चाहत हद से गुजरने लगी है
--- राजीव रत्नेश
कली दिल की मचलने लगी है/
तेरी आस्जू फिर सँवरने लगी है/
दिल का तुझसे तकाजा है बस यही,
तू खुशी बन के दिल में उतरने लगी है/
मुहब्बत मेरी नाकाम वफा का सुबूत नहीं,
तेरी अदा ही अब चाल चलने लगी है/
तेरी आहट से धड़कन बढ़ी है मेरी,
खामोशी भी कुछ कहने लगी है/
तेरे आने की उम्मीद क्या जगी दिल में,
हर घड़ी अब मुझे खूबसूरत लगी है/
जिसे समझा था, महज एक खयाल,
वही तस्वीर दिल में ठहरने लगी है/
' रतन ' अब दिल को सँभालो अपने,
ये चाहत कहीं हद से गुजरने लगी है//
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