Saturday, September 5, 2026

दूर जाने की नीयत तेरी थी ( गजल )

दूर जाने की नीयत तेरी थी  ( गजल )
+++++++++++++++++++++++

अहसास-ए- दूरी थी, कोई दूसरा ठिकाना न था/
तेरे सिवा मेरा कोई और आशियाना न था/

कब की बिछड़ी फिर कब मिली थी मुझसे,
फिर उम्र भर दूर जाने का इरादा न था/

प्यार का वास्ता दिया था तूने मुझको,
मेरी तरफ से कोई तुझसे शिकवा न था/

मिल कर वापस लौटना न था शायद तुझको,
वापसी का शायद तेरे पास किराया न था/

उम्र भर तरसाया तूने खुद अपने लिए,
मुझे मनाने का तेरा कोई बहाना न था/

चली आई थी मिलने, सब कुछ पीछे छोड़ कर,
तब कोई हम दोनों के बीच फसाना न था/

मैं तुझे रोकता भी कैसे जाने से पहले,
क्या जानता था तेरा लौटने का इरादा न था/

प्यार का सूरज सर- ए- फलक तक आ गया था,
शायद हमारी किस्मत में उसका ढ़लना न था/

तेरी मुहब्बत सिर्फ मेरा वहम ही तो न थी,
तेरे बाप के आगे मगर मुझे झुकना न था/

तूने ही तो प्यार का दीप जलाया था,
मैंने भी तो कभी उसको बुझाया न था/

दूर जाने की नीयत तो बस तेरी थी,
मैंने दिल से तुझे कभी भुलाया न था/

           राजीव रत्नेश

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!