Sunday, July 19, 2026

बस उसे जमाने की नजरों से ( गजल )

बस उसे जमाने की नजरों से  ( गजल )
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उसे देखा, उसे चाहा, अपना दर्द उससे बताया था/
हर खुशी और गम में उसे कलेजे से लगाया था/

बावफा कभी बन कर न रहा वो मेरे साथ- साथ,
महफिल में बेमतलब का ही तूफान उठाया था/

कितना गुरुर था उसको अपने चेहरा- ए- खास पर,
बड़ी मुश्किल से मुझे मुखड़ा अपना दिखाया था/

दिलजलों के हुजूम में वो खुद भी शामिल था,
अपने आप को सबसे अलहदा दिखाया था/

अंदेशा पहले से था कि बेवफाई भरी नस-नस में है,
खुद से न उसने, कभी प्यार का इज़हार किया था/

शोख थे नजारे, शबाब पे थी उसकी महफिल,
मुझे भरमाने को, जानबूझ कर जाम छलकाया था/

तक़दीर का सिकन्दर वो था, जहाँ तक जान पाया,
निशाना उसका खाली जाता, जो नजरों पे न बिठाया होता/

चूक उससे हुई या मुझसे ही हुई, नामालूम,
पहल उसने की, इरादा प्यार का जताया था/

उसे अपना समझ कर ही दिल की मलिका बनाया था,
जब- जब वो रूठा, सारी- सारी रात उसे मनाया था/

मेरी ही गजल गैर ने उसके सामने सुनाया था,
भरी महफिल से उसे खुद मैंने ही उठाया था/

कुछ दिनों तक वो बिल्कुल खामोश- चुपचाप रहा,
काफी दिन गए तक, मुझे नखरा दिखाया था/

मुझे ही चाहता था, बात-बात पे मुझे सुनाता था,
अजाबे- मुहब्बत, इसरार में उसके मैंने पाया था/

डोरे- ताबीज के भुलावे में वह सदा रहा,
खुद गया तो गया, मुझे भी साथ में बुलाया था/

यार से दूरी बना कर वह खुद कुछ यूँ रहा,
मुगालते में मुझे रखा, किस तरह फुसलाया था/

एहतिराम- ए- मुहब्वत उसका समझ न पाया था,
' दूर के ढोल होते सुहाने ', मुझे उसने बताया था/

उंगलिया न उठाने पाए कोई उसके इश्क पर,
एक गुलाब रोज, मेरे लिए माली से मँगाया था/

साहिल पे गया था, मेरी कश्ती पे सवार होने,
उसे शायद सिर्फ मेरी पतवार का सहारा था/

कश्ती मेरी ले जा, पतवार भी साथ लेता जा,
पहले भी मुझे कभी न समंदर का आसरा था/

मशविरे जरूर लेता रहा मुझसे, अदब के साथ,
पुरव्ता फैसला अपना उसने पहले से बनाया था/

अहसासात को मेरे अल्फाज देता था मगर,
अपने दिल का एक भी पर्दा न उठाया था/

क्या जरूरत थी, सभी रिश्तों का ह्वाला देना,
काम निकल गया तो उसने मुझे भुलाया था/

कैसे रहता उसपे आखिर एतबार भी अपना,
मेरे पीछे उसने अपने यार को लगाया था/

वक्त है कि अब तो उस किताब- ए- दोस्ती को बंद करूँ,
हर सफहा उसने अपने नाम लिखवाया था/

कितनी तवील सजा पाया उसने भी इंतजार का,
बावस्ता मुझसे जबकि उसका हर फसाना था/

आगे कुँआ, पीछे खाई समझ उसे आगाह किया था,
कितना गम सीने में आखिर उसने छिपाया था/

मजबूर न था ' रतन ', उसकी मुहब्बत के लिए,
बस उसे जमाने की नजरों से बचाया था/

                राजीव रत्नेश
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गमे- दिल की बात है, रहे- आम तक न पहुँचे/
तेरी - मेरी बात है, सरे- दरबार तक न पहुँचे/
मेरी बेदिली की तुझे, कानो- कान खबर न हो,
किसी हाल ये बात तेरे बाप तक न पहुँचे//

                  राजीव रत्नेश
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Saturday, July 18, 2026

अशआर

(१) मेरी नदामत उसकी पलकों पे सजी थी,
उसने चेहरा भी अपना छुपाया था/
     उसके चेहरे पर गमगीनी छलक रही थी,!
हाले- दिल मैंने मैंने उसको सुनाया था//

