पंक्षी हूँ मुक्त आसमान का,
उड़ना ही मेरी फितरत है/
थके तो क्षण भर को रुके,
फिर आगे बढ़ जाना आदत है//
राजीव रत्नेश
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" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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