मुद्दतों बाद भी देना मुहब्बत की गवाही
---- राजीव रत्नेश
ओ सितारे, चंदा और रात के नजारों,
मुद्दतों बाद भी देना, मुहब्बत की गवाही/
मिले थे मुकद्दर से, साथ गुजारे ये पचासों साल,
आँखों में धुंध छा गई, केश हुए अब श्वेत,
हिलने लगी दंत- पंक्ति, जिह्वा को मिला तालू का सहारा,
याददाश्त अब कम हुई, कौन बाँटेगा महफिल में खुशी/
ऐ बादे- सबा! आस्मां के झिलमिलाते सितारों
मुद्दतों बाद भी देना, मुहब्बत की गवाही/
कौन आया, कौन गया, जान्हवी और सन्ध्या आके चली गई,
बाकी की जिन्दगी कट रही अब बस चंदा के सहारे,
कर देना उनकी भी तकदीर रौशन, जो दूर हमसे हुए,
फरेब किया मुझसे, मालूम नहीं उनकी नैय्या लगी किस किनारे/
जमाने का मिजाज समझ, उनसे दूर खुद भी हम हुए,
ओ चाँद, सूरज और सितारों देना तुम गवाही/
सुब्ह को जब उठाया हमें, सूर्य-रश्मि ने सहला कर,
हम तमतमाए और बोले,' थोड़ा इंतजार कर '
अभी क्या है जरूरत, छेड़ने की दिल के तारों को,
मुस्करा कर चंदा बोली, सुब्ह- सुब्ह न तड़पाया कर/
किस धुन में हो, उठो, जागो, सूरज न देगा कोई निशानी,
हाथ पकड़ चंदा से बोला, मेरे बाद देना मुहब्बत की गवाही/
मौसम आने पर एक कली खिली हमारे आँगन में,
हमने घूम-घूम मिठाई बाँटी, सारे रिश्तेदारों के घर में,
प्यारी सी बेटी को पहले-पहल हमने पुकारा ' पूजा ',
हमारे साथ खुशियाँ मनाई मुहल्ले और सारे चमन ने/
माना कि बेलगाम थी हमारे प्यार के राह की गाड़ी,
ओ धरती के ऊपर चहकते परिंद देना तुम गवाही/
आफातो- मसायब जो आए जीवन में, झेले हम साथ,
हमारी ' कपट- मंत्री ' की विदेश नीति हुई दिल के पार
बैठे-बिठाए तर्के- ताल्लुकात सबसे करवाया ही,
उम्र भर न पाया उस ' गौहर ' ने शौहर का साथ/
हम गहरे पानी से, निकाल लाए बेशकीमती मोती,
ओ खिलखिलाते मंजर, बादे सबा के इशारों देना गवाही/
दो साल बाद फिर चंदा को देवी-दर्शन का लाभ मिला,
घर में पूजा की दुलारी बहन तनू का आगमन हुआ,
वक्त की ताकीद पर, मेरे मम्मी-पापा तक ने खुशियाँ मनाईं,
घर में ' सत्य नारायण की कथा ' का आयोजन हुआ/
कोई भी साल बेटियों की सालगिरह से अछूता न रहा,
देती है चंदा आशिर्वाद उन्हें, दिला कर देवियों की गवाही//
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