(२) मिला मौका तोआप से आदाब बजा लिया/
       इसी बहाने हमने दुनियादारी निभ दिया/

(३ ) गमे- दिल की बात है, रहे- आम तक न पहुंचे/
       तेरी मेरी बात है, सरे- दरबार तक न पहुंचे/
       मेरी मुफलिसी की तुझे कानो- कान खबर न हो,
       किसी हाल ये बात तेरे बाप तक तक न पहुँचे//

(४ ) असली प्यार के लिए बेमोल बिकता हूँ,
       मगर कोई मेरा खरीदार नहीं मिलता/
       लुटा दूँ अपनी गजलें उसके नाम पर,
       ऐसा मेरी जिंदगी में किरदार नहीं मिलता//

(५ ) हाले- दिल उसको सुनाया, वो पशेमां- सा रहा,
       मातमी चेहरा भी उसने बनाया कुछ देर तक/
       मेरी तर्ज- ए- बयानी पर मगर ऐ दोस्त!
       भीतर ही भीतर बहुत मुस्कराया कुछ देर तक//

                    राजीव रत्नेश
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Thursday, July 16, 2026

मैं तुझे पहले से पहचानता था ( गजल )

मैं तुझे पहले से पहचानता था  ( गजल )
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मुझे जब तेरी याद आई तो बेतरह आई/
तुझसे मिला तो कहा, आमी तोमाके भालो बासी/

तुझे मुबारक हो तेरी भावना, तेरे विचार,
मौके पर तुझे न ठुकराता, तो तू मुझे ठुकरा देती/

मेरी गुमशुदगी में तेरे बाप का पूरा हाथ था,
भूल न पाया कभी तेरी वो आँखें कजरारी/

कुन्तल थे तेरे कमर पे बल खाते हुए,
झील में लटका के बैठी पाँव, लाल हुआ पानी/

हाले- दिल जो मैं कुछ पहले बयाँ कर देता,
तो होती मेरी तरफ से यह बड़ी नादानी/

तुझे तो मैं मौके पर मौका दे रहा था,
ताकि समेट ले जज्बात, भूल जा सारी कहानी/

दूर तुझे अपने से खुद ही जान-बूझ कर किया,
प्रीत के मामले में थीं तुम आधी खिली कली/

तेरा साथ मुझे कभी चैन नहीं दे सकता था,
भले तुझ पर आई हो झकझोर जवानी/

गुलाबी रंग तेरे गालों पर मला जरूर था,
दुनिया को दिखाने, कि तू मेरी प्रीत पुरानी/

नहीं चाहिए था मुझे तेरा साथ, तेरा हाथ,
नहीं चाहा तेरे बाप का साथ, तू नंबर एक सयानी/

अपने - मेरे संबंध के बीच भाई को लाई थी,
वह भी चाहता था पाटना, तेरे मेरे बीच की खाई/

तुझे सालों का अन्तराल दिया था, समझ-बूझ ले,
तेरी चाहत थी मुझे पाने की, पर मेरी मजबूरी थी/

मैं जानता था, इक दिन तू बेवफा बन के रहेगी,
तू वफा नहीं जानती, न थी साथ निभाने वाली/

तेरा इरादा जानता था, फिर भी पूछा तुझसे,
' क्या हुआ तुमको मुझसे प्यार जनाबे- आली '/

तुमने कहा भइया से मिलिए, दिल में गर कुछ है,
मैं जानता था तेरी बगिया का वही था माली/

तुम भूल गई प्यार- प्यार में खुद का गाना गाना,
' रह न जाए तेरी मेरी बात, रात की तरह आधी '/

मैं जानता था तेरा जवाब, खुद कुफ्ले- लब न खुलेगा,
बहाना तलाश कर अपने भाई से कुबूलवाएगी/

तुम्हारे मइया को दलाल के रूप में आना नापसंद था मुझे,
वह भी जानता था, मैं तुझे भूल नहीं सकता, न ही तू भूल सकती है/

मुझसे पूछा तो उसे सुझा दिया, ये रिश्ता जो तोड़ना चाहे,
तो आउट आफ साइट, आउट आफ माइंड होता, उसे बताया/

और ऐसा ही किया गया, मुझे अँधेरे में रख कर,
तुझे परदेश, शादी के बंधन में बाँध खाना किया/

