Monday, September 7, 2026

रतन बेफिक्र था ( गजल )

रतन बेफिक्र था  ( गजल )
++++++++++++++++++

देख कर तेरा उल्लास, ऐ जिन्दगी!
पैरों से लगती न थी जैसे जमीं/

दिल आहत हुआ देख कर खामोशी तेरी,
बाप के सामने भी न खुलती थी जुबाँ/

देखते रहे हमेशा तेरा सयानापन,
फिर भी कली थी तू अभी अधखिली/

रूप तेरा दिखाती थी मुझको यामिनी,
भोर होते ही बिखर जाती थी चाँदनी/

फरेब खाए थे दोनों ने जिन्दगी में,
तेरी- मेरी एक थी दुनिया, एक थी कहानी/

तेरी- मेरी कश्ती जब साहिल पे आ रुकी,
सज्दे में झुक गई सीप, ठहर गई रवि- रश्मि/

पाकर मेरा साथ तू खुश थी बहुत,
वरना अब तक विचरती थी तू अकेली/

कभी स्निग्ध- सुहावन लगती थी तू,
कभी आँखों से चलाती थी तीर जहरबुझे/

सलीका सिखाया तूने मुझे जीने का,
खुद मगर थी अल्हड़, चंचल कामिनी/

मुहब्बत ही एक दिन बैरन बनेगी---
' रतन ' ने बेफिक्र होकर छेड़ दी थी जीवन- रागिनी/

               राजीव रत्नेश

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!