दिल पर बस तेरा निशान है ( गजल )
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तुझसे मिलने की आरजू तेरी प्यास है/
दिल को तेरी ही जुस्तजू तेरी आस है/
तेरे बगल की महक, मेरे नथुनों में समाई,
जैसे दो जहां की खुशबू मेरे आस- पास है/
कबसे निकला हूँ मैं सफर- ए- हयात में,
दिन कटता नहीं औ' शाम भी उदास है/
इक लग्जिशे- लब ने कयामत ढाई है,
शर्म से झुकी पलकें, चेहरा हुआ लाल है/
किसने कहा कि तुझ बिन परिशान हूँ,
तेरे बिना, तू जानती है, उल्झी हयात है/
खींच लाई है तू रहे- मंजिल की तरफ मुझे,
यही तो दिल को दिया तूने फरेबे- खास है/
खेतों में चरती भेड़ें झुंड में घुस चलती हैं,
डंडों से हांकते उन्हें, चरवाहों के ठाठ हैं/
नहर काट खेतों को सींचते किसान,
कड़ी धूप में अलापते राग मल्हार हैं/
आएगी तू खिंच कर मेरे पास ही,
यही तो मेरे दिल को अहसास है/
लाल रिबन से बँधी तेरी चोटी,
दिल कहता, तू हुस्ने- बेमिसाल है/
अदा तेरी कहती है, ये तो कुछ नहीं,
यही तो असली नजाकते- खास है/
तेरे हुस्न को मेरे इश्क की चाहत,
ये तेरा मुझ पर कितना बड़ा अहसान है/
जीनते- महफिल कोई है तो तू है,
तू ही मेरे धड़कते दिल की शान है/
बिना समझे-बूझे तेरा बाप भड़क गया,
देख कर तुझे मेरी बाहों के पाश में/
नहीं माना, तुझे पकड़कर आखिर ले गया,
लाख समझाया, कि योगा की यही पहचान है/
देख कर मुहब्बत, सुन कर दास्ताने- दिल,
हुआ जमाना आखिर कितना बदहवास है/
तुझे पाकर दिल को नहीं कोई मलाल है,
तू ही मेरी चाहत, मेरे दिल का अरमान है/
पत्थर दिल पे रख के तुझे पुकारा ' रतन ',
मेरे दिल पर पड़ा बस तेरा निशान है//
राजीव रत्नेश
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