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माना तुम हसीं भी हो, दिलजबीं भी हो,
हमदम भी हो मेरी, दिल की यकीं भी हो,
आस मेरी आकर बदलो इत्मीनान में,
क्या जानो, ख्वाबों की तुम, दिलरुबी भी हो/
व्यर्थ में मृदुल मुस्कानों को लुटाने से क्या फायदा?
भरी इस महफिल में बिजली गिराने से क्या फायदा?
बहारें आनी होंगी मेरे वीरान दिल में तो आएँगी ही,
बेमेल इस मौसम में जल्वे दिखाने से क्या फायदा?
तुम मेरी ख्वाबदीदा अरमानों की सरजमीं भी हो,
माना तुम हसीं भी हो, दिलजबीं भी हो/
काले बोर्ड पर अक्षरों का पढ़ना तुम्हारा गौर से,
सर घुमा कर देखना मुझे खास निगाहे चोर से,
क्या है अदा? क्या है सदा? बन कर अन्जान,
देते हो मुझे निमंत्रण आज तुम बड़ी दूर से/
हुस्ने बहारा, दिले सितारा, तुम बहार में बदली भी हो,
माना तुम हसीं भी हो, दिल जबीं भी हो/
वो अचानक तुम्हारा उठ कर चले जाना क्लास से,
फिर बाहर जाकर पीना पानी, कैंटीन के गिलास से,
बहुत खूब! खुद की प्यास बुझाने का उम्दा है तरीका,
मेरा क्या, जो घबरा गया हूँ गमे- फर्दा के लाजवाल से/
मेरी भी प्यास बुझाओ, तुम बड़ी नरम नमीं भी हो,
माना तुम हसीं भी हो, दिल जबीं भी हो/
सोचता हूँ पता लगाऊँ किसी तरह घर तुम्हारा,
क्या लेकर देखूँ डेस्क पर रखा रजिस्टर तुम्हारा,
रायटिंग तुम्हारी क्या मालूम समझ आएगी या नहीं,
तुम्हीं बता दो, तुम तो जानती हो हाल दिल का हमारा/
घर से क्या लेना, सोचता हूँ तुम बड़ी नामी भी हो,
माना तुम हसीं भी हो, दिल जबीं भी हो/
लौट कर आओगी, अब जाने तुम कब तक,
आस मेरी पूरी होगी कब तक, लौटोगी कब तक?
कितनी बला की जाने फिजा में गर्मी भरी है?
तुम में शरर- ए- इश्क भड़केगी भला कब तक?
पुरशबाब भी हो, अदा से तुम बड़ी इश्की भी हो,
माना तुम हसीं भी हो, दिल जबीं भी हो/
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अशआर
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हमने कोई तकल्लुफ नहीं दिखाया है,
हमने आज जी भर कर खाया है/
कीजिएगा गुस्ताखी हमारी माफ!
आपके हिसाब में जो घाटा आया है//
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साथ में देने को कुछ न था,
तो बाजार से मँगाया होता/
चीनी भी न थी तुम्हारे पास जो,
तो पानी में नमक ही मिलाया होता//
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सोचता हूँ, तुम क्लास में क्या करती होगी,
मेरी तरह क्या पीछे बैठे कविता लिखती होगी?
मेरे' सर' पूछते हैं, तो मैं खामोश ही रह जाता हूँ,
तुम्हारी' मैडम' जब पूछती होंगी, तब तुम क्या
करती होगी//
राजीव' रत्नेश'
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