Tuesday, January 6, 2026

पूछते हैं तुमसे!!! ( कविता)


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पूछते हैं तुमसे जो दिल
धड़कता है क्यूँ तुम्हारा बार- बार/
शरमा के पलकों की चिलमन
गिरा घायल क्यूँ कर देते बार- बार//

जफाई तो न देखी थी, तेरी कभी,
वह हमने देखी आज/
पी लेने से मदहोश जो हूँ,
तड़पती क्यूँ बिजली सी बार- बार//

गुनाह हजारों की तू है,
बंदानवाजों का और कत्ल न कर/
साबित हो अपराध तुम्हारा,
तुम पर कोई, खुदारा न हो//

चाहते नहीं कातिल करार देना तुम्हें,
भले कत्ल हुए बैठे हैं/
जल्वागर भी तुम्हें नहीं कहना है,
भले बेहोश हुए बैठे हैं//

मयखाने में तेरे फिसलनदार
गलीचों पे पायल की छमछम/
बिन पिए हो जाते हैं मदहोश,
दीवाने सुन कंगन की खनखन//

तीर नजरों का चलता है कैसे?
तेरी आँखों में भरे अफसाने/
हस्ती की इन राहों में अलगाव
अखरता है तेरा अपने को//

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   अशआर
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तुम तो न कहो जालिम,
मुझे शराब पीने के लिए/
नजरों का जाम पिया है,
ये क्या चीज है पीने के लिए//
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मेरी दोस्ती इतनी आसां नहीं यारों,
मैं पतझड़ हूँ, समझ लो ऐ बहारों/
न किसी के लिए तड़पता हूँ, न मरता हूँ,
खुद अपना सहारा हूँ, समझ लो ऐ सहारों//
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अजी इसको कहते हैं शायरी,
इसको कहते हैं दिमाग/
शायर की बात न पूछो,
काँटे को बना देते हैं गुलाब//
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मैं एक प्यार भरा नगमा गुनगुनाना चाहता हूँ,
तुम्हें ऐ जाने- तमन्ना, मैं अपनी बनाना चाहता हूँ/
तुम दिलरुबा हो, अहदे- वफा हो, मेरी चाहत हो,
तुम्हें चाहता हूँ, तुम्हें अपनी बनाना चाहता हूँ//
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भावनाओं के समंदर में,
इक तूफान सा आता है,
हर पड़ी रह- रह के मुझे,
सिर्फ तुम्हारा ख्याल आता है/
सोचता हूँ घर में बैठ कर,
तुम क्या करती होगी,
मेरे चलते वक्त याद वो,
तुम्हारा सलाम आता है//
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वाराणसी, यू० पी० कालेज 1970

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