तुमसे ही कहते हैं अब तो बात तुम्हारी,
दिल को भा गई बदगुमानी भी तुम्हारी/
तेरे इसरार पे, मेरी सौंपी चाकलेट तेरे मुँह में गई,
वफायें कम, शुक्रिया न कहना मेहरबानी तुम्हारी/
रुखसारों से हौले-हौले तेरा मुस्कराना,
मेरे आगोश से निकल कर, फिर पास आने का इरादा/
अपनी हाँ को ना से छिपाना, तौबा भी तो मेरी ही,
आता है याद रह- रह वो मंजर रात का सुहाना/
कभी छिपना, कभी पर्दा हटा के मुझे निहारना,
छिपा नसकी तुम थोड़ी भी अपनी इजहारे- तमन्ना/
कहानी पूरी न हो, बिना जिक्रे- जोशे- जवानी,
ऐसी तो गजल न देखी, न सुनी कहानी/
अब तो सूरज ढलान पे आने-आने को है,
उतर आ खाट से, हाथ के डंडे के सहार/
तेरी सरगोशियों से एक तूफां बया होता है,
बदनीयती तेरी मैं भी सबसे कह दूँगा जबानी/
असर तेरी बात का मुझ पर नहीं, वैसे भी मेरी ना है,
वो बात भी महफिल में सुनावेंगे, जो ना सुनानी है/
आ जाओ एक बार फिर से आगोश में सरे- महफिल,
तेरा किस्सा, तेरी कहानी" रतन" को याद है जबानी//
राजीव रत्नेश
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