अपनी जुल्क की भीनी खुशबुओं में चंद पल रह लेने दो
मदमाती मस्त बयार के मौसम में मुझे अपने दिल में रह लेने दो
इक जाम की ललक है तेरे प्यासे होठों से, जिन्दगी नयी दे दो
दिल दरिया है तेरा, सीने से एक और चश्मा फूट निकलने दो //
राजीव रत्नेश
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