उसी नाक के सरमाये में ही तो जिंदगी कट रही है,
अच्छे-खासे हैं, भले हैं साथ में इबादतो- बंदगी चल रही है/
खुद मस्त हैं, दिल भी उछलता, मचलता, कूदता रहता है,
उसी अदद नाक के सहारे, दिल की दिल्लगी भी चल रही है//
राजीव रत्नेश
" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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