Saturday, October 17, 2026

ख्यालों को परवाज करूँ कैसे गजल

ख़यालों को परवाज़ करूँ कैसे,
शक्ल-ए-फ़साना करूँ कैसे।
अफ़साना तो अपना मुख़्तसर-सा है,
हर दर्द का बयान करूँ कैसे।
तेरे नैन-नक़्श का अजब उठान,
ऐसे हुस्न का बयान करूँ कैसे।
तेरी हँसी, तेरी शिकायतें भी,
यादों से उनको जुदा करूँ कैसे।
तेरी शादी में मेरा नाम न था,
उस चोट को लफ़्ज़ों में ढालूँ कैसे।
तेरी महफ़िल से चाट खाकर लौटा,
उस मंज़र को दिल से मिटाऊँ कैसे।
ज़माने के सामने हँसता रहा,
दिल का अफ़साना अयाँ करूँ कैसे।
रतन, जो गुज़री वही तो ग़ज़ल है,
उसमें तेरा नाम छुपाऊँ कैसे।

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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!