Friday, May 1, 2026

तुझे मुबारक हो नया साल ( कविता)

तुझे मुबारक हो नया साल
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तया साल तुझे याद रहे, तुझे भेजा है मुबारकबाद,
सुबह से इंतजार में बैठा हूँ, लेकर खिला गुलाब/

झीनी-झीनी बदली में, चंद्रिका खिली आस्मान में,
आज देखो निकला है गगन में, रश्मि- रंजित चाँद/

सुबह का तारा है दीया, जिसने आधी रात पुकारा,
देखो फिर आई है, आज मुझे तुम्हारी याद/

बिस्तर पे बैठ के यूँ ही मुस्कराती हो, जैसे बादल में चाँद,
बड़ी शर्मीली हो लगता, जैसे हो तुम्हारी सुहागरात/

दो हँसो का जोड़ा बिछड़ा, एक दिल्ली, दूसरा मुंबई में,
तुम चाहोगी तो हो जाएगी, हमारी तुम्हारी मुलाकात/

सूरते-हाल कुछ समझ में आता नहीं, क्या तुमसे बताएँ,
फिर-फिर आती हो याद, याद दिलाए तुम्हारी चाँद/

हम तुम्हारी याद में, तुम्हारे इंतजार में हो गए बर्बाद,
क्या याद तुम्हें कभी आता हूँ, भेजा है खत में गुलाब/

करीब था जो लमहा, और भी दूर होता गया, तुमसे क्या उम्मीद?
तुमने शेर सुनाया, हमने दिल से कहा इरशाद/

बराए मेहरबानी एक बार जो मुकाबिले- महफिल होते,
हमें बार- बार याद आता अपना मुकदर अपना चाँद/

तेरी नजरों का निशाना, कल तलक तो कोई और था,
बिना अपनी चँदनियाँ के किस कदर आज भी उदास है चाँद/

बतौरेखास आज तू आकर बज्म में देख ज़रा,
कितना कुम्हला गया है, आज तेरी बगिया का गुलाब/

हम न तुझसे नजर मिलायेंगे, न ही तेरे पास आएँगे,
तुमने हमको किया है बरबाद, किस सूरत किया है नाशाद/

दूर जाकर आज तक हमसे, किस कदर परेशान है चाँद,
हमारे लिए राह में, बिछे थे माहो- आफताब/

पास बुलाओगे, तो भी हम न बुलाएँगे तुमको अपने पास,
दूर जाकर देखो, हम भी न करेंगे दिल से इजहार/

किसी तरह अपने पास बुलायेंगे, उसे ही करेंगे याद,
किस तरह पाऊँ उसे, मुझे आज तक पसंद है वो गुलाब/

                राजीव रत्नेश
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