मेरे रंजो- गम को मेहमां करो तो सही ( गजल )
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हम तेरे साथ- साथ चलेंगे, अपनी जुल्फों का सायबां
करो तो सही/
मेरे रंजो- गम को अपना समझो, उन्हें अपना मेहमां
करो तो सही/
भ्रमर बन कर तुझसे मैं मिलूँ, तू कली बन कर रौशन
चमन तो करो,
मैं एहसास तुझे दर्दे- दिल का कराऊँ, तू इस्तकबाल
मेरा, पराग उड़ेल करो तो सही/
रिन्दों का रिन्द हूँ, भर-भर जाम मेरे पास लाओ तो सही,
मैं तेरी मदभरी आँखों से पहले पिऊँ, फिर अपने सामने पिलाओ तो सही/
पंख खोल आस्मान में, ऊँची उड़ान मैं लगा के जब लौटूँ,
तुम मुझसे श्वेतपरी बन कर साहिल- तट पर मिलो तो
सही/
मेरी कश्ती की पतवार तुम, दरिया पार का एकमात्र
मेरा सहारा हो,
जजीरे पर जा रैन- बसेरा करेंगे, चप्पू चला उस पार
पहुँचो तो सही/
मैं रिमझिम सावन बन कर, झमाझम यक लख्त बरस
तो जाऊँ,
तुम सब्जा का पैरहन पहन, किसी शजर से पहले लिपट जाओ तो सही/
प्यासी धरती की अगन, जब ठंडी हो जाएगी पूरी तरह यकीनन,
तुम समझो बागो- चमन तुझे बुलाएँगे, फल-फूल चुनो तो सही/
चंदा की बिन्दी, सितारों के झुमके, मांग में कहकशां,
नथ में रत्न जड़े हुए,
सब तुम्हारे लिए हैं, तुम अपना हुस्न पहले संभालो
तो सही/
तुम गुजरिया गाँव की, नित नया प्रयास करती हो मेरी
सुध-बुध भुलाने की,
तुम्हारे बिना नहीं मेरा गुजारा, चलो साथ मेरे, संभालो
पहले मेरे चौबारे तो सही/
मैं चलता चला आया हूँ सदियों से, तेरे गेसुओं के साये
के सहारे,
इस जन्म तो मिली हो" रतन" से, अगले जन्म का भरोसा दिलाओ तो सही//
राजीव रत्नेश
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इस जन्म की कश्ती तो साहिल पे लग ही जाएगी,
रतन की रूह तो हर जन्म चंदा को ही चाहेगी/
मौत की क्या बिसात, जो इस दास्तां को मिटा पाए,
रतन की रूह तो हर जन्म, चंदा की जमुना में मुस्कराए//
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