बिहार में ४ और ७ नवंबर को दो चरणों में चुनाव होना है/ मेनिफेस्टो पहले INDIA का आया और फिर आज NDA का पर दोनों के वायदों में कोई खास अंतर नहीं है/
ऊँट के गले में बँधी घंटी तो बजेगी ही, भले ऊँट किसी करवट
बैठे/ SIR का पचड़ा अभी भी फँसा हुआ है/ चुनाव- आयोग में बिहार के साथ- साथ पूरे देश के मुख्य राज्यों में SIR की उद्घोषणा कर रखी
है/ पर इससे क्या सुप्रीम कोर्ट सहमत है अथवा चुनाव- आयोग सबको अनसुना कर अपनी ही हाँके जा रहा है/ विपक्ष ने फिर आस्तीनें चढ़ा ली हैं/ सपा के अखिलेश ने SIR के साथ ही पुरे देश में
जातीय- जनगणना के लिए बिगुल बजाया है/ हो सकता है निकट
भविष्य में उनकी यह माँग जायज मान ली जाए/ राजनीतिज्ञों का
मानना है कि इससे एक पंथ दो काज सिद्ध होंगे/
बिहार चुनाव का परिणाम देश की दशा और दिशा दोनों ही
तय करेगा/ अभी तक चुनाव- आयोग सुप्रीम- कोर्ट की अवमानना
करता आ रहा था/ बिहार में SIR का क्या हुआ, यह तो बिहार वाले
ही जानें/ चुनाव- आयोग की एक तो चोरी दूसरे सीनाजोरी/ सुप्रीम-
कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी० आर० गवई ने भी कल नये न्यायाधीश
को मुख्य न्यायाधीश बनाया है/ देखना ये है कि देशव्यापी SIR का
क्या बनता- बिगड़ता है/
यह मुकाबला दिलचस्प होगा कि महागठबंधन बाजी मारता
है कि NDA/ जब राहुल गाँधी ने बंगलोर के एक सेंटर का रिजल्ट इक्सप्लोर किया था लो अपना दाँव चलाने के चक्कर में सत्तापक्ष के अनुराग ठाकुर ने भी वोट चोरी की बात स्वीकार किया था/ इसी तारतम्य में अन्य कई राज्यों ने वोट- चोरी के सुबूत पेश किए थे पर मुख्य चुनाव आयुक्त..... हीला-हवाली करते हुए राहुल गाँधी से देश से
माफी माँगने और एफीडेविट देने की माँग कर दी थी/ ऐसे में राहुल गाँधी की बिहार पदयात्रा अब क्या रंग दिखाती है यह देखने लायक
होगा/
हाँलाकि दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है/
उपराष्ट्रपति के चुनाव में महगठबंधन के घटक दल ने क्रास- वोटिंग की
थी/ जिसका परिणाम हुआ कि सत्ता- पक्ष के प्रत्याशी ने थोड़े वोटों से बाजी मार ली थी/
मुझे याद पड़ रहा है कि जब मेंढ़कों की तस्करी हो रही थी तो जापानी मेढ़कों को बंद डिब्बे में रखा जा रहा था और हिन्दुस्तानी मेंढ़कों को खुले डब्बों में/ किसी ने कहा," भाई! ऐसे तो ये
भाग जाएँगे"/ तो एक बुजुर्ग ने बताया कि ये हिन्दूस्तानी मेंढ़क हैं---
एक भागेगा तो दूसरा उसका पैर पकड़ के वापस खींच लेगा/ मुझे
महागठबंधन में अंतर्विरोध का डर सता रहा है/ यह हिन्दुस्तान है और
यहाँ मीरजाफरों और जयचंदों की कमी नहीं है/ पर यह तो NDA में
भी हो सकता है/ दोनों तरफ हालत एक सी है/
एक ही शहर में अनजान तू अनजान मैं
ठहरने को एक रात को सराय ढूंढ़ते हैं
राजीव रत्नेश
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