Thursday, September 10, 2026

चाहत हद से गुजरने लगी है ( गजल )

चाहत हद से गुजरने लगी है
     --- राजीव रत्नेश

कली दिल की मचलने लगी है/
तेरी आस्जू फिर सँवरने लगी है/

दिल का तुझसे तकाजा है बस यही,
तू खुशी बन के दिल में उतरने लगी है/

मुहब्बत मेरी नाकाम वफा का सुबूत नहीं,
तेरी अदा ही अब चाल चलने लगी है/

तेरी आहट से धड़कन बढ़ी है मेरी,
खामोशी भी कुछ कहने लगी है/

तेरे आने की उम्मीद क्या जगी दिल में,
हर घड़ी अब मुझे खूबसूरत लगी है/

जिसे समझा था, महज एक खयाल,
वही तस्वीर दिल में ठहरने लगी है/

' रतन ' अब दिल को सँभालो अपने,
ये चाहत कहीं हद से गुजरने लगी है//

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