अभी तो शह और मात बाकी है
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जख्म भर गया निशान बाकी है/
खो गई तू, तेरी पहचान बाकी है/
आधी रात ढ़ल गई, आधी बाकी है,
आ जा तेरा इंतजार बाकी है/
सजाए बैठा हूँ अभी भी महफिल,
अभी तो दौरे- शराब बाकी है/
मेरे दिलबर, मेरे मुसव्विर!
अभी देखनी तेरी औकात बाकी है/
किस मोड़ से निकल आएगी तू,
मील के पत्थर को देखनी करामात बाकी है/
आ जा अजनबी समझ कर ही,
तेरे इश्क का अंजाम बाकी है/
कितनी रातों का जागा हूँ, थपक दे,
सुला दे रुह की थकन बाकी है/
अभी तक जाने कबसे खामोश है,
एक बार तेरा खोलना जुबान बाकी है/
करीब आके बिछी बिसात उलट दे,
' रतन ' अभी तो शह और मात बाकी है//
राजीव रत्नेश

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