आज ही बहना चाहूँ
----- राजीव रत्नेश
गम जमाने के अब तेरे साथ ही सहना चाहूँ,
तेरे साथ बहाव में आज ही बहना चाहूँ/
कल को किसने देखा, आए नआए,
मैं तो आज तुझसे मिलना चाहूँ/
मेरे शेर पे कोई इरशाद करे न करे,
मैं तो बस तुझे गजल सुनाना चाहूँ/
दिखाने को जमाने को वजह- ए- अस्ल,
मैं तो बस एक अदद आईना चाहूँ/
रात भर कहकशाँ से पूछता रहा तेरा पता,
चाँद के साथ सिवा तन्हाई क्या चाहूँ/
इतना न आजमा मेरी मुहब्बत को,
तेरे नाम से ही मशहूर होना चाहूँ/
आगे कुआँ, जीछे खाई देख, तुझे दी सदा,
तेरा सारा गम अपने सीने में छिपाना चाहूँ/
तेरी गिरफ्तारी ही मुझे रास आ गई है,
तुझे तो बस नया आसमाँ देना चाहूँ/
तूफान- सा क्यों उठा सागर में, चाँद के आने से,
मैं तो दाग में भी एक अफसाना देखना जानूँ/
अब खामोश रह कर मुहब्बत का तूफान न उठा,
वरना जलता हुआ ये आशियाना देखना चाहूँ/
रतन, अब और किसी नाम की हसरत नहीं,
तेरे नाम से ही अपना जमाना चाहूँ/
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