Sunday, October 4, 2026

आज ही बहना चाहूँ ---- गजल

आज ही बहना चाहूँ
----- राजीव रत्नेश

गम जमाने के अब तेरे साथ ही सहना चाहूँ,
तेरे साथ बहाव में आज ही बहना चाहूँ/

कल को किसने देखा, आए नआए,
मैं तो आज तुझसे मिलना चाहूँ/

मेरे शेर पे कोई इरशाद करे न करे,
मैं तो बस तुझे गजल सुनाना चाहूँ/

दिखाने को जमाने को वजह- ए- अस्ल,
मैं तो बस एक अदद आईना चाहूँ/

रात भर कहकशाँ से पूछता रहा तेरा पता,
चाँद के साथ सिवा तन्हाई क्या चाहूँ/

इतना न आजमा मेरी मुहब्बत को,
तेरे नाम से ही मशहूर होना चाहूँ/

आगे कुआँ, जीछे खाई देख, तुझे दी सदा,
तेरा सारा गम अपने सीने में छिपाना चाहूँ/

तेरी गिरफ्तारी ही मुझे रास आ गई है,
तुझे तो बस नया आसमाँ देना चाहूँ/

तूफान- सा क्यों उठा सागर में, चाँद के आने से,
मैं तो दाग में भी एक अफसाना देखना जानूँ/

अब खामोश रह कर मुहब्बत का तूफान न उठा,
वरना जलता हुआ ये आशियाना देखना चाहूँ/

रतन, अब और किसी नाम की हसरत नहीं,
तेरे नाम से ही अपना जमाना चाहूँ/

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