलिका,
सबके सामने तेरा हाथ पकड़ने की औकात कहाँ से लाऊँ/

मुतमईन हूँ, हुस्नवालों की तरफदारी जमाना करेगा,
अपनी वफा का तेरे सिवा कद्र दां कहाँ से लाऊँ/

उखड़ रही साँस अब तो भुला कर शिकवे आ जाओ,
दिल में घुमड़ रहे कैसे जज्बात तुझे कहाँ से बताऊँ/

तुझसे तो बिछड़ने का गम कुछ ज्यादा ही ' रतन ' को,
जनाजा तो जनाजा, तुरबत पर भी नआए, कैसे किसी की समझाऊँ//

                राजीव रत्नेश

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!