आज मेरी मुरली क्यों मौन? ( कविता)
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आज मेरी मुरली क्यों मौन?
कौन गया हृदय में दर्द घोल?
एक तान सी निकली थी,
या रुदन की अभिव्यक्ति थी/
एक मधुर हास के बदले,
ले गया हृदय को कौन मोल?
आज मेरी मुरली क्यों मौन?
कौन गया हृदय में दर्द घोल?
इसी दर्द के सहारे जिया,
इसी दर्द के सहारे घुटा/
लूट ले गया कोई खुशी,
जीवन मेरा अनमोल/
आज मेरी मुरली क्यों मौन?
कौन गया हृदय में दर्द घोल?
प्राणों में एक तुम्हीं तो,
जाने कैसे समाए थे?
जीवन- रस का प्याला देकर,
ले गए निधि बेमोल/
आज मेरी मुरली क्यों मौन?
कौन गया हृदय में दर्द घोल?
छवि निरख कर,
हृदय प्रमुदित था महा/
चुपके से अनजाने में,
कौन ले गया अश्रु मोल?
आज मेरी मुरली क्यों मौन?
कौन गया हृदय में दर्द घोल?
छवि मूक, मनोहर, मधुर,
प्राणों में अहा निस्पंदन/
दे गए आज दर्द कठोर,
मेरी मृदु कविता के बोल/
तवारिख दे रही गवाही ' ताज' की,
फिर मेरी मुरली क्यों मौन?
राजीव रत्नेश
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