Thursday, March 20, 2025

YOU SHOULD HAVE LOCATIONL YOURSELVES.

Try to be an good girl,even heard many times,
have location yourselves.

You shuld have location yourselves,of every ,
person came in your life and occured
 apprently in your own life and discovered,
irregularites in mind.
As you have location yourselves.
You are not so ginious,as your sister has.
Inspite of every case she solve very speadly instood.  
You have location yourselves,having beauty of city,
but  she has beauty of village as nomnated by you.
You  should have location yourselves.
She has always mobile in her hand,never kept ahed.
From her introductary face she is sharpend more .
As you shuld have location yourselves.

Behind you she never called you cunning ,
or miserous in your style.
She is very simple looked ,smart without,
Borolene or face powder,you should have location yourselves.
My shers or poems has got life ,inspite finding her.
As came into my life as situated stachu of Durga in temples,
about her joyfull face.
As you have location yourselves.
In my lifetime have ever not she found a strict kiss on  her lips.
As I worshipped her ever and not tried ever.
As you should have location yourselves.
Having started from your houseside by ever not counted you ,
such as my beloved or faithed ever upon her,
even had passed more time,she could not found me .
You should have location yourselves.
           
          RAJEEVA RATNESH
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Tuesday, March 11, 2025

TARANG HOLY KEE .

ज़िंदगी एक से बढ़ कर एक पहलवानों से पाला पड़ा ,

सबके मुकाबिल ,तेरा बाप ,बहुत बड़ा नंगा मिला। 

मैं चला डाल -डाल ,तो वो पात -पात सदा चला ,

मैंने की जोशखरोशी ,वो कोने में खिसक गया। 

नजरे -खैरात से ,तो न देखा कभी तुझको मैंने ,

सुर्खी मली तुमने गालों पे ,रंग उसका निखर गया। 

राहों में तूफ़ान आये ,जलजला आया और गया ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर पहलवानों से पाला पड़ा। 

समंदर से सीप ,बिछ गए किनारों पर ,हर तरफ ,

न मिली तेरे पावं की छाप किनारों पर। 

कितनी रंगरेलियाँ की थी तुमने यार के साथ ,

मेरे साथ तो रहे तुम ,बस एक पखवाड़े तक। 

मैं सदा तेरे आरिज़े -गुल से बावस्ता रहा  ऐ हसीं ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर पहलवानों से पाला पड़ा। 

कतरा -कतरा गरम लोहू ,टपका तेरी आँखों से ,

हो गयी नज़रों से ओझल  ,तू बातों ही बातों में। 

चमक न जुगनू में  ,पर आफ़ताब वो बन गया ,

ऐसी क्या झीनी -झीनी सी बात थी ,तेरे लिबासों में। 

तुम थे साहिल पे ,और समंदर फिर भी प्यासा रहा ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर एक ,पहलवानों  से पाला पड़ा। 

मुझसे मालिश करवा ले तू ,दिल के आस -पास हर कहीं ,

खूने -दिल ,लख्ते -जिगर का तूने किया व्यापर। 

न मदावा तेरे दर्द का ,नहीं दवा हकीमों के पास ,

तेवर सदा क्यों रहते तेरे ,जबीनों के साथ। 

अजनबी एक गैर ,लोगों से गाल बजाता फिरा ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर एक पहलवानों से पाला पड़ा। 

तीज भी मनाये ,करवा -चौथ भी ,ले ली साड़ी दो -चार ,

इतने में बन जाती कई ,तेरी पहली वाली सलवार। 

अब तो सूट के मौसम का भी महीना आया ,

करवाती है सबसे ,अजीज अब भी तुझे मनुहार। 

तेरे साथ हमने खिजां में भी खूब मज़ा लिया ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर एक पहलवानों से पाला पड़ा। 

कुछ लाल -पीली हो जाये तू होली के त्योहार में ,

हर कहीं चौका लगा दे तू ,भरे -पूरे बाजार में। 

अधजली होलिका से ,आग लगा दे अनार में ,

लोग ढूंढते फिरेंगे तुझे वक्ते -सदाबहार में। 

देखो मेरे हाथों से फिर तुमने पैमाना लिया ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर एक पहलवानों से पाला पड़ा। 

आज का चाँद भी बड़ा चमकीला है ,

रात के पैरहन में टंका सितारा है। 

हम तुझे तेरे ही खेल में ,तुझे मात दे जाते ,

जानते हैं ,मुक्कदर का गर्दिश में तारा है। 

नामुराद तेरा भाई ,दे फिर झाँसा गया 

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर एक पहलवानों से पाला पड़ा। 

बजते हैं नगाड़े ,ढ़ोलक पे पड़ती है थाप ,

गवनई में शामिल होते बूढ़े और बच्चों के बाप। 

भांग का दौर चलता ,हमारे शिवाले पर ,

हम भी मिल -बैठ जाते ,उस्तादों के साथ। 

फिर हाथों को मिल कन्नौजी नगाड़ा गया ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर एक पहलवानों से पाला पड़ा। 

