मैं तुझे पहले से पहचानता था ( गजल )
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मुझे जब तेरी याद आई तो बेतरह आई/
तुझसे मिला तो कहा, आमी तोमाके भालो बासी/
तुझे मुबारक हो तेरी भावना, तेरे विचार,
मौके पर तुझे न ठुकराता, तो तू मुझे ठुकरा देती/
मेरी गुमशुदगी में तेरे बाप का पूरा हाथ था,
भूल न पाया कभी तेरी वो आँखें कजरारी/
कुन्तल थे तेरे कमर पे बल खाते हुए,
झील में लटका के बैठी पाँव, लाल हुआ पानी/
हाले- दिल जो मैं कुछ पहले बयाँ कर देता,
तो होती मेरी तरफ से यह बड़ी नादानी/
तुझे तो मैं मौके पर मौका दे रहा था,
ताकि समेट ले जज्बात, भूल जा सारी कहानी/
दूर तुझे अपने से खुद ही जान-बूझ कर किया,
प्रीत के मामले में थीं तुम आधी खिली कली/
तेरा साथ मुझे कभी चैन नहीं दे सकता था,
भले तुझ पर आई हो झकझोर जवानी/
गुलाबी रंग तेरे गालों पर मला जरूर था,
दुनिया को दिखाने, कि तू मेरी प्रीत पुरानी/
नहीं चाहिए था मुझे तेरा साथ, तेरा हाथ,
नहीं चाहा तेरे बाप का साथ, तू नंबर एक सयानी/
अपने - मेरे संबंध के बीच भाई को लाई थी,
वह भी चाहता था पाटना, तेरे मेरे बीच की खाई/
तुझे सालों का अन्तराल दिया था, समझ-बूझ ले,
तेरी चाहत थी मुझे पाने की, पर मेरी मजबूरी थी/
मैं जानता था, इक दिन तू बेवफा बन के रहेगी,
तू वफा नहीं जानती, न थी साथ निभाने वाली/
तेरा इरादा जानता था, फिर भी पूछा तुझसे,
' क्या हुआ तुमको मुझसे प्यार जनाबे- आली '/
तुमने कहा भइया से मिलिए, दिल में गर कुछ है,
मैं जानता था तेरी बगिया का वही था माली/
तुम भूल गई प्यार- प्यार में खुद का गाना गाना,
' रह न जाए तेरी मेरी बात, रात की तरह आधी '/
मैं जानता था तेरा जवाब, खुद कुफ्ले- लब न खुलेगा,
बहाना तलाश कर अपने भाई से कुबूलवाएगी/
तुम्हारे मइया को दलाल के रूप में आना नापसंद था मुझे,
वह भी जानता था, मैं तुझे भूल नहीं सकता, न ही तू भूल सकती है/
मुझसे पूछा तो उसे सुझा दिया, ये रिश्ता जो तोड़ना चाहे,
तो आउट आफ साइट, आउट आफ माइंड होता, उसे बताया/
और ऐसा ही किया गया, मुझे अँधेरे में रख कर,
तुझे परदेश, शादी के बंधन में बाँध खाना किया/
और मैं भँवरों की तरह तेरे बाग के फूलों पे भ्रमरता,
तेरे ही चमन में मँडराता मारा-मारा फिरा करता हूँ/
मैंने तुझसे मिलने की कोई जरूरत समझी ही नहीं,
तुझ पर अपना कोई हक न जताया जान-बूझ कर ही/
तू सोचती होगी, पहले भी तो इजहारे- तमन्ना कर सकता था,
पहले तेरा दीवाना कोई और भी था, मैं कैसे टाँग फँसा
सकता था/
तुझे जान कर पहले ही तेरी आदत जानता था ' रतन ',
तुझे पहचानता था, तू मेरा साथ नहीं दे सकती थी/
राजीव रत्नेश
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तुझे मुझको भूलने में पल भर न लगा/
तुझको भूलने में मुझे एक जमाना लगा//
राजीव रत्नेश
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