धोखे का मुझे तुमसे कोई गिला नहीं है,
माँगा था तुझे ही पर तू मुझे मिला नहीं है/
मेरे जख्मे- दिल पर नजाकतों का मरहम ही रख,
ओ बेवफा! तू नहीं क्या जानता, दर्द में शिफा नहीं है//
राजीव रत्नेश
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" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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