और मैं भँवरों की तरह तेरे बाग के फूलों पे भ्रमरता,
तेरे ही चमन में मँडराता मारा-मारा फिरा करता हूँ/

मैंने तुझसे मिलने की कोई जरूरत समझी ही नहीं,
तुझ पर अपना कोई हक न जताया जान-बूझ कर ही/

तू सोचती होगी, पहले भी तो इजहारे- तमन्ना कर सकता था,
पहले तेरा दीवाना कोई और भी था, मैं कैसे टाँग फँसा
सकता था/

तुझे जान कर पहले ही तेरी आदत जानता था ' रतन ',
तुझे पहचानता था, तू मेरा साथ नहीं दे सकती थी/

                   राजीव रत्नेश
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तुझे मुझको भूलने में पल भर न लगा/
तुझको भूलने में मुझे एक जमाना लगा//

                     राजीव रत्नेश
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Tuesday, July 14, 2026

अभी तक तो तेरी हवेली की ( गजल )

अभी तक तो तेरी हवेली की  ( गजल )
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तू साज है मैं तेरी आवाज हूँ/
तेरे लिए मैं एक जज्ब- ए- खास हूँ/

अंदाजे- महफिल हूँ, माहौले- जश्न हूँ,
साकी के लिए मैं मुरादे- खास हूँ/

तिश्ना- लब हूँ, मुझे तो तेरी ही प्यास है,
आजा पास, तेरे बिना उदास ये रात है/

दिल की आवाज हूँ, दर्दे- खास हूँ,
तू क्यूँ हैरान है, मैं तेरा सब्रे- खास हूँ/

दिल वालों की महफिल में आ गया हूँ,
उमड़ते दिल के दर्दों का अहसास हूँ/

गौरे- तमन्ना हूँ, तेरी मजलिस की बात है,
तेरी हर मतलबे- खास में तेरी ही बात हूँ/

मोहब्बत की कहूँ कि नफरतों की कहूँ,
अपने से जुदा, अपने ही दिल का दाग हूँ/

हैरान हूँ, पशेमान हूँ, क्या बात तुझ में खास है,
नदामत के हैं पलकों में आँसू, लर्जा हर आवाज है/

मुहब्बत की बातों से नावाकिफ था अभी तक,
वैसे तो मैं राँझे, महीवाल से ज्यादे परीशान हूँ/

किस गली में लाई ' रतन ' को ये मुहब्बत भी,
अभी तक तो तेरी हवेली की हसीं शाम हूँ/

           राजीव रत्नेश
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उसका भरोसा मत करना ( गजल )

उसका भरोसा मत करना  ( गजल )
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दिल वालों से फरेब के सिवा कुछ नहीं मिलता/
इसीलिए खिलौनों से ही दिल बहलाया करता/

नजदीकी यार- दोस्तों से बात करते सहमा रहता,
जाने कौन सा फरेब नहीं उनके जेहन में समाया रहता/

मुहब्बत की तजरबेकारियाँ कुछ काम नआई,
उनकी मुहब्बत में तो गम का ही सरमाया रहता/

कहाँ तक कहूँ उनकी दरियादिली- ए- फरेब,
हर बार कुछ न कुछ गुल नया नया ही 
दिल तो खिलौनों से भी बहल जाया करता/

खुद मुहब्बत ने भी इसी बात की तसदीक की,
जिसके दिल न हो, वो किसी को फरेब नहीं दिया करता/

उसकी अँगड़ाइयों में मुझे तो फरेब का साया नजर आता,
इसी तरह वो मुझे तड़पा-तड़पा कर आजमाया करता/

जानता- समझता हूँ कि दिलफरेब सायों से तस्कीन नहीं होगी,
असल के खिलौनों से अब तो दिल नहीं बहलाया करता/

उसकी आँखों के काजल के साथ गाल पे बह लेता हूँ,
वह कौन सा काजल लगाता है, बतलाया नहीं करता/

मुहब्बत की रानाइयाँ, मुझे तो लगती हैं ऊल-जुलूल,
कौन सी बात है, जो वो मुझसे छिपाया नहीं करता/

मेहमानों के आने पर खातिर-तवाजह वो करता है,
बाजार से क्या सामान मँगवाया है, बताया नहीं करता/

मैं भी कहाँ उसके चारे में आकर अटक गया,
कांटे में क्या फँसाया था, मुझे पता नही चलता/

