अहबाब कहते हैं,
मेरी आँखें बड़ी- बड़ी है,
तेरी पासपोर्ट साइज फोटो भी,
जूम करके देखने पर,
आदमकद हो जाती है/
हैरतमंद हूँ तेरी मिची- मिची आँखों से,
जिसमें मैं और मेरी तस्वीर भी,
सिमट कर गर्क हो जाती है/
अपनी उतारी तस्वीर को देख कर,
ही तो तुमने कहा था,
कि मैं दुनिया का बेस्ट फोटोग्राफर हूँ/
तेरा यह भरम न टूटने पाए,
इसलिए तुमसे बिछड़ने के बाद,
खुद कोई तस्वीर नहीं खींची/
अब तो नासमझ भी सेल्फी लेने,
और फोटोग्राफी में महारत ,
हासिल करने की होड़ में है/
क्यूँकि तुम्हारे ही घर के बच्चे,
मुझे तुम्हारी ही नजरों में,
और भी गिराना चाहता हैं//
राजीव रत्नेश

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