Thursday, April 16, 2026

महफूज हो आज तुम ( गजल)

महफूज हो आज तुम मेरी रहबरी के दम से,
रास्ता बदल लिया तुमने, आखिरी कदम पे/

दुनिया बदल गई, तो मुझे मलाल न हुआ,
तुम भी हो गए हुनरमंद, तो कोई गम न हुआ/

अपना तो यही फसाना है, रास्ता बदल गए राजदां,
कोई अपना न रहा, कोई अपना न हुआ/

कोई चाँद अपना हुआ, न कोई सितारा अपना हुआ,
दोस्तों ते सुना,' वो तो कभी का गैर का हो गया'/

किनाराबंदी दरिया का किया, तुफानों का रुख मोड़ा,
पत्थर पर लकीर खींचकर हुआ वो खड़ा, फिर न डिगा

गिला भी नहीं, शिकवा भी नहीं किसी से कोई,
मेरे यार सा निराला न था दुनिया में कोई

बहुत जतन से ढूँढा, मिल जाता मुझे भी तुमसा कोई,
खींच लेता पाँव अपना, कहता, रहता न यहाँ कोई/

चक्कर कोई तुमसे, हमने तो पाला न था,
आगे बढ़ के पलट आए, मिला जो न रास्ता कोई/

पासे- वफा तुमसे हुआ, न निभा सके रस्म कोई,
शबे- फिराक में न तुम आए, न आया दूसरा कोई/

मौसम की मार पे भी" रतन", तुम तो संग- संग थे,
रास्ता बदल लिया तुमने ही, आखिरी कदम पे/

             राजीव रत्नेश
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