जहाँ भी गए गाते -बजाते ,पेशे -खिदमत हुआ गुझिया का थाल ,

साथ में उड़े गुलाल ,रंगीन हुए गोरी के गाल। 

कुछ हमने खाया ,ढ़ेर सा औरों को खिलाया ,

हर नृत्य पर थिरके लोग ,पड़े मृदंग पर थाप। 

हमें पैंतरा बदल कर ,अपना दाँव आज़माना पड़ा ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर एक पहलवानों से पाला पड़ा। 

कान्हा आया ,गुलजार हुई डगर की गली -गली ,

राधा के बोझीले नयन ,खिल गयी कली -कली। 

पगडंडियों पर कुचले कनेर के फूल ,

भौरों ने सखियों के कानों में बातें कहीं भली -भली। 

'रतन 'को सब ओर से सुना और सुनाया गया ,

ज़िंदगी में एक से बढ़ कर एक पहलवानों से पाला पड़ा। 

            राजीव  रत्नेश 

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Monday, March 10, 2025

HO GAYEE DEEWALEE BHEE.

हर पल का मैं तो शायर हूँ ,हर पल का किस्सा याद जबानी है ,

तू मेरा अफसाना है ,मेरे पास हर पल की याद तेरी निशानी है। 

आ जाओ अहले-महफ़िल के मुकाबिल ,दिल सूना -सूना है ,

तेरी याद दरिया है ,मेरा प्यार समंदर ,तेरी निशानी है ,

आओ ये रात तुम्हारी है ,,चाल तेरी गजगामिनी सी है। 

चाल तेरी मस्त -मस्त ,मेरी तुझी से यारी है ,

सुबह की अल्ला खैर करे ,तेरी शाम सुहानी है ,

नखरे तेरे सालों -साल देखे ,अदा तेरी मस्तानी है। 

आ जा बज्म में ,आँचल में लिए नसीमे -सहर ,तू मेरी कहानी है ,

रौनके -बज्म तुझी से है ,शतरंजी चाल ,मौसम की मेहरबानी है 

आँखे पाई है गजालों की ,तू आखिर किसकी निशानी है। 

हम तेरे मयखाने में भी आएंगे ,जायेंगे दैरो -मस्जिद भी 

नक्श तेरे सुभान -अल्लाह ,चेहरा तेरा गुलाबी है ,

दे जाओ जो देना है तुझे ,मेरे पास तेरी एक ही निशानी है। 

आ जा मुह्हबती -नज़र ले के मेरे घर में ,याद तेरी कारस्तानी है ,

ले आ महफ़िल में ,तेरे पास 'रतन 'की जो आख़िरी निशानी है ,

हम मिलेंगे तुझसे ,कल ही होली के पहले मन गयी दीवाली है। 

               राजीव  रत्नेश  

Sunday, March 9, 2025

muhhabat kee dukan.

 Mere shahar me khul gai hai muhhabat kee dukan,

sabke matlab kee cheegen hain,her koi dukandar.

Abkee sawan me aa jao,to ho jaye beda paar,

chaltee hai galion me lahron beech nav.

Is par panee,us paar panee,beech me sove jogee,

Sare shahar me danka baaje,phir bhee na jage jogee.

Aisee hee hai haqeeqat mere shahar kee,

Har galee me chaltee hai nav,

Badh me doobne-doobne ko tha ,

Mera apna shahar ALLAHABAD.

Premgalee ka hall na pucho,har taraf machee pukaar.

Mere mohhalle me khul gai ,muhabbat kee nai dukaan.

Karte kya ishara ,tum na samjhoge,aane se tumhare,

Chal padee hamaree muhhabat kee dukaan.

Ek saudagar ek din aisa aaya,kisee ne dekha na suna,

Le ke hamko chala gaya nadiya ke paar,

shahar se tum pahunch gayee anjane-gaon.

Sangam-Nagree me khul chalee,

Meree muhhabat kee dukaan.

Kisee sawar ke baithne se me,

Mere badan me jhurjhuryhotee thee .

Us samay aisa hee tha kuch mera mizaz.

Ghass na dala kisee  ko ,

Meree ghass ,meree muhhabat kee dukaan.

Sawariya kee banshee bajee,usko diya thok,

Mohhalla chod kar bhag gaya,

chod kar meree muhhabat kee dukaan.

Kisee ka sath dena gar jarooree ho,

to soah-samajh ke hee dena uska sath.

abkee ek bar phir 'ratan' ne lee murlee ki taan,

Ho gayee galee gulzar,

Mere mohhalle,sahare-Allahabad me,

khul gai aala ek mohabbat kee dukan.

          RAJEEVA RATNESH.


MOHHABAT KEE DUKAAN.

खुर्शीद की जिया थी ,या माहताब की चाँदनी ,

अच्छा लगा तेरा बारात में धपर -धपर कर के नाचना। 

वो और होंगे ,तेरे गुनाहों पे परदा डाले रखा ,

कर देंगे हम तो फाश तेरा हर राजे -परदा। 

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वो जितना करीब आते हैं ,मोह्हबत दुगुनी होती जाती है ,

और करीब आते हैं तो मुह्हबत चौगुनी हो जाती है। 

क्या बताएं ,उन्हीं की हसरत दिल  को हो गयी है ,

जितना ही दर्द होता है ,हवा उतनी ही सुहानी लगती है। 

एक झलक दिखला के ,महबूब ने हमें लूट  लिया ,

हम तो कुछ न समझे ,बस होश ही खो दिया। 

जब तक हम संभलते ,वो आकर चले भी गए ,

दीवाना हमको कर गए ,और खुद भी दीवाने हो गए। 

हमहीं से मुह्हबत की थी ,हमीं को रुस्वा कर गए ,

उसकी जात का कोई ठिकाना नहीं ,कर हमको गरम गए। 

कब होश भुला कर ,उल्टा -सीधा सुना कर अड़ जाये ,

गिरफ़्ते -मुह्हबत भी कोई चीज होती है ,आज समझ आये। 

तो गफलत में ही जिंदगी गुज़ार कैसे जाएँ हम ,

कुछ समझ आये तो मुह्हबत ही जिंदगी समझ आये। 

तम्मनाओं का दिया हमेशा जलाहै ,जलता ही रहेगा ,

होश न उनको आये ,कब तक उनको  होश में लाते रहेंगे। 

हम समझते हैं मुह्हबत है तो खुदा भी है ,

खुदा है तो हमसे फिर जुदा क्यों है  . 

पास आये तो इस्तकबाल करूँ उसका ,

एक बार बताये तो ,महबूब मेरा खफा क्यों है। 

तसवीर दिल में बसी है ,खुद आ जाये ,उसकी ज़रुरत भी है ,

आँखें हिरनी की ,गोरे गाल ,सलोनी नाक खूबसूरत भी है। 

अब न दूर जाओ ,हमारे करीब भी तो आओ ,

'रतन 'की मुह्हबत तो बस तेरे नाम से है। 

           राजीव रत्नेश 

 

PYAR KEE MANJIL HOTEE HAI.

अब तुम मेरे पास ही रहना ,देखा -देखी ही प्यार की मंजिल होती है ,

हम -तुम मिल जायेंगे तो ,एक अलग दुनिया तामील होती है। 

निशाना नज़रों का चला तो सीधे दिल पे आया ,

दिल को बड़ी तस्कीन होती है। 

आ जाओ मेरे दिल के पास ,पास आने से ,

मिलन तक़सीम होती है। 

मेरे पास आओ ,मंज़िल यूँ हर तरह नदीम होती  है ,

तुम करीब आओ न आओ ,मंज़िल मेरे नज़दीक होती है। 

मेरे अफ़साने में गैर कोई आएगा नहीं ,

तुम्हीं से खुदा -हाफीज़ होती है। 

तेरी इज़्ज़तो -आफ़ताब का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं ,

अब कहीं और न जाओ ,रिश्ता -ए मोह्हबत दिल से तक़लीम होती है। 

पास आ जाओ अब तो 'रतन 'देखा -देखी ही प्यार की मंजिल होती है। 

        -------राजीव रत्नेश ---------- 

KUCH SUNNA GANWARA N HUA

सीना  जबसे  उभार  पे  आया , हिप और  अंदर घुस गयी। 

नाक में नथ  आ  गयी ,तेरे  हुस्नो -इश्क़  की  ऐसी -तैसी। 

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कुछ सुनना गँवारा न हुआ ,तेरे वालिदैन को ,

तुम पर हुक्मे -जबानबंदी लगाने के बाद। 

बिना बात मुँह फेर लेना ,एक अदा से ,

शायरों का कुछ तो समझ लेते मिज़ाज। 

उतारा न कभी खुद को आईने में तुमने ,

तेरी जुबान पर बेहतर मुस्सविर थे हमीं। 

हमको भी आता है ,जज्बातों पे ब्रेक लगाना ,

बहते पानी में ब्रेक लगा के तुमने  बड़ा तीर मारा। 

फिर से आऊँगा महफ़िल में ,तसल्ली रखो ,

पिछली बार तो कुछ न कहा ,अबकी मुँह खोलना। 

अता तुमको दिल किया ,ईमानो -जां भी कर देते ,

पर तू तो बहुत बड़ा वाला बेवफा निकला। 

बैंड -बाजे  हांफ गए ,शहनाइयां भी खामोश हुईं ,

मेरे घर से निकली बारात किसी और के घर पहुँची। 

सागर में था रंगीन पानी ,कैसे रखते कायम होश ,

'रतन 'ने न बिजलिओं पर दावा किया ,न हक़ दिखाया अपना। 

------     ------राजीव रत्नेश ----------- 

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