Tuesday, January 6, 2026

नया साल मुबारक हो!!! ( कविता)


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ऐ मेरी भोली और मासूम सनम,
नया साल मुबारक हो,
ये सुब्ह की लाली, ये मौजें ,
नयी सुब्ह मुबारक हो/

हर लम्हा चैन से बीते,
न रहे तू कभी उदास,
तेरा हर गम बाँट लूँगा मैं,
मेरी हर खुशी तुझे मुबारक हो/

प्रसन्नता का पारावार नहीं,
सुब्ह लगती है सावन की,
तेरी खिड़की नजर आती है मुझे,
नई नवेली दुल्हन सी/

मौजों का ठिकाना न पूछो,
खुशियों का आलम न पूछो,
हर घड़ी मुझे लगती है तुझसे,
मिलन की रातों सी/

जीवन मिले तुझे, 
खुशियों के गीत मिलें तुझे,
मेरे दिल के अत्युत्तम भावों,
का गुलदस्ता मुबारक हो/

ये सुब्ह ये शाम, ये रात ये सितारे,
सभी रौशन तेरा जीवन करें,
ऐ मेरी भोली और मासूम सनम,
नया साल मुबारक हो/

नई सुब्ह को कितने अहसास,
दिल में मेरे उपजे हैं,
जिनको मैंने दिल से चाहा,
वो ही मेरे अपने सपने हैं/

चाहता हूँ आज तुझसे मिलन,
की घड़ी में शम्मअ भी जले,
कर सकूँ मैं पूरी वो बातें,
तुमसे जो मुझे कहने हैं/

मेरे दिल में तमन्नाओं का दीप,
जलता रहे हमेशा,
हर साहिल हो तेरा, सागरे- उल्फत,
की हर मौज मुबारक हो/

ये" रत्न" भी तेरा, मेरे गीत की,
हर कड़ी तुझे मुबारक हो,
ऐ मेरी भोली और मासूम सनम,
तुझे नया साल मुबारक हो//
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       अशआर
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तुम्हारा चेहरा बना सकता हूँ मैं बड़ी आसानी से,
पर बोर्ड पर की फीगर नहीं बन पाएगी/
तुम्हारी हर हरकतें, हर राज पढ़ लूँगा मैं,
पर' सर' की बताई थ्यूरी समझ नहीं आएगी/
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तेरा चेहरा हसीं गुलाब है,
आँख तेरी लबरेज शराब है/
' सर' के सवाल का जवाब क्या?
तेरी नीची निगाह में हर जवाब है/
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पंखे की हवा से उड़ती हैं जुल्फें तुम्हारी,
कभी- कभी बंद हो जाती हैं पलकें तुम्हरी/
मैं नजर उठा कर देखता हूँ अपलक जब,
शोख हो जाती हैं और भी अदाएँ तुम्हारी//

             राजीव' ख्नेश'
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