Monday, March 30, 2026

क्या है दिल में तुम्हारे? ( कविता)

क्या है दिल में तुम्हारे?
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टिकोरे भी तो नहीं हैं मेरी अमराई में,
फिर तुम हाथ में पत्थर ले आए क्यूँ हो,
क्या है दिल में तुम्हारे जरा बताओ तो?
कभी जड़ में पानी भी डाला है क्या?
झूला डाल आराम से झूल रहा हूँ,
चाहो तो फुनगी तक पहुँचा सकता हूँ,
नीचे आओगे तो ब्रेक मार दूंगा अचानक,
औंधे मुँह जमीन की धूल चाटोगे/

क्या है दिल में जरा बताओ तो,
अश्रुपात करोगे क्या मेरी अमराई में?
समन्दर से कटोरे में जल भर लाए हो,
नमकीन पानी से सींचोगे क्या अमराई को/
तुम्हारे आने की खबर पहले होती,
तो ट्यूबवेल चलवा देता तुम्हारी खातिर,
समन्दर तक का सफर न करना होता,
यहीं पर टिकोरे औ' आम मिल जाते मौसम में,
तुम्हारे हाथों में पत्थर लेके आने की वजह जो होती/

झूल- झूल औ' न फूल मेरी अमराई में,
आ जाना मौसम की मस्त अँगड़ाई में,
टोकरी भर ले जाना, सबको खिलाना,
पर जरा पूछ के, क्यूँकि यह मेरी नहीं है,
इस पर हक है किसी और का,
तुम्हें अगर हक दे " वो" खिलवाड़ करने का,
बेशक झंझावातों से खेल सकते हो,
और क्या मिलेगा तुम्हें मेरी अमराई में,
क्या है दिल में तुम्हारे जरा बताओ तो?

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