कमाल तो तब है, जाने के बाद भी गूंजता रहे सन्नाटा/
Wednesday, May 6, 2026
दोबोल बोल दे साकी ( कविता)
दो बोल बोल दे साकी ( कविता)
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दिल आज बहुत उदास है मेरी साकी!
तेरी महफिल में आज आखिरी रात है साकी!
तेरी बज्म छोड़ कल मुझे जाना होगा,
आज तो लबों से दो प्यार के बोल बोल साकी!
अब जाने किधर होगी अपनी राह साकी!
न मंजिल का पता है, न कोई ठिकाना साकी!
आज आखिरी बार जामे- नजर पिला तो दे,
अपनी किस्मत में कोई कल का भरोसा नहीं/
किसी और मयखाने में वो लज्जत नहीं साकी!
जो चढ़ा सकूँ तेरी आगोश में सर रख के ही/
अब न वो पहलू मिलेगा, न फिर मरमरी बाहें,
आज तो लबों से प्यार के दो बोल बोल साकी!
तेरे मयखाने में रिन्द हैं बड़े- बड़े,
पर उनको भी मुफ्त यहाँ कभी मिलती नहीं/
मैं सिलसिलेवार पीता था, रखता था हिसाब नहीं,
दिल कहे तो लबों से प्यार के दो बोल बोल साकी!
गिरफ्तारे- मुहब्बत हूँ तेरा, महफिल भी तेरी,
हम सुखनवर तेरे, मजलिस भी तेरी/
नजर से ही पैमाना तक पी जाते हैं,
तुझे तो मालूम है हकीकत मेरी/
नजरें मेरी पाबन्द हैं, तेरे नजारे से भी,
आजा ढ़लती रात में ही, इशारे पे ही सही/
दिल अता किया था, जां भी कुर्बान कर देंगे,
दिल कहे तो लबों से प्यार के दो बोल बोल साकी!
मेरे जाने की खबर से तू क्यूँ उदास है साकी!
दिलबर और तुझे मिल जाएँगे, मैकदा न होगा खाली/
आज मेरे लबों की लाली, अपने लबों पे समेट ले,
कल और कौन होगा, जो करेगा तुझसे मुहब्बत साकी
देख अब तू और किनारा मुझ से न कर,
मैं ही निकालूँगा तुझे सुरूर के दरिया से/
अपना फसाना तुझी से तरन्नुम में सुनूँगा,
एक बार प्यार से दो बोल गुनगुना दे साकी!
जिधर तेरी जुल्फों की छाँव न होगी,
उधर ही अब मेरी राह होगी साकी!
चलना होगा काँटों भरी डगर पर,
मंजिल भी कोई मेरे पास न होगी/
जमाना तो मुद्दई- ए- मुहब्बत सदा रहा है,
यही सोच तुझसे अब जुदा हो रहा हूँ/
महफिल मेरे सिवा ही करना आबाद,
चलते-चलते प्यार के दो बोल बोल दे साकी!
राजीव रत्नेश
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जो शैतान की नानी थी ( शेर)
जिसे बीमारी कहा, वही जीने का सहारा निकली/
वोजो शैतान की नानी थी, वही यादों का किनारा निकली//
यही तो बस कमजोरी है ( कविता)
यही तो बस कमजोरी है ( कविता)
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ले दे के यही तो बस कमजोरी है/
औरत खुद ही बड़ी बीमारी है/
एक तो मेरे शेरो- सुखन की चोरी,
ऊपर से पूरी सीनाजोरी है/
कभी की थी डाकेजनी मेरे घर,
उसकी याद आजकल टीस दे जाती है/
और कुछ भले वो चाहे न चाहे,
पर यादों के अक्स चुरा अलग हो जाती है/
मेरी एक- एक गजल के लिए,
कितनों से कितनी मारामारी है/
दिल पर छाया यास का नक्शा,
याददाश्त भी मेरी मारी जाती है/
चमन के बूटे- बूटे गुनगुनाते उसकी गजल,
हर गुल में थिरकन है, उसकी याद सुहानी है/
कभी तो उसकी पाजेब रुनझुनाती है,
वो कुछ और नहीं, मेरी अनकही कहानी है/
मगरुरे- फन उसका देखा, हातिम की दादागीरी है,
बात-बात पर लुटाती मोहर, थैली होती न खाली है/
दिलफरेब मंजर उसी का समझते रहे,
अब पता लगा वो शैतान की नानी है/
बदन उसका गुलबदन की नौबत बाजे,
पलकों पे ख्वाब सुनहरे, आँख नशीली है/
गाजे-बाजे की धूम में, ये भी भूल गई,
कब की हो चुकी उसकी माँग सिन्दूरी है/
हम खुद उससे नाता तोड़ नहीं सकते,
यही तो अपने दिल की मजबूरी है/
हम लाख चाहें, भूल जाना दुनियादारी,
पर वह भी नंबर एक की हठीली है/
चुराना आँख का काजल चाहें,
सामने आने में भी कतराती है/
ले दे के यही तो बस कमजोरी है,
औरत खुद में एक बड़ी बीमारी है//
राजीव रत्नेश
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मेरे मर्ज की दवा वही हैं ( शेर)
एक गीत गुनगुनाना चाहता हूँ/
ख्यालों में उन्हें बुलाना चाहता हूँ/
मेरे मर्ज की बस दवा वही हैं,
यही बात बस उन्हें समझाना चाहता हूँ/
बातें करूँ या क्या करूँ? ( शेर)
नींद आँखों से कोसों दूर है/
हाथ भर के फासले पर हुजूर हैं/
बातें करूँ या क्या करूँ, समझ न आए,
हम तो तैयार, पर मुहब्बत मजबूर है/
उसी अदद नाक के सहारे ( शेर)
उसी नाक के सरमाये में ही तो जिंदगी कट रही है,
अच्छे-खासे हैं, भले हैं साथ में इबादतो- बंदगी चल रही है/
खुद मस्त हैं, दिल भी उछलता, मचलता, कूदता रहता है,
उसी अदद नाक के सहारे, दिल की दिल्लगी भी चल रही है//
राजीव रत्नेश
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