खुशबू से भरा तेरा आँगन ( गजल )
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पहले से जो तू बेमुरव्वत न होती/
गजल मेरी तुझ पर हमलावर न होती/
यकीन कर लो मेरी इस बात का,
जो तेरी मुझसे बगावत न होती/
कारस्तानी- ए- जंग का यह मायने नहीं,
सोचा तुमने जो, तुझसे अदावत न होती/
सलीम से मुहब्बत अनारकली न करती,
मयस्सर उसको हिरासत न होती/
आसमान में धनक की खूबसूरती न होती,
चमन में जब तक बरसात न होती/
साहिल पे पहुँच, मेरी कश्ती थम न जाती,
हाथ में जो ये मजबूत पतवार न होती/
तेरे हुस्न को क्या ही मैं निहारता,
आँख जो तेरी पहले ही अश्कबार न होती/
तेरी- मेरी मुहब्बत परवान न चढ़ती,
जोशे- जवानी न होती, छाती फौलाद न होती/
खुशबू से भरा तेरा आँगन न होता,
बादे- नसीम इतनी गर दिलदार न होती//
राजीव रत्नेश

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