मेरी आबाद- मुहब्बत का बस इतना ही फसाना है,
सिमटे तो दिले- आशिक, फैले तो जमाना नहीं बनता/

मुहब्बत की बारीकियों से खुद उलझा- सुलझा किया,
फरेब जान कर भी उससे करते किनारा नहीं बनता/

अलमस्त जवानी चंदा की, शेरो- सुखन मेरे उसके नाम,
मेरी हिकायतों में उसको किसी किरदार का आसरा नहीं रहता/

बातें उसकी यकीनन शीरीं, लहजा खालिस हिन्दुस्तानी,
उसके होंठों पर अपने होंठ रखे, मुझे चाशनी का मजा
नहीं मिलता/

गरज अपनी अब तो तू भी समेट ही ले ' रतन ',
उसका भरोसा मत करना, वो किसी कायदे का वायदा
नहीं करता/

            राजीव रत्नेश
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इश्क भी कैसी अजब इबादत है ( गजल )

गमे- फिराक में कुछ इस तरह उलझा कि नया फसाना नहीं मिलता/
जिसे अपना कह सकूँ, ऐसा प्यार का कोई मुझे तोहफा नहीं भिलता/

असली प्यार के लिए बेमोल हूँ, मगर कोई मेरा खरीदार नहीं मिलता,
लुटा दूँ अपनी गजलें उसके नाम पे, ऐसा कोई किरदार नहीं मिलता/

हर इक मोड़ पर तेरी यादों का धुआँ- सा फैल गया लगता है,
इस दिल को अब कहीं सुकूँ का कोई बहता दरिया नहीं मिलता/

लोग कहा करते हैं कि वक्त हर गहरे जख्म को भी भर देता है,
मगर तेरे वायदे के बावजूद कोई ऐसा मेहरबां नहीं मिलता/

रात भर चंदा से तेरी ही बाते करता, तेरी हिकायतें सुना करता हूँ,
सुबह होते ही मुझे आसमानी सितारों का कोई कारवां नहीं मिलता/

हमने हर दर्द को हँस कर, सीने से भींच कर दिल में उतार लिया,
फिर भी दिल को जीने का कोई मुकम्मल तरीका नहीं मिलता/

सारी रात खवाबों में अक्सर तू मेरा साथ ही तो रहा करती है,
मगर क्या बात है, सुबह होते ही तेरा पता- ठिकाना नहीं मिलता/

तेरी हँसती हुई हसीन आखों की कोरों में, ये शबनमी अश्क कैसे हैं,
रात भर मेरी तरह क्या तू भी सो ना सकी, मुझे कोई सलीका नहीं मिलता/

सँभाल- संभाल कर हमने रख छोड़े थे सारा असबाबे- जमाना,
फिर भी ऐन मौके पर तेरे बचपन की गुड़िया का वो बक्सा नहीं मिलता/

' रतन ' ये इश्क भी कैसी अजब, कैसी गजब इबादत हुआ करती है,
जिसको चाहो उसी से मुझे तो दिल का अधूरा फलसफा मिलता है//

                      राजीव रत्नेश
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अपने फन को सलामत ही रखना ( गजल )

अपने फन को सलामत ही रख  ( गजल )
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दिल में शूल है, लब पे उसूल है/
यही जिंदगी का अजब दस्तूर है/

दर्द को हमने हँस कर कबूल किया,
यही इश्क का शायद पहला उसूल है/

जिसे अपना समझा, वही दूर हो गया,
इश्क का फैसला कितना मुश्किल है/

हर एक मुस्कराहट के पीछे छिपा,
किसी बेबसी का ही एक शूल है/

न शिकवा किया, न गिला ही किया,
यही दिल का सदियों पुराना वसूल है/

धूप कितनी भी हो, सिर नहीं झुकता,
मेरे किरदार का यही तो नूर है/

जख्म गहरे मिले, मुस्करा भी दिए,
दर्द से दोस्ती ही अब तो दस्तूर है/

राह काँटों भरी थी, चला भी वही,
जिसके सीने में जीने का सुरूर है/

दिल को बेचूँ तो आसां हो जिंदगी,
पर लब पे अब भी उसूल है/

कल से चंदा अजब पशो- पेश नें है,
क्या कहा उसने कि मेरे माथे पे शिकन है/

' रतन ' अपने फन को सलामत ही रखना,
यही दौलत है, बाकी तो सब फिजूल है//

         राजीव रत्नेश
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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!