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दो दिन हँसा के प्यार में ये तुमने क्या किया/
माँगी थीं चंद खुशियाँ, तुमने रुला दिया/
चुभने लगी पलक में अब तो चंदा की चाँदनी,
तड़पती रही जुल्फों की कैद में ये जिन्दगी/
खिलने के पहले किसने गुल को मुर्झा दिया,
दो दिन हँसा के प्यार में ये तुमने क्या किया/
लुट गया एक शायर की यादों का सुरमई जहां,
जिंदगी के अँधेरों में खो गईं तुम किस ओर कहाँ/
माँगा था मैंने क्या और तुमने मुझे ये क्या दिया,
दो दिन हँसा के प्यार में ये तुमने क्या किया/
उम्मीद थी क्या, और धोखे के सिवा तुमसे क्या मिला,
किस्मत के भरोसे जो बैठा, उसे कुछ नहीं मिला/
जाने क्यों तुमने जाम में, ये जहर कैसा मिला दिया,
दो दिन हँसा के प्यार में ये तुमने क्या किया//
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