Saturday, June 20, 2026

मिलेगा सरे- राह तुमसे ( गजल )

मिलेगा सरे- राह तुमसे  ( गजल)
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तेरी मुहब्बत का मुझे मुकम्मल जहां नहीं मिलता/
कभी जमीं नहीं मिलती, कभी आस्मां नहीं मिलता/

उलझ गई है कुछ यूँ तेरे- मेरे बीच मस्ती की डोर,
कभी गाँठ नहीं खुलती, कभी सिरा नहीं मिलता/

बिना किसी पचड़े में पड़े ही, फूल गया तेरा पेट,
बस कैफियत यही कि मुझे तो कोई मामला नहीं 
लगता/

ससुराल गया था तू, लौट कर खोया- खोया रहता है तू,
बात क्या है, मुझे तो यह कोई फसाना नहीं लगता/

दिल पत्थर, कलेजा मोम, नयन मेरे अश्कबार,
कहीं से तू हद्दे- दिल से मुझे चाक गरेबां नहीं लगता/

तेरा कभी कोई हाल, तेरा कभी कोई हौसला नहीं मिलता,
मुझे तो तेरी ओर से मुहब्बत का कोई संदेशा नहीं
मिलता/

चले थे हम- तुम साथ- साथ, सू- ए- मंजिल तो,
अड़ जाए हमारी राह में, मुझे तो ऐसा जमाना नहीं लगता/

चलो एक दूसरे का हाथ पकड़, हम- तुम कहीं खो जाएँ,
मुझे तो तेरे दर के सिवा, दूसरा कोई ठिकाना नहीं मिलता/

सीरत तेरी कसीदा, मैं मिजाजे- गजल तेरा हूँ तो सही,
रिदा सितारों भरा कोई दरमियां नहीं मिलता/

मिलेगा यूँ ही तुझसे सरे- राह चलते-चलते' रतन '
शामिल उसे कम से कम तुम हाजिरे- मुशायरा करना/

                    राजीव रत्नेश
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" रास्ते में चलते-चलते ही, वो दिल का हाल कह जाता है,
रतन जब चंदा से मिलता है, तो जमाना मुशायरा बन जाता है"

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