मुसाफिर की जिन्दगी में तो,
ठहर-ठहर कर ही चलना होता है/ .
सुकूं उसे भले कहीं न मिले,
बारहा काँटों पे से गुजरना होता है//
राजीव रत्नेश
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" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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