तेरे प्यार को दिल में बसाया मैंने,
जुंबिशे- लब को यादगार बनाया मैंने/
दर्दे- दिल दिया, जख्मे- जिगर दिया,
साजिशों का भी सत्कार किया मैंने//
राजीव रत्नेश
